ब्रिटेन की लेबर पार्टी ने बिना चुनाव के एंडी बर्नहम को नया नेता चुन लिया है। वह सोमवार को ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहम के प्रधानमंत्री बनने की अटकलें पहले से लगाई जा रही थी। एंडी बर्नहम पहले भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

बिना वोटिंग नेता चुने गए एंडी बर्नहम
लंदन के मध्य इलाके में ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस के मुख्यालय में बोलते हुए ब्रिटेन की होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने बताया कि बर्नहम को लेबर पार्टी के 379 सांसदों का समर्थन मिला है। वे तय संख्या तक पहुंचने वाले एकमात्र उम्मीदवार थे, इसलिए पार्टी के सदस्यों के बीच वोटिंग कराए बिना ही उन्हें नेता घोषित कर दिया गया। बर्नहम ने मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर दोबारा संसद में वापसी की थी। इस चुनाव का नतीजा 19 जून को घोषित हुआ था।
कीर स्टार्मर की जगह लेंगे एंडी बर्नहम
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्टार्मर ने 22 जून को लेबर नेता पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि नए नेता के चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। अपने भाषण में बर्नहम ने करीब एक दशक पहले कीर स्टार्मर के साथ किए गए काम को याद किया। उन्होंने बताया कि दूसरे हिलसबोरो जांच के बाद हिलसबोरो कानून का शुरुआती मसौदा तैयार करने में दोनों ने साथ काम किया था, जिसमें स्टार्मर की कानूनी विशेषज्ञता का फायदा मिला था।
बर्नहम के पीएम बनने से होंगे कई बड़े बदलाव
बर्नहम ने कहा कि 1980 के दशक के बाद से ब्रिटेन ने कई गलत फैसले लिए हैं। उनके अनुसार, राजनीतिक ताकत ज्यादा केंद्रित होती गई, जबकि घर, पानी, ऊर्जा और परिवहन जैसी जरूरी सेवाओं का निजीकरण कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों से खर्च बढ़ा, दौलत और ताकत कुछ ही लोगों के हाथों में ज्यादा सिमट गई और कई पुराने औद्योगिक शहरों के पास अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए जरूरी अधिकार नहीं बचे।
बर्नहम का ब्रिटेन की एकजुटता पर जोर
उन्होंने कहा, “मैं उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम पूरे ब्रिटेन का नेता बनूंगा।” जुलाई 2024 में लेबर पार्टी को 14 वर्षों में पहली बार भारी चुनावी जीत दिलाने के बाद, स्टार्मर को अपनी सरकार की ओर से अपनाई गई नीतियों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत के बाद एंडी बर्नहैम को लेबर पार्टी का नेता बनाने के समर्थन में सांसदों की संख्या बढ़ गई थी।
