नई दिल्ली. भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (DCC) पर मुहर लग गई है, जो कि 15 जुलाई से लागू हो जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे भारत के निर्यात, कारोबार और पेशेवरों को बड़ा फायदा मिलेगा.
पीयूष गोयल और जोनाथन रेनॉल्ड्स ने जुलाई 2025 में समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
इस समझौते के तहत भारत के करीब 99% निर्यात को UK में जीरो कस्टम ड्यूटी का लाभ मिलेगा. इससे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, चमड़ा, केमिकल, दवाइयों, समुद्री उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, मछुआरों, MSMEs और उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे.
सेवा क्षेत्र में भी IT, ITES, शिक्षा, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विसेज़ समेत 137 उप-क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को बेहतर बाज़ार मिलेगा. साथ ही हर साल 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीतकारों के लिए भी विशेष अवसर दिए जाएंगे.
सोशल सिक्योरिटी समझौते के तहत UK में अस्थायी तौर पर काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों और कंपनियों को *दोहरी सोशल सिक्योरिटी योगदान (Double Contribution) से छूट मिलेगी. यह छूट अब 3 साल की जगह 5 साल तक रहेगी, जिससे 75,000 से ज्यादा भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है.
सरकार के मुताबिक, यह समझौता ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है और भारत-UK के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगा. भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर 14 दौर की लंबी बातचीत के बाद 6 मई 2025 को सहमति बनी थी.
इसके बाद 24 जुलाई 2025 को लंदन में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के बिजनेस एवं ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर भी मौजूद थे.