Saudi Arabia Iran War,क्या अमेरिका को धोखा दे रहा सऊदी अरब? प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने चुपचाप ईरान से दोस्ती की – has saudi arabia switched sides in the us-iran war mohammed bin salman foreign policy – Uae News


सऊदी अरब ने मध्य पूर्व के हालातों को देखते हुए अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव किया है। इससे मध्य पूर्व के समीकरण बदल गए हैं, जिनका असर साफ देखा जा रहा है। जो सऊदी अरब कभी ईरान पर हमले को तैयार था, आज वह उसी के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है।

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सऊदी अरब-ईरान संबंध
रियाद: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों ही देश एक दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। इस कारण पूरे मध्य पूर्व में जंग जैसे हालात हैं। हालांकि, इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण देश इस तनाव से गायब है। यह देश जितना अमेरिका के करीब है, उतना ही ईरान के भी। इसका नाम सऊदी अरब है। इस साल फरवरी में शुरू हुए मध्य पूर्व संघर्ष के दौरान ईरान ने अगर किसी ऐसे खाड़ी देश पर सबसे कम हमला किया है, जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करता है, तो उसका नाम सऊदी अरब है। ईरान ने अपने पक्के दोस्त ओमान पर भी हमले किए हैं, लेकिन सऊदी अरब को लेकर वह चुप है।

सऊदी अरब-ईरान की नजदीकियां बढ़ी

चंद दिनों पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान अधिकतर खाड़ी देशों ने दूरी बनाकर रखी। लेकिन, सऊदी अरब ने खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा। जब ईरान एक बार फिर खाड़ी देशों पर हमले कर रहा है, उस समय भी सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची नियमित रूप से एक-दूसरे से बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं सऊदी अरब ने पाला तो नहीं बदल दिया।

कभी ईरान पर हमले को तैयार था सऊदी अरब

हालांकि, जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए, तब सऊदी अरब से ऐसी खबर आई, जो आज के हालात के ठीक उलट है। उस वक्त कई मीडिया रिपोर्टों में ऐसा दावा किया गया था कि सऊदी अरब भी ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के लिए तैयार था। हालांकि, ऐसी रिपोर्ट को काफी हैरानी के साथ देखा गया, क्योंकि सिर्फ दो साल पहले ही सऊदी अरब और ईरान ने चीन की मध्यस्थता से शांति समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बहाल हुए थे और कुछ उच्चस्तरीय दौरे भी देखने को मिले थे।

सऊदी अरब और ईरान दोस्त बने

सऊदी अरब लंबे समय से ईरान की सैन्य शक्ति को अपने खिलाफ देखता रहा है। उसे ईरान के परमाणु कार्यक्रमों से उतना ही भय है, जितना इजरायल को लगता है। सऊदी अरब भी ईरान के परमाणु हथियारों को अपने अस्तित्व के खतरे के रूप में देखता है, लेकिन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के नेतृत्व में रियाद की विदेश नीति में बड़ा परिवर्तन आया है। कल तक तो ईरान सऊदी अरब का सबसे बड़ा दुश्मन था, आज वह दोस्त बनकर बैठा है।

प्रोजेक्ट फ्रीडम में शामिल होने से इनकार

जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया, तो सऊदी अरब ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। सऊदी अरब के इनकार के कारण ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रोजेक्ट फ्रीडम को शुरू करने से पहले ही बंद करना पड़ा। इसके बाद अमेरिका ने सऊदी अरब से बड़े पैमाने पर अपने रक्षा उपकरणों को हटाकर नाराजगी भी जताई, लेकिन रियाद के ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। सऊदी अरब खुद को एक ऐसे खाड़ी देश के रूप में प्रतिष्ठित करने की कोशिश कर रहा है, जिसके ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं और वह इस युद्ध से पूरी तरह तटस्थ है।

प्रियेश मिश्र

लेखक के बारे मेंप्रियेश मिश्रप्रियेश मिश्र नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (Principal Digital Content Producer) के पद पर कार्यरत हैं। वे नवभारत टाइम्स की दुनिया (World) सेक्शन से जुड़े हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनका 10 साल का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टिंग और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने मार्च 2020 में नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन जॉइन किया था।

प्रियेश मिश्र के पास वैश्विक घटनाक्रम, युद्ध, सैन्य संघर्ष, राजनयिक तनाव, कूटनीति जैसे विषयों पर न्यूज कवरेज का व्यापक अनुभव है। उन्‍होंने पिछले 5 वर्षों में आर्मेनिया-अजरबैजान के युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020-2024, इजरायल-हमास गाजा युद्ध, ईरान-इजरायल संघर्ष, भारत-पाकिस्‍तान संघर्ष ऑपरेशन सिंदूर, तालिबान-पाकिस्‍तान संघर्ष, चीन-ताइवान विवाद, वेनेजुएला संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का कवरेज किया है।

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