AI Impact on Government Jobs in India: एआई के दौर में सरकारी बाबू कैसे काम करेंगे? क्या उनकी नौकरी खत्म हो जाएगी?


नई दिल्ली (Government Jobs Upskilling in AI Era). किसी सरकारी ऑफिस की कल्पना करिए.. दिमाग में धूल खाती पीली फाइल्स, उनके ऊपर बंधा लाल धागा और मेजों पर फाइलों के अंबार के पीछे बैठे बाबू (LDC/UDC) जरूर याद आएंगे. लेकिन पिछले कुछ सालों में यह नजारा बहुत तेजी से बदला है. ई-ऑफिस (e-Office) के आने से फाइलें अब अलमारियों से निकलकर कंप्यूटर स्क्रीन पर आ चुकी हैं. इस डिजिटल क्रांति में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई.

एआई के आने के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकारी दफ्तरों में क्लर्क, एलडीसी, यूडीसी और डेटा एंट्री ऑपरेटर्स की जरूरतें खत्म होने वाली हैं? क्या कंप्यूटर का एक क्लिक और एआई टूल्स मिलकर सरकारी नौकरी के इस इंसानी काम को रिप्लेस कर देंगे? लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. सरकार ने इस नौकरी को बाहर करने के बजाय उन्हें समय के साथ बदलने और अपस्किल करने की बेहद ठोस और बड़ी योजना तैयार कर ली है.

क्लर्क और डेटा एंट्री ऑपरेटर की जरूरत कैसे खत्म हो रही है?

पुराने समय में सरकारी दफ्तरों का आधा समय फाइल्स ढूंढने, डेटा एंट्री करने, ड्राफ्ट तैयार करने और डाक को एक विभाग से दूसरे विभाग भेजने में निकल जाता था. लेकिन ई-ऑफिस ने इस प्रक्रिया को पेपरलेस और बेहद तेज कर दिया है. अब एआई टूल्स की मदद से बड़े-बड़े डॉक्यूमेंट्स का एनालिसिस, डेटा एक्सट्रैक्शन और यहां तक कि सरकारी पत्रों के शुरुआती ड्राफ्ट सेकंड्स में तैयार हो रहे हैं. ऐसे में सिर्फ ‘डेटा टाइप करने’ या ‘फाइल आगे बढ़ाने’ वाले क्लर्क की भूमिका बहुत सीमित होती जा रही है.

नौकरी जाएगी नहीं, बस फॉर्मेट बदल जाएगा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई से सरकारी बाबू बेरोजगार नहीं होंगे, बस उनके काम का तरीका बदल जाएगा. अब क्लर्क को सिर्फ टाइपिंग करने के बजाय एआई टूल्स को सही निर्देश देने (Prompt Engineering) और एआई की तरफ से जनरेट किए गए डेटा को वेरिफाई करने का काम करना होगा. यानी, अब शारीरिक मेहनत की जगह दिमागी और टेक्निकल स्किल्स की मांग ज्यादा होगी.

सरकार का मेगा प्लान: क्या है ‘मिशन कर्मयोगी’?

सरकार इस बड़े बदलाव से अच्छी तरह वाकिफ है. सरकारी कर्मचारियों को इस नई टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बिठाने के लिए सरकार ‘मिशन कर्मयोगी’ (National Programme for Civil Services Capacity Building) चला रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी बाबुओं को ‘रूल-बेस्ड’ (सिर्फ नियम का पालन करने वाले) से हटाकर ‘रोल-बेस्ड’ (अपनी भूमिका के अनुसार काम करने वाले) बनाना है.

iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म और एआई ट्रेनिंग

इस मिशन के तहत iGOT कर्मयोगी नाम का डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है. वर्तमान में इस पर 1.4 करोड़ से ज्यादा सरकारी कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं. सरकार ने इस प्लेटफॉर्म पर एआई, डेटा-बेस्ड डिसीजन मेकिंग और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े कई स्पेशल कोर्सेज शामिल किए हैं. हाल ही में सरकार ने ‘एआई कॉम्पिटेंसी फ्रेमवर्क’ (AI Competency Framework) भी लॉन्च किया है, जिससे निचले स्तर से लेकर सीनियर स्तर के कर्मचारियों को एआई टूल्स का प्रैक्टिकल इस्तेमाल सिखाया जा सके.

‘एआई चैंपियंस प्रोग्राम’ की शुरुआत

सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए ‘एआई चैंपियंस प्रोग्राम’ भी शुरू किया है. इसके तहत मंत्रालयों और सरकारी विभागों के कर्मचारियों को प्रैक्टिकल वर्कशॉप्स के जरिए AI-enabled प्रोडक्टिविटी, डेटा एक्सट्रैक्शन और एआई बेस्ड ड्राफ्टिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसका मतलब है कि सरकार अपने एंप्लॉइज को हटाने के बजाय उन्हें ‘फ्यूचर-रेडी’ यानी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है.

आने वाला समय सरकारी ऑफिस में फाइलों के लाल फीते का नहीं, बल्कि एआई की स्मार्ट स्क्रीन का है. जो बाबू समय रहते खुद को अपडेट कर लेंगे, वे इस डिजिटल बदलाव के असली हीरो बनेंगे.



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