गलत शपथ पत्र के आधार पर तथ्य छिपाकर और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नौकरी हासिल करने का एक मामला सामने आया है। तलवाड़ा ब्लॉक में कार्यरत एक महिला स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले के सामने आने के बाद विभाग में भी हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार पाडिकला उपस्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एएनएम रश्मि पत्नी नीलम गरासिया की नियुक्ति दिसंबर 2015 में हुई थी। करीब सात माह पूर्व विभाग को एक शिकायत प्राप्त हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति के समय उन्होंने अपने बच्चों की वास्तविक संख्या छिपाकर सरकारी सेवा प्राप्त की। शिकायत में यह भी कहा गया था कि नौकरी के लिए पात्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्होंने दस्तावेजों में भ्रामक जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की आंतरिक जांच कराई। जांच के दौरान नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज, शपथ पत्र, पारिवारिक अभिलेख और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया और शिकायत को सही पाया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि संबंधित एएनएम के चार बच्चे हैं। जबकि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान उन्होंने दो बेटियों को गोद दिया जाना दर्शाकर स्वयं को नियमानुसार पात्र बताया था। विभागीय जांच में यह दावा नियमों के विपरीत और तथ्यों को छिपाने का प्रयास माना गया।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र में वास्तविक पारिवारिक स्थिति का उल्लेख नहीं किया गया। विभाग का कहना है कि सरकारी सेवा में नियुक्ति के दौरान अभ्यर्थी द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सत्य होना आवश्यक है। यदि कोई अभ्यर्थी जानबूझकर तथ्य छिपाता है या गलत जानकारी देकर नियुक्ति प्राप्त करता है, तो यह सेवा नियमों के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
जांच पूरी होने के बाद सीएमएचओ डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने बीसीएमओ, तलवाड़ा को संबंधित एएनएम के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निर्देशों की पालना करते हुए बीसीएमओ ने कोतवाली थाने में गलत शपथ पत्र प्रस्तुत कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज, शपथ पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, गोद लेने से संबंधित अभिलेख तथा विभागीय जांच रिपोर्ट की जांच करेगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।