विवादों के त्वरित निपटारे के लिए पहल:राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण का होगा गठन, खेल मंत्रालय ने मांगे आवेदन – Sports Ministry Invites Applications For Formation Of National Sports Tribunal Know Details


केंद्र सरकार ने देश में खेल विवादों के त्वरित निपटारे के लिए राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल-एनएसटी) के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खेल मंत्रालय ने बुधवार को न्यायाधिकरण के सदस्यों के चयन के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 18 जून तक आवेदन कर सकते हैं। खेल मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थापित किया जाएगा। न्यायाधिकरण में नियुक्ति के लिए ऐसे व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें खेल, लोक प्रशासन और कानून के क्षेत्र में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो तथा जो सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित हों।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगा चयन

न्यायाधिकरण के सदस्यों के चयन के लिए एक सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी गठित की जाएगी। इस समिति की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या उनके द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।समिति में खेल सचिव और विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव भी सदस्य होंगे। यह समिति आवेदनों की जांच करेगी और उम्मीदवारों की योग्यता, अनुभव तथा उपयुक्तता के आधार पर उनका मूल्यांकन करेगी। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को व्यक्तिगत बातचीत (इंटरैक्शन) के लिए बुलाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में ही दी जा सकेगी चुनौती

खेल मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के आदेशों को केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकेगी। इसका उद्देश्य खेल प्रशासन और खेल संघों से जुड़े विवादों का स्वतंत्र, त्वरित, प्रभावी और कम खर्चीला समाधान सुनिश्चित करना है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगी सुनवाई

राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के नियमों में तकनीकी और कानूनी उपायों को शामिल किया गया है। इसके तहत एक समर्पित डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से मामलों की सुनवाई और अन्य प्रक्रियाएं संचालित की जा सकेंगी।

350 से अधिक मामले विभिन्न अदालतों में लंबित

खेल मंत्रालय के मुताबिक वर्तमान में देश की विभिन्न अदालतों में खेलों से जुड़े 350 से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें खिलाड़ियों के चयन, खेल संघों के चुनाव और प्रशासनिक विवाद जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन मामलों के कारण खिलाड़ियों और राष्ट्रीय खेल महासंघों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। मंत्रालय का मानना है कि राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के गठन से इन विवादों का शीघ्र समाधान संभव होगा, क्योंकि इसे सिविल कोर्ट के समान सभी अधिकार प्राप्त होंगे।

सेवारत न्यायाधीशों के लिए विशेष प्रावधान

अधिसूचना के अनुसार यदि न्यायाधिकरण का अध्यक्ष या सदस्य सर्वोच्च न्यायालय अथवा किसी उच्च न्यायालय का सेवारत न्यायाधीश होता है, तो उसे पदभार ग्रहण करने से पहले अपने मूल पद से इस्तीफा देना होगा या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेनी होगी।


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