इंग्लैंड सीरीज के बीच रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर कड़ा रुख अपनाने वाले सिलेक्टर्स ने साल 2012 की यादें ताजा कर दी हैं, जब उस वक्त के कप्तान एमएस धोनी की भविष्य की योजनाओं के चलते सचिन तेंदुलकर को वनडे से संन्यास लेना पड़ा था।

जब एमएस धोनी नहीं चाहते थे वनडे टीम में सचिन की मौजूदगी
यह भारतीय क्रिकेट का वो इतिहास है जिसे चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। साल 2011 में भारत को अपनी कप्तानी में विश्व विजेता बनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी भविष्य की टीम की नींव रखना चाहते थे। उस वक्त ऑस्ट्रेलिया में खेली गई सीबी सीरीज के दौरान रोटेशन पॉलिसी और फील्डिंग का हवाला देकर सीनियर खिलाड़ियों को लेकर कड़े फैसले लिए जा रहे थे। धोनी का मानना था कि आगामी विश्व कप को देखते हुए अब युवाओं को ज्यादा मौके मिलने चाहिए और वे सचिन तेंदुलकर को वनडे स्क्वाड का हिस्सा बनाए रखने के पक्ष में नहीं थे।
नतीजतन, सचिन तेंदुलकर ने 18 मार्च 2012 को एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी वनडे मैच खेला। इसके बाद महीनों तक चली कशमकश के बाद आखिरकार 23 दिसंबर 2012 को सचिन ने वनडे क्रिकेट से संन्यास का आधिकारिक ऐलान कर दिया। सचिन के जाते ही साल 2013 में एमएस धोनी के अंडर में एक बिल्कुल नई और युवा टीम इंडिया तैयार हुई, जिसने इंग्लैंड की धरती पर चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया था। धोनी ने अपने उस फैसले को पूरी तरह से सही साबित करके दिखाया, लेकिन सवाल यहां यह है कि क्या शुभमन गिल ऐसा कर पाएंगे या नहीं?
शुभमन गिल का बयान और सिलेक्टर्स की लीक कहानी
आज रोहित शर्मा के मामले में भी इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है। सीरीज की शुरुआत में कप्तान शुभमन गिल ने मीडिया के सामने आकर कहा था कि रोहित और विराट पिछले एक दशक से भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ रहे हैं और वे टीम का अभिन्न हिस्सा हैं। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि चयन समिति और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने रोहित शर्मा को साफ बता दिया है कि वे 2027 वनडे विश्व कप के लिए अब आगे की सोच रहे हैं और यशस्वी जायसवाल जैसे युवाओं को मौका देना चाहते हैं। बोर्ड के एक सूत्र ने बताया कि सिलेक्टर्स ने रोहित को साफ कर दिया है कि इंग्लैंड दौरे के बाद वे उनकी तरफ नहीं देख रहे हैं, और अब गेंद रोहित के पाले में है कि वे सम्मानजनक विदाई का रास्ता चुनते हैं या नहीं।
मानसिक तनाव का मैदान पर असर, लय से भटके हिटमैन
इस पूरे विवाद और बयानों के विरोधाभास का असर रोहित शर्मा की बल्लेबाजी पर साफ देखा जा सकता है। अपनी स्पष्ट सोच के लिए जाने जाने वाले रोहित इंग्लैंड के खिलाफ दोनों वनडे मैचों में बेहद असहज और तनाव में दिखे। कार्डिफ में खेले गए दूसरे वनडे में रोहित ने 47 गेंदों में संघर्ष करते हुए महज 26 रन बनाए। शॉर्ट बॉल, जिसे रोहित आंख बंद करके बाउंड्री के पार भेज दिया करते थे, उसी गेंद पर वे रन बनाने के लिए तरसते नजर आए। पूर्व क्रिकेटर दीप दासगुप्ता ने भी कमेंट्री के दौरान कहा कि रोहित के दिमाग में स्पष्टता की कमी दिख रही है और वे दबाव में नजर आ रहे हैं।
क्या बिना लड़े हार मान लेंगे रोहित?
रोहित शर्मा आसानी से घुटने टेकने वाले खिलाड़ियों में से नहीं हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो रोहित ने बीसीसीआई के टॉप लेवल अधिकारियों के सामने इस फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। पिछले साल शुभमन गिल को वनडे कप्तानी सौंपे जाने के बाद रोहित का मानना है कि बतौर बल्लेबाज उनमें अभी बहुत क्रिकेट बाकी है। दूसरे वनडे के दौरान डगआउट की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें रोहित शर्मा अपने पुराने साथी विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह के साथ बेहद गंभीर दिखे। चेहरे पर न कोई मुस्कान थी और न ही कोई हंसी-मजाक। यह इस बात का साफ संकेत था कि भारतीय क्रिकेट का हिटमैन अपनी मर्जी से किताब बंद नहीं करना चाहता, लेकिन सिलेक्टर्स शायद उनका आखिरी चैप्टर पहले ही लिख चुके हैं।
