सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित कानून बातचीत में कोई अड़चन नहीं बना है। दोनों देश व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सूत्र ने कहा, ‘हमारी बातचीत में यह कोई अड़चन नहीं रहा है। फरवरी में समझौते के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की गई थी। उसके तुरंत बाद रूसी तेल से जुड़े अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिए गए थे।’
रूसी तेल खरीद विवाद का मुद्दा नहीं
सूत्रों ने आगे कहा कि बातचीत के बाद के दौर में रूसी तेल की खरीद दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुद्दा नहीं बनी। इसमें पिछले महीने हुई बातचीत भी शामिल है।
भारत और रूस के व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से बताया गया है कि यह बहुत जल्दी अंतिम रूप लेने वाली है। काफी लंबे समय से इस पर बातचीत जारी है।
सूत्रों ने कहा, ‘डील को मानने के मामले में हमें अमेरिका से पूरा भरोसा मिला है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका इस समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमत हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका दोनों ही ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देश बातचीत को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।
भारत रूसी तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक
ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब चिंताएं जताई जा रही हैं कि रूसी कच्चे तेल के खरीदारों को निशाना बनाने वाले अमेरिकी कदमों का असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है। भारत रूसी तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है।
14 जुलाई को अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला एक संशोधित बिल पेश किया। इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और चीन समेत रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदारों से होने वाले आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की अनुमति मिल जाएगी।
इस कदम का मकसद उन देशों को निशाना बनाकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाना है, जिनकी ऊर्जा खरीद से रूस के युद्ध प्रयासों के लिए राजस्व मिलता रहता है।
इसका नया वर्जन पहले के प्रस्ताव की तुलना में काफी नरम है। पहले के प्रस्ताव में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी।
ट्रेड डील के लिए फ्रेमवर्क समझौता हस्ताक्षर के लिए तैयार
हाल ही में, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के लिए फ्रेमवर्क समझौता हस्ताक्षर के लिए तैयार है। इस पर पहली बार फरवरी में सहमति बनी थी। बस दोनों पक्षों को सही समय और ढांचे पर फैसला करना है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ रही है।
इससे पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पहले ही अंतिम रूप ले चुका है। लेकिन, यह तब तक लागू नहीं होगा जब तक नई दिल्ली वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, चीन, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में टैरिफ के मामले में साफ लाभ हासिल नहीं कर लेती।
उनकी ये टिप्पणियां 22-24 जून के दौरान नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जेमिसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों के ठीक बाद आई हैं। इन बैठकों में दोनों पक्षों ने प्रस्तावित समझौते के मुख्य पहलुओं की समीक्षा की। इनमें बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन की मजबूती, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है।
