<p>इस संसार में सब अपना-अपना बकरा काटने में लगे हुए हैं !..बहुत दार्शनिक नज़रिये से देखें तो स्वार्थी दुनिया में हर इंसान..हर दूसरे इंसान के लिये सिर्फ़ एक बकरा है। .इसीलिये सबसे ट्रेंडिंग कहावतें भी बकरों पर ही हैं। लेकिन अभी हम रीयल बकरे पर फोकस करेंगे। ..वही बकरा जो चार पैरों का होता है..जो बकरीद से पहले खिला-पिलाकर मोटा किया जाता है..और फिर एक झटके में कुर्बान कर दिया जाता है। ..बकरीद से दो दिन पहले ये बकरा नहीं रह गया..बल्कि बवाल बन गया है। मुंबई से लखनऊ और हैदराबाद तक बकरे पर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है कि बकरे की कुर्बानी होनी चाहिये या नहीं होनी चाहिये। ..अगर हो तो कहां हो और कैसे हो? .. इस संसार में सब अपना-अपना बकरा काटने में लगे हुए हैं !..बहुत दार्शनिक नज़रिये से देखें तो स्वार्थी दुनिया में हर इंसान..हर दूसरे इंसान के लिये सिर्फ़ एक बकरा है। .इसीलिये सबसे ट्रेंडिंग कहावतें भी बकरों पर ही हैं। लेकिन अभी हम रीयल बकरे पर फोकस करेंगे। ..वही बकरा जो चार पैरों का होता है..जो बकरीद से पहले खिला-पिलाकर मोटा किया जाता है..और फिर एक झटके में कुर्बान कर दिया जाता है। ..बकरीद से दो दिन पहले ये बकरा नहीं रह गया..बल्कि बवाल बन गया है। मुंबई से लखनऊ और हैदराबाद तक बकरे पर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है कि बकरे की कुर्बानी होनी चाहिये या नहीं होनी चाहिये। ..अगर हो तो कहां हो और कैसे हो? .. </p>