CPEC News: बलूचिस्तान में पाकिस्तान की फजीहत, विद्रोहियों की नाकेबंदी से डरे चीन ने दी प्रोजेक्ट बंद करने की धमकी – china warns pakistan on chinese projects in balochistan face closure due to security situation


चीन ने बलूचिस्तान में अपने कई प्रोजेक्ट पर मंडराते सुरक्षा संकट को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी दी है। इन प्रोजेक्ट्स पर बंदी की तलवार लटक रही है, क्योंकि रास्तों के बंद होने से जरूरी माल की आपूर्ति बाधित है। इसके अलावा खदानों से निकलने वाला कच्चा माल भी बाहर नहीं निकल पा रहा है।

Pakistan Army Balochistan
पाकिस्तानी सेना
क्वेटा: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चीनी प्रोजेक्ट्स बंद होने के कगार पर हैं। इसका प्रमुख कारण बलूच विद्रोहियों की नाकाबंदी है। इस नाकाबंदी के कारण चीन को हर दिन भारी नुकसान हो रहा है। वह इस इलाके की खनिज संपदा को बाहर नहीं भेज पा रहा है। ऐसे में चीन ने पाकिस्तान को बलूचिस्तान में जारी कई प्रोजेक्ट्स को बंद करने का अल्टीमेटम दिया है। चीन ने कहा है कि अगर बलूचिस्तान में जल्द हालात नहीं सुधरे तो उसके लिए इन प्रोजेक्ट्स को चला पाना मुश्किल होगा। इनमें सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिसे चीनी कंपनी ऑपरेट करती है।

सैंदक मेटल्स लिमिटेड ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने सैंदक मेटल्स लिमिटेड ने पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को एक पत्र लिखकर बताया था कि बिगड़ते हालात जरूरी सामान की ढुलाई में रुकावट डाल रहे हैं। उसने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर बलूचिस्तान में स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट को एक महीने के भीतर अपना कामकाज बंद करना पड़ सकता है। पाकिस्तानी ऊर्जा मंत्रालय को यह पत्र सैंदक मेटल्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ने 29 जून को लिखा था।

सैंदक मेटल्स लिमिटेड ने पत्र में क्या लिखा?

इस पत्र में सैंदक मेटल्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा था कि बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसे प्रोजेक्ट के लिए जरूरी सामान की डिलीवरी पर बुरा असर पड़ रहा है। इस पत्र में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट में बिना रुकावट कामकाज जारी रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि उत्पादन के लिए जरूरी सामान और लॉजिस्टिकल सपोर्ट की कमी से अगले महीने के भीतर प्रोजेक्ट का काम रुकने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

बलूचिस्तान में विद्रोहियों के हमले जारी

बलूचिस्तान में हाल के दिनों में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) समेत कई दूसरे विद्रोही संगठनों के हमले जारी हैं। बीएलए ने प्रांत के कई महत्वपूर्ण रास्तों पर अस्थायी कब्जा कर रखा है। इस कारण इन रास्तों से न तो सुरक्षाकर्मी गुजर पा रहे हैं, और ना ही माल की ढुलाई हो पा रही है। बलूच विद्रोहियों का कहना है कि इस नाकाबंदी का मकसद खनिजों की ढुलाई, व्यापारिक गतिविधियों और सरकारी सप्लाई रूट में रुकावट डालना है। उन्होंने इसे अपने प्रांत के शोषण से जोड़ा।

बलूचिस्तान में चीन का भारी निवेश

  • वहीं, चीन ने बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसमें चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी शामिल है, जो अकेले 62 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रोजेक्ट है।
  • इस बजट का अधिकांश हिस्सा ऊर्जा परियोजनाओं (33.7 अरब डॉलर), यातायात और बुनियादी ढांचे (9.7 अरब डॉलर) और ग्वादर बंदरगाह के विकास पर खर्च हो रहा है।
  • चीन बलूचिस्तान के जिन प्रोजेक्ट्स में काम कर रहा है, उनमें ग्वादर पोर्ट के अलावा सैंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट और रेको डिक माइनिंग प्रोजेक्ट अहम हैं।
  • पिछले कुछ वर्षों में, चीनी इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और उनके काफिलों पर कई बार हमले हुए हैं, जिनमें मौतें भी शामिल हैं।
  • चीन ने बार-बार पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह देश में काम कर रहे चीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए।
प्रियेश मिश्र

लेखक के बारे मेंप्रियेश मिश्रप्रियेश मिश्र नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (Principal Digital Content Producer) के पद पर कार्यरत हैं। वे नवभारत टाइम्स की दुनिया (World) सेक्शन से जुड़े हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनका 10 साल का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टिंग और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने मार्च 2020 में नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन जॉइन किया था।

प्रियेश मिश्र के पास वैश्विक घटनाक्रम, युद्ध, सैन्य संघर्ष, राजनयिक तनाव, कूटनीति जैसे विषयों पर न्यूज कवरेज का व्यापक अनुभव है। उन्‍होंने पिछले 5 वर्षों में आर्मेनिया-अजरबैजान के युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020-2024, इजरायल-हमास गाजा युद्ध, ईरान-इजरायल संघर्ष, भारत-पाकिस्‍तान संघर्ष ऑपरेशन सिंदूर, तालिबान-पाकिस्‍तान संघर्ष, चीन-ताइवान विवाद, वेनेजुएला संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का कवरेज किया है।

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