Turkey Pakistan Saudi Defence Pact,सऊदी और पाकिस्तान के ‘इस्लामिक NATO’ में शामिल होगा तुर्की, खलीफा एर्दोगन ने मुनीर को दी मंजूरी – turkey set to join pakistan saudi arabia defence pact erdogan nod asim munir on islamic nato india impact – Pakistan News
Asim Munir Turkey Visit: पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर तुर्की के दौरे पर पहुंचे हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने मुनीर के साथ बातचीत के बाद सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते में शामिल होने को मंजूरी दे दी है।
तुर्की के दौरे पर पहुंचे असीम मुनीर, एर्दोगन से की मुलाकात
अंकारा: परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान का इस्लामिक नाटो बनाने का सपना साकार होता दिख रहा है। सऊदी अरब के बाद अब पाकिस्तान तुर्की के साथ रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता करने जा रहा है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर तुर्की के दौरे पर पहुंचे हैं। तुर्की पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल होने के लिए अहम बातचीत कर रहा है जिससे अंकारा इस त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन में शामिल हो सकता है। आगे चलकर इसमें मिस्र को भी शामिल करने की योजना है। बताया जा रहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मुनीर से बातचीत के बाद इस सुरक्षा गठबंधन में शामिल होने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।
सीएनएन न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और रणनीतिक भागीदारी पर बातचीत हुई। तुर्की को सऊदी और पाकिस्तान के रक्षा समझौते में बड़ा मौका दिख रहा है। तुर्की चाहता है कि वह इन दोनों देशों को हथियार, ड्रोन और फाइटर जेट बेचकर पैसा कमाए। तुर्की ने बड़े पैमाने पर हथियार पाकिस्तान को बेचे हैं। इसमें युद्धपोत, किलर ड्रोन, मिसाइलें शामिल हैं। ड्रोन सुपरपावर तुर्की अपना कान फाइटर जेट भी पाकिस्तान को बेचना चाहता है। वहीं पाकिस्तान के पास पैसा नहीं है लेकिन उसकी नजर सऊदी अरब के पैसे पर है।
सऊदी अरब में तैनात है पाकिस्तानी सेना
सऊदी अरब इस समय ईरान और उसके प्रॉक्सी हूतियों के हमले का सामना कर रहा है। सऊदी अरब ने इसी वजह से पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया है। इसके बाद 10 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी जवान इस समय सऊदी अरब में मौजूद हैं। पाकिस्तान ने अपने फाइटर जेट भी सऊदी अरब भेजे हैं। इसके बदले में पाकिस्तान को सऊदी अरब से जमकर पैसा मिल रहा है। सऊदी का दावा है कि वह अब पाकिस्तान के परमाणु छतरी के नीचे आ गया है। वहीं तुर्की की बात करें तो उसने पाकिस्तान के एफ-16 फाइटर जेट को अपग्रेड करके भी पैसा कमाया है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि असीम मुनीर की यात्रा के दौरान इस रक्षा तंत्र को स्थापित करने के लिए बातचीत हो रही है। इसको लेकर आगे अभी और भी बातचीत होगी। असीम मुनीर और एर्दोगन की बातचीत के दौरान ईरान युद्ध और हूतियों को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद रणनीतिक और रक्षा समझौतों को मजबूत करने पर सहमति बनी। ईरान युद्ध के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस इलाके में पश्चिमी देशों की सुरक्षा गारंटी कमजोर हो गई है और अब तुर्की तथा पाकिस्तान इसका फायदा उठाना चाहते हैं।
क्या इस्लामिक नाटो ले रहा है आकार?
खुफिया सूत्रों का कहना है कि इस डील के बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाला ‘इस्लामिक नाटो’ आकार ले रहा है। इसे R-4 ग्रुप भी कहा जा रहा है जिसमें पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब शामिल होंगे। R-4 ग्रुप चाहता है कि वह रक्षा समन्वय और कूटनीतिक सहयोग के जरिए क्षेत्रीय संघर्षों में अपनी भूमिका निभाए। यह प्रस्ताविक ब्लॉक सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांत पर काम करेगा। यही नाटो का भी मूल मंत्र है। इसमें एक देश को धमकी या खतरा पूरे समूह को खतरा माना जाएगा।
भारत-इजरायल-यूएई गठबंधन का डर!
सऊदी अरब अपने दोस्त मुस्लिम देशों का एक बड़ा सुरक्षा शिखर सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। इसमें इजरायल से लेकर हूतियों के खतरे पर बातचीत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत, यूएई और इजरायल के बीच बढ़ती दोस्ती पर भी R-4 की नजर है। इजरायल की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र डरे हुए हैं। वहीं ईरान के समर्थन वाले हूती भी सऊदी अरब की नाक में दम किए हुए हैं। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साल 2025 में आपसी रक्षा समझौता हुआ था।
लेखक के बारे मेंशैलेश कुमार शुक्लाशैलेश कुमार शुक्ल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में फॉरेन अफेयर्स एडिटर (foreign affairs editor) हैं। वे नवभारत टाइम्स की ‘दुनिया’ (World) टीम का नेतृत्व करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 17 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। शैलेश कुमार शुक्ल ने सितंबर 2017 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 8 वर्षों में आर्मेनिया-अजरबैजान के युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, इजरायल-हमास जंग, ईरान-इजरायल संघर्ष, भारत-पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर, तालिबान-पाकिस्तान तनाव, चीन-ताइवान विवाद, वेनेजुएला संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का व्यापक कवरेज किया है।
वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्टोरी और वीडियो के जरिए विश्लेषण देना शैलेश की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- फॉरेन अफेयर्स खासकर दक्षिण एशियाई राजनीतिक घटनाक्रम, डिफेंस, वैश्विक संघर्ष और उनका भारत की राजनीति और भारत के आम लोगों पर असर।
पत्रकारिता अनुभव: अखबार, न्यूज एजेंसी और डिजिटल मीडिया में 17 साल से कार्यरत
शैलेश कुमार शुक्ल ने साल 2009 में नई दिल्ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद यूनीवार्ता, फिर प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की भाषा जैसी प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसियों में वर्ल्ड न्यूज डेस्क पर काम किया। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है। शैलेश कुमार शुक्ल ने साल 2005 से 2007 तक प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल अफेयर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन (MA) किया है। इस दौरान उन्होंने South Asia Regional Security सब्जेक्ट में स्पेशलाइजेशन किया। शैलेश कुमार शुक्ल ने साल 2007 से 2009 के बीच माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MA) किया है। इस दौरान उन्होंने विदेश पत्रकारिता में रुचि होने की वजह से इस पर खास फोकस किया।
पुरस्कार: विदेश पत्रकारिता में शानदार कवरेज के लिए ‘उत्कृष्ट संपादक’ पुरस्कार
शैलेश के लिए खास इंटरव्यू:
जोसेफ वू (Joseph Wu)
जोसेफ वू ताइवान के एक अनुभवी राजनयिक हैं, जिन्होंने लंबे समय तक ताइवान के विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
गीर्ट विल्डर्स (Geert Wilders)
गीर्ट विल्डर्स नीदरलैंड के एक प्रमुख दक्षिणपंथी राजनीतिज्ञ और पार्टी फॉर फ्रीडम (PVV) के संस्थापक हैं। वे अपनी कट्टर आव्रजन-विरोधी नीतियों और मुखर बयानों के लिए विश्व स्तर पर जाने जाते हैं।
सना हाशमी (Sana Hashmi), डॉ. सना हाशमी ताइवान-एशिया एक्सचेंज फाउंडेशन (TAEF) में एक पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव उन्हें एशियाई भू-राजनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोधकर्ता बनाते हैं।… और पढ़ें