India-US Trade Deal: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का प्‍लान, भारत-अमेरिका ट्रेड पॉलिसी पर नहीं आएगी आंच – us proposal of 100 per cent tariff on russian oil will not halt india-us trade deal sources


नई दिल्‍ली: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने के अमेरिकी बिल से भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार बातचीत में कोई मुश्किल आने की संभावना नहीं है। सरकारी सूत्रों के हवाले से मनीकंट्रोल ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने कहा कि यह मुद्दा दोनों पक्षों की बातचीत में कोई रुकावट नहीं बना है।

सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित कानून बातचीत में कोई अड़चन नहीं बना है। दोनों देश व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सूत्र ने कहा, ‘हमारी बातचीत में यह कोई अड़चन नहीं रहा है। फरवरी में समझौते के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की गई थी। उसके तुरंत बाद रूसी तेल से जुड़े अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिए गए थे।’

रूसी तेल खरीद विवाद का मुद्दा नहीं

सूत्रों ने आगे कहा कि बातचीत के बाद के दौर में रूसी तेल की खरीद दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुद्दा नहीं बनी। इसमें पिछले महीने हुई बातचीत भी शामिल है।

भारत और रूस के व्‍यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से बताया गया है कि यह बहुत जल्‍दी अंतिम रूप लेने वाली है। काफी लंबे समय से इस पर बातचीत जारी है।

सूत्रों ने कहा, ‘डील को मानने के मामले में हमें अमेरिका से पूरा भरोसा मिला है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका इस समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमत हैं।

सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका दोनों ही ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देश बातचीत को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।

भारत रूसी तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक

ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब चिंताएं जताई जा रही हैं कि रूसी कच्चे तेल के खरीदारों को निशाना बनाने वाले अमेरिकी कदमों का असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है। भारत रूसी तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है।
14 जुलाई को अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला एक संशोधित बिल पेश किया। इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और चीन समेत रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदारों से होने वाले आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की अनुमति मिल जाएगी।

इस कदम का मकसद उन देशों को निशाना बनाकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाना है, जिनकी ऊर्जा खरीद से रूस के युद्ध प्रयासों के लिए राजस्व मिलता रहता है।

इसका नया वर्जन पहले के प्रस्ताव की तुलना में काफी नरम है। पहले के प्रस्ताव में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी।

ट्रेड डील के लिए फ्रेमवर्क समझौता हस्ताक्षर के लिए तैयार

हाल ही में, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के लिए फ्रेमवर्क समझौता हस्ताक्षर के लिए तैयार है। इस पर पहली बार फरवरी में सहमति बनी थी। बस दोनों पक्षों को सही समय और ढांचे पर फैसला करना है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ रही है।

इससे पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पहले ही अंतिम रूप ले चुका है। लेकिन, यह तब तक लागू नहीं होगा जब तक नई दिल्ली वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, चीन, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में टैरिफ के मामले में साफ लाभ हासिल नहीं कर लेती।

उनकी ये टिप्पणियां 22-24 जून के दौरान नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जेमिसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों के ठीक बाद आई हैं। इन बैठकों में दोनों पक्षों ने प्रस्तावित समझौते के मुख्य पहलुओं की समीक्षा की। इनमें बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन की मजबूती, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है।

अमित शुक्‍ला

लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लाअमित शुक्‍ला नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। उनका पत्रकारिता में 20 साल से ज्‍यादा का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, फॉरेन ट्रेड, शेयर मार्केट, रियल एस्‍टेट, राजनीति, देश-विदेश, फीचर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। उनके पास पत्रकारिता और जनसंचार में डॉक्‍टरेट (PhD) की डिग्री है। टाइम्‍स इंटरनेट लिमिटेड (TIL) में उनका सफर जनवरी 2018 में शुरू हुआ। TIL में रहते हुए नवभारत टाइम्‍स (डिजिटल) से पहले उन्‍होंने इकनॉमिक टाइम्‍स (डिजिटल) में सेवाएं दीं।

पत्रकारिता का अनुभव
अमित शुक्‍ला के पास डिजिटल के साथ प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का लंबा अनुभव है। TIL से जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण (नोएडा) में सेंट्रल डेस्‍क पर उन्‍होंने करीब एक दशक बिताया। यहीं से उनके करियर की शुरुआत भी हुई। पहले वह फ्रीलांसर के तौर पर जागरण समूह की फीचर टीम से जुड़े थे। फिर सेंट्रल डेस्‍क का अहम हिस्‍सा बने।

जाने-माने संस्‍थानों में अध्‍यापन
अमित शुक्‍ला ने जाने-माने मीडिया संस्‍थानों के अलावा देश के नामचीन शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं।

लिंग्‍व‍िस्‍ट के तौर पर खास पहचान
अमित शुक्‍ला ने लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, ऑस्ट्रियन इकोनॉमिक सेंटर, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया।

अवार्ड/अचीवमेंट
ET एक्‍सीलेंस अर्वाड्स 2019
र‍िसर्च फेलो (मीडिया) – ग्रैफनाइल रिसर्च
कीनोट स्‍पीकर – चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (उन्‍नाव कैंपस)… और पढ़ें



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