संसद के मॉनसून सत्र के एजेंडे में डिलिमिटेशन बिल भले शामिल नहीं है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे पेश करने की तैयारी में है और एनडीए जरूरी समर्थन जुटाने में लगा है। वहीं, संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत को देखते हुए विपक्ष भी पूरी तरह सतर्क है।

अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया था लेकिन उसे जरूरी दो तिहाई समर्थन नहीं मिल पाया। इसके बाद सरकार ने उससे जुड़े डिलिमिटेशन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया। अब मॉनसून सत्र में बदले राजनीतिक हालात के बीच सरकार नए सिरे से कोशिश कर सकती है।
- सरकार इस बिल को लेकर कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब एक महीने पहले एक सीनियर नेता ने ये कहा था कि अगर हमारे पास आज नंबर हो जाते हैं तो हम अगले हफ्ते ही स्पेशल सत्र बुलाकर बिल पास करवा लेंगे।
- वैसे संसद में नंबर गेम कुछ बदला है। पिछले कुछ महीनों में विपक्षी दलों में लगातार टूट हुई। तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद एनडीए के साथ आ गए। इससे लोकसभा में सरकार का संख्या बल पहले से ज्यादा मजबूत हो गया। बीजेपी इंडिया गठबंधन के दलों से भी संपर्क बढ़ा रही है।
बदले समीकरणों पर बीजेपी की नजर
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक हालिया विधानसभा चुनावों के बाद जो राजनीतिक समीकरण बदले हैं उससे बीजेपी के लिए कई और दलों से भी बातचीत का रास्ता खुला है। एनसीपी (एसपी) के साथ ही डीएमके पर भी बीजेपी की नजर है। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। डीएमके और कांग्रेस के बीच की दूरी के बीच बीजेपी को अपने लिए कुछ मौका दिख सकता है। बीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पक्ष में वोट करने के अलावा वोटिंग से बाहर रहना भी समर्थन का एक तरीका हो सकता है।
