चीन ने बलूचिस्तान में अपने कई प्रोजेक्ट पर मंडराते सुरक्षा संकट को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी दी है। इन प्रोजेक्ट्स पर बंदी की तलवार लटक रही है, क्योंकि रास्तों के बंद होने से जरूरी माल की आपूर्ति बाधित है। इसके अलावा खदानों से निकलने वाला कच्चा माल भी बाहर नहीं निकल पा रहा है।

सैंदक मेटल्स लिमिटेड ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने सैंदक मेटल्स लिमिटेड ने पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को एक पत्र लिखकर बताया था कि बिगड़ते हालात जरूरी सामान की ढुलाई में रुकावट डाल रहे हैं। उसने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर बलूचिस्तान में स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट को एक महीने के भीतर अपना कामकाज बंद करना पड़ सकता है। पाकिस्तानी ऊर्जा मंत्रालय को यह पत्र सैंदक मेटल्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ने 29 जून को लिखा था।
सैंदक मेटल्स लिमिटेड ने पत्र में क्या लिखा?
इस पत्र में सैंदक मेटल्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा था कि बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसे प्रोजेक्ट के लिए जरूरी सामान की डिलीवरी पर बुरा असर पड़ रहा है। इस पत्र में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट में बिना रुकावट कामकाज जारी रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि उत्पादन के लिए जरूरी सामान और लॉजिस्टिकल सपोर्ट की कमी से अगले महीने के भीतर प्रोजेक्ट का काम रुकने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
बलूचिस्तान में विद्रोहियों के हमले जारी
बलूचिस्तान में हाल के दिनों में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) समेत कई दूसरे विद्रोही संगठनों के हमले जारी हैं। बीएलए ने प्रांत के कई महत्वपूर्ण रास्तों पर अस्थायी कब्जा कर रखा है। इस कारण इन रास्तों से न तो सुरक्षाकर्मी गुजर पा रहे हैं, और ना ही माल की ढुलाई हो पा रही है। बलूच विद्रोहियों का कहना है कि इस नाकाबंदी का मकसद खनिजों की ढुलाई, व्यापारिक गतिविधियों और सरकारी सप्लाई रूट में रुकावट डालना है। उन्होंने इसे अपने प्रांत के शोषण से जोड़ा।
बलूचिस्तान में चीन का भारी निवेश
- वहीं, चीन ने बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसमें चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी शामिल है, जो अकेले 62 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रोजेक्ट है।
- इस बजट का अधिकांश हिस्सा ऊर्जा परियोजनाओं (33.7 अरब डॉलर), यातायात और बुनियादी ढांचे (9.7 अरब डॉलर) और ग्वादर बंदरगाह के विकास पर खर्च हो रहा है।
- चीन बलूचिस्तान के जिन प्रोजेक्ट्स में काम कर रहा है, उनमें ग्वादर पोर्ट के अलावा सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट और रेको डिक माइनिंग प्रोजेक्ट अहम हैं।
- पिछले कुछ वर्षों में, चीनी इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और उनके काफिलों पर कई बार हमले हुए हैं, जिनमें मौतें भी शामिल हैं।
- चीन ने बार-बार पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह देश में काम कर रहे चीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए।
