कैंसर पीड़ित मां की सेवा के लिए इंग्लैंड से लौटी बेटी, बहन के साथ मिलकर डेढ़ साल में खड़ा किया ग्लोबल स्टार्टअप


जितेंद्र उपाध्याय, लखनऊ। कहते हैं कि यदि आपके भीतर कुछ कर गुजरने का अटूट जज्बा हो, तो घोर परेशानियां और गहरे से गहरा दर्द भी आपके कदम नहीं रोक सकता। विपरीत परिस्थितियों में सफलता का ऐसा ही एक अनुपम सपना सच कर दिखाया है लखनऊ के राजेंद्र नगर की दो बहनों 27 वर्षीय मृणालिनी मित्रा और 26 वर्षीय न्योनिका मित्रा ने।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआइ) के इस आधुनिक दौर में, जब हर तरफ डिजिटल तकनीक का बोलबाला है, इन दोनों बहनों ने पूरी तरह हाथों से निर्मित एक ऐसा कार्ड गेम तैयार किया है, जो आज एक सफल वैश्विक स्टार्टअप का रूप ले चुका है। पारंपरिक व रचनात्मक कला से सराबोर इस खेल को युवा पीढ़ी इस कदर पसंद कर रही है कि आज दुनिया में कई देशों तक यह अपनी पहुंच बना चुका है।

 

one more page (2)

दोनों बहनों द्वारा तैयार किया गया पहला कार्ड गेम ‘वन मोर पेज’ सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बिना किसी बड़े निवेशक के सहयोग या विज्ञापन एजेंसी पर भारी-भरकम खर्च के, यह अनूठा खेल अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, आस्ट्रेलिया और कनाडा समेत दुनिया के 40 से अधिक देशों के 1300 से ज्यादा प्रबुद्ध ग्राहकों तक पहुंच चुका है।

 डेढ़ साल पहले हुई थी शुरुआत

न्योनिका मित्रा बताती हैं कि इस वैश्विक पहल की शुरुआत लगभग डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। उनकी बहन मृणालिनी मित्रा ने प्रतिष्ठित आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, विदेश में शानदार करियर और इंटर्नशिप के बेहतरीन अवसरों को सहर्ष छोड़ दिया। उनका यह निर्णय मां मौली मित्रा के लिए था, जो इस समय कैंसर के थर्ड स्टेज से जूझ रही हैं। मां की सेवा और उनके साथ समय बिताने के लिए मृणालिनी ने वापस लखनऊ लौटने का फैसला किया। इस स्टार्टअप की नींव घर के ही एक छोटे से स्टूडियो में पड़ी।

None more page (1)

मां के इलाज के तनावपूर्ण माहौल में परिवार को संबल देने और मां का मन बहलाने के लिए सभी सदस्य प्रत्येक रविवार को एक साथ बैठकर पारंपरिक खेल खेला करते थे। इसी पारिवारिक अनुभव और अपनत्व की कोख से वर्ल्ड आफ मिथरासा और इसके पहले व्यावसायिक खेल वन मोर पेज का विचार प्रस्फुटित हुआ।

खेल में भारतीय कला और समृद्ध संस्कृति को पिरोया

न्योनिका कहती हैं कि मां के इलाज के दौरान दोनों बहनों को यह गहराई से अहसास हुआ कि कल्पनाशीलता केवल मनोरंजन या कला की विधा नहीं है, बल्कि यह संकट के समय में मानसिक संबल प्रदान करने वाली एक संजीवनी भी है। इस विचार को धरातल पर उतारते हुए उन्होंने खेल में भारतीय कला और समृद्ध संस्कृति को पिरोया है।

गेम की संपूर्ण कहानी, रचनात्मक डिजाइनिंग और कलाकृतियां खुद मृणालिनी ने तैयार की हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर लाजिस्टिक्स और वित्तीय प्रबंधन का मोर्चा मैंने संभाला। इस विचार के मूल में मृणालिनी की एक रहस्यमयी और विलुप्त सभ्यता की परिकल्पना है, जहां लोग विशेष श्वास तकनीकों के माध्यम से सजीव और निर्जीव वस्तुओं से संवाद स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।

one more page

इसी अनूठी कल्पना से अमाया और बो जैसे जीवंत किरदारों का उदय हुआ, जो वर्ल्ड आफ मिथरासा की मुख्य धुरी हैं। मृणालिनी की रचनात्मक सोच और मेरे वित्तीय प्रबंधन व अंतरराष्ट्रीय संचालन कौशल के तालमेल ने मिलकर इस कला को एक सफल वैश्विक व्यवसाय का रूप दिया है।

इस तरह स्थापित की कंपनी

वर्तमान में अमेरिका में रह रहीं न्योनिका कहती हैं कि मेरी कंपनी पूर्ण रूप से हम दोनों बहनों के स्वामित्व में संचालित है। वैश्विक बोर्ड गेम बाजार में किसी गाडफादर के बिना उतरना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। दोनों बहनों ने पारंपरिक कारपोरेट मार्ग चुनने के बजाय सीधे ग्राहकों तक अपनी पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई।

इंटरनेट मीडिया के माध्यम से आशा से विपरीत जनसमर्थन प्राप्त हुआ। इसके फलस्वरूप वैश्विक मंच से करीब एक लाख अमेरिकी डालर (लगभग 83 लाख रुपये) की विशाल क्राउड फंडिंग जुटाने में कामयाबी मिली। वह बताती हैं कि मेरे पिता एके मित्रा आयकर विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।

पशु संरक्षण केंद्रों को देती हैं दान

न्योनिका कहती हैं कि एआइ के बढ़ते दौर में भी खेल के सभी चित्र शत-प्रतिशत हाथों से स्केच किए गए हैं। गेम का मुख्य चरित्र ‘बो’ दरअसल उनके द्वारा बचाए गए एक श्वान से प्रेरित है। सामाजिक सरोकार निभाते हुए मेरी कंपनी अपने कुल मुनाफे का दो प्रतिशत हिस्सा देश के पशु संरक्षण केंद्रों को दान करती है।

अब हम दोनों बहनों का दूरगामी लक्ष्य सिर्फ कार्ड गेम तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि हम भारतीय और दक्षिण एशियाई संस्कृति पर आधारित एक ऐसा वैश्विक स्टोरी यूनिवर्स बनाना चाहती हैं, जो भविष्य में ‘डिज्नी’ और ‘स्टूडियो घिबली’ जैसे अंतरराष्ट्रीय महाब्रांडों की तरह भारत का नाम रोशन करे।

रोचकता से भरा है खेल 

यह खेल युवाओं में रचनात्मक सोच को बढ़ावा देता है, भाषा व संचार कौशल को निखारता है और व्यस्त दिनचर्या के बीच परिवार व मित्रों के साथ आनंददायक समय बिताने का एक उत्कृष्ट माध्यम प्रदान करता है।

ऐसे खेलते हैं

  1. प्रत्येक खिलाड़ी को खेल की शुरुआत में निर्धारित संख्या में कार्ड वितरित किए जाते हैं।
  2. पहला खिलाड़ी एक कार्ड का चयन कर उसके आधार पर एक मौलिक कहानी की शुरुआत करता है।
  3. अगला खिलाड़ी अपने पास मौजूद कार्ड के प्रतीकों का उपयोग कर उसी कहानी को रचनात्मक रूप से आगे बढ़ाता है।
  4. यह खेल तब तक निरंतर चलता है जब तक सभी कार्ड समाप्त न हो जाएं या कहानी अपने तार्किक निष्कर्ष तक न पहुंच जाए।
  5. खिलाड़ियों को उनकी कल्पनाशीलता के आधार पर अंक दिए जाते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे रोचक और सृजनात्मक कहानी गढ़ना होता है।
  6. इस गेम में अधिकतम छह खिलाड़ी खेल सकते हैं। हर खिलाड़ी का लक्ष्य अपनी किताब के अलग-अलग अध्यायों (चैप्टर) के पन्ने इकट्ठा करके उन्हें सुरक्षित रूप से बाइंड करना होता है। अपनी बारी में खिलाड़ी डेक से एक-एक कार्ड उठाता है। हर नया कार्ड मिलने पर उसे फैसला करना होता है कि एक और कार्ड उठाए या वहीं रुककर अपने कार्ड सुरक्षित कर ले।
  7. अगर खिलाड़ी लालच में आकर ऐसा कार्ड उठा ले, जिसका चैप्टर पहले से उसके ड्राफ्ट में मौजूद हो, तो विशाल गाय बो जाग जाती है। तब उस खिलाड़ी के ड्राफ्ट के सभी बिना बाइंड किए कार्ड दूसरे खिलाड़ियों में बंट जाते हैं और उसकी मेहनत बेकार हो सकती है।
  8.  यदि खिलाड़ी समय रहते रुककर कार्ड बाइंड कर देता है, तो वे हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। जो खिलाड़ी सबसे पहले नौ अलग-अलग चैप्टर बाइंड कर लेता है, वह राउंड जीतता है। बीच-बीच में आने वाले एक्शन कार्ड गेम में मजेदार ट्विस्ट और चुनौती जोड़ते हैं।

35 डॉलर में उपलब्ध है गेम

अभी यह गेम केवल विदेश में ही उपलब्ध है, जिसको 35 डालर में खरीदा जा सकता है। भारत में अभी कंपनियों की ओर से आफर आए हैं, लेकिन अभी शुल्क तय नहीं हो पाया है, इसलिए अभी यहां नहीं खेला जा सकता।



Leave a Comment