Chabahar Port: अमेरिकी हमलों की भेंट चढ़ गया भारत का चाबहार पोर्ट? ट्रंप के रक्षा मंत्री ने शेयर की तबाह टावर की तस्वीर – chabahar port us defence secy pete hegseth shares photo tower collapsing amid strikes in iran
Chabahar Port: अमेरिका ने कल ईरान के चाबहार पोर्ट पर हमला किया था जिसमें एक निगरानी टावर को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। भारत ने ईरान के इसी बंदरगाह में निवेश कर रखा है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने चाबहार पोर्ट के टावर के तबाह होने की तस्वीर शेयर की।
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को एक टावर की तस्वीर शेयर की है जो ईरान पर लगातार हमलों के बाद गिरता हुआ दिख रहा था। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक यह तस्वीर चाबहार पोर्ट के टावर की है। हालांकि हेगसेथ ने खुद इस टावर या तस्वीर का संबंध किसी खास जगह से नहीं बताया। चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हवाई हमले कई बार हुए हैं। ईरान के सरकारी मीडिया ने इस जगह पर हमलों के तीसरे दौर की बात तो मानी लेकिन तुरंत यह नहीं बताया कि टावर गिर गया है।
चाबहार वही पोर्ट है जहां भारत ने भारी भरकम निवेश कर रखा है। लेकिन अभी तक भारतीय निवेश पर हमला नहीं हुआ है। अमेरिकी हमलों में गिराया गया यह टावर ईरान का एक तटीय निगरानी और समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर था जिसका इस्तेमाल वह कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने और अपने अर्धसैनिक बल (IRGC) की गतिविधियों के लिए करता था।
चाबहार पोर्ट में भारत का निवेश कहां है?
भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास के लिए लगभग 120 मिलियन डॉलर यानि करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। लेकिन भारत का यह निवेश शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के लिए क्रेन, कार्गो हैंडलिंग उपकरण और पोर्ट के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में लगा था न कि इस सुरक्षा टावर को बनाने में। ये टावर भारत ने नहीं बनाया था। ये टावर शाहिद कलंतरी पोर्ट वाले हिस्से में स्थित था जबकि भारत का निवेश शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल में है।
तेहरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने खाड़ी इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हमले किए हैं। यह हमला अमेरिकी सेना की तरफ से ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार छठी रात किए गए हमलों के बाद हुआ। हमलों के इस नए दौर से तनाव और बढ़ गया है। पिछले महीने हुए सीजफायर के बाद अब दोनों तरफ से रोजाना हमले हो रहे हैं।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।
अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।
विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।
पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।
पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।
अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें