BCCI की गलती से हारी टीम इंडिया, नहीं किया सुधार तो होगी जगहंसाई


स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के हाथों टी20 सीरीज में मिली हार से हर कोई हैरान है। इससे पहले आयरलैंड ने भी भारत को दो मैचों की टी20 सीरीज में हराया था। इस हार से हैरानी इस बात को लेकर है कि जो टीम अभी मार्च में टी20 की विश्व चैंपियन बनी है उसकी ये हालत कैसे हो सकती है कि एक भी जीत उसके हिस्से नहीं आई? इसके पीछे जितने जिम्मेदार टीम के खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ हैं उतना ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) है।

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है? देखा जाए तो ऐसा हुआ है। यहां बात सिर्फ खेलने की नहीं है बल्कि तैयारी की भी है जिसमें बीसीसीआई अहम रोल निभाता है। बीसीसीआई भारत में क्रिकेट को चलाने वाली संस्था है और उसने कुछ ऐसे फैसले किए हैं जिनका नुकसान टीम को बार-बार उठाना पड़ता है। ताजा मामला टी20 सीरीज में मिली हार का है।

ये है हार की वजह

इंग्लैंड में भारतीय बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे, लेकिन कुछ दिन पहले यही बल्लेबाज टी20 में ताबड़तोड़ रन बना रहे थे। चाहे वैभव सूर्यवंशी हों या संजू सैमसन या ईशान किशन। आईपीएल-2026 में सभी का बल्ला चल रहा था। उससे पहले खेले गए टी20 वर्ल्ड कप में भी इन सभी बल्लेबाजों ने कहर ढाया। वर्ल्ड कप से पहले खेली गई न्यूजीलैंड सीरीज में भी भारतीय बल्लेबाजों ने कोहराम मचा रखा था। फिर ऐसा क्या हुआ कि 20-25 गेंदों पर अर्धशतक ठोकने वाले बल्लेबाजों से आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ रन नहीं निकले? इसका कारण है पिचें और छोटी बाउंड्रीज।

भारत में जब सीरीज होती है तो पिचें फ्लैट होती हैं। गेंदबाजों को मदद नहीं मिलती और इसलिए ये बल्लेबाज ऐसे रन बरसाते हैं कि गेंदबाज कांप जाते हैं। आईपीएल ने इसकी शुरुआत की अब भारत में खेली जा रही इंटरनेशनल सीरीज में भी यही हो रहा है। बीसीसीआई ने दर्शकों को रिझाने के लिए आईपीएल में पाटा पिचें और छोटे मैदान तैयार किए जहां इन बल्लेबाजों ने रनों की बारिश कर दी, लेकिन जैसे ही इंग्लैंड की घास वाली पिचें और बड़ी बाउंड्रीज सामने आईं तो छक्के-चौके लगाने मुश्किल हो गए।

सामने है हाल

अगर आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों के आंकड़े देखे जाएं तो सभी से स्ट्राइक रेट में वर्ल्ड कप और आईपीएल की तुलना में गिरावट देखने को मिलेगी। वैभव ने आईपीएल में पाटा पिचों पर तो हर गेंदबाज को तोड़ा, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में इंग्लैंड की पिचों पर उनको मुसीबत हुई और जोफ्रा आर्चर ने उनकी पोल खोल दी।

भारत की टी20 टीम में अधिकतर वही खिलाड़ी आते हैं जो आईपीएल में कमाल करते हैं, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट के हालात आईपीएल से काफी अलग होते हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में हर जगह पाटा पिचें और छोटे मैदान नहीं मिलते। बीसीसीआई ने आईपीएल की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ये काम किया ताकि रनों की बारिश हो और दर्शक खिंचे चले आएं, लेकिन नुकसान भारत को इंटरनेशनल क्रिकेट में देखने को मिल रहा है।

टेस्ट टीम भी है उदाहरण

बात सिर्फ टी20 की ही नहीं है बल्कि हाल के समय में भारत की टेस्ट टीम का भी यही हाल है। साउथ अफ्रीका ने उसे घर में घुसकर हराया तो वहीं न्यूजीलैंड ने भी टेस्ट सीरीज में भारत को पटखनी दी। यहां भी आईपीएल फैक्टर नजर आता है क्योंकि खिलाड़ियों को आईपीएल से मिलने वाले पैसे, ग्लैमर की चकाचौंध ने अंधा कर दिया है। सभी आईपीएल को तरजीह दे रहे हैं और इसी कारण टेस्ट क्रिकेट पर से फोकस कम हो रहा है। यही कारण है कि इस समय भारत के पास टेस्ट स्पेशलिस्ट कम ही बचे हैं और वहां भी आईपीएल के आधार पर चयन हो रहा है जिससे टीम का और नुकसान हो रहा है।



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