Lok Sabha delimitation bill: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा परिसीमन का बिल संसद में पेश किया था लेकिन वह विपक्षी एकता के चलते गिर गया था। ऐसे में जब मॉनसून सत्र शुरू होने में गिनती के दिन बचे हैं तब शरद पवार की पार्टी ने समर्थन के संकेत देकर विपक्ष में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी भी नरम पड़ती दिख रही है।
हाइलाइट्स
- परिसीमन बिल पर शरद पवार के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी भी नरम
- यूबीटी सांसद संजय राउत बोले-बिल आएगा तो बैठकर हम चर्चा करेंगे
- एक दिन पहले ही सुप्रिया सुले ने शर्त के साथ दिए थे समर्थन के संकेत

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संसद में बिल दोबारा लाने की तैयारी
दरअसल, लोकसभा परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026) को लेकर सत्तापक्ष (NDA) और विपक्ष (INDIA गठबंधन) के बीच गंभीर राजनीतिक गतिरोध और खींचतान बनी हुई है। इस साल अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत की कमी के चलते यह विधेयक लोकसभा में खारिज हो गया था, लेकिन सरकार इसे आगामी मानसून सत्र में दोबारा लाने की तैयारी कर रही है। अगर संसद में यह बिल पास होता है तो लोकसभा सीटों की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 हो जाएगी। सत्तापक्ष का तर्क है कि 2029 के चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए सीटों का विस्तार और परिसीमन करना बेहद जरूरी है। राजनीतिक हलकों में टीएमसी और फिर उद्धव ठाकरे के छह सांसदों में शिंदे के साथ जाने को इसी बिल को पास लोकसभा के परिसीमन को बिल के लिए बीजेपी द्वारा जहां संख्याबल मजबूत किया जा रहा है। शरद पवार के नरम स्टैंड ने इंडिया अलायंस में खलबली मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर नंबर नहीं होंगे तो कांग्रेस को अपना स्टैंड बदलना पड़ सकता है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने रखी व्यक्तिगत राय
शिवसेना यूबीटी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर अपनी व्यक्तिगत राय रखी है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि मेरी निजी राय हमेशा से परिसीमन और ऐसी संसद के पक्ष में रही है जो सच में लोगों की ताकत को दिखाए। प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ संसद और विधानसभाओं में काम के दिनों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। संसद में जो संविधान संशोधन पास नहीं हो पाया, उसमें सभी राज्यों के लिए 50 फीसदी आनुपातिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव था ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो। यह एक सही और निष्पक्ष कदम था। चतुर्वेदी ने लिखा है कि एक बात याद दिला दूं कि 2023 का नारी शक्ति अधिनियम, जो सर्वसम्मति से पास हुआ था, उसमें आरक्षण से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया शामिल थी। मैंने पहले भी कहा था और फिर दोहरा रही हूं कि पार्टियां अपने रुख पर दोबारा सोचेंगी और यह पक्का करेंगी कि जिस प्रक्रिया में पहले ही बहुत देर हो चुकी है, उसे कानून बनने के लिए जरूरी समर्थन मिले।
सुप्रिया सुले की क्या है शर्त
एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले के बयानों के मुताबिक विपक्षी दल चाहते हैं कि बिल में यह स्पष्ट रूप से लिखा हो कि सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 फीसदी की वृद्धि होगी। एक कैप (सीमा) तय की जाएगी ताकि किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो। चर्चा है कि विपक्ष पूरी तरह इस बिल के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनकी अपनी मांगें हैं। डेक्कन हेराडल्ड के अनुसार की रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा है कि यदि सरकार उनके संशोधनों को शामिल करती है, तो विपक्ष इस पर विचार कर सकता है। उद्धव ठाकरे के पास अभी तीन सांसद हैं, राज्यसभा अकेले संजय राउत सदस्य हैं।
कांग्रेस ने नहीं बदला है अपना स्टैंड
परिसीमन बिल पर कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को केवल एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि उनका असली मकसद चुनावी सीमाओं में अपने फायदे के लिए बदलाव (जेरीमैंडरिंग) करना है। सुप्रिया सुले ने कहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने जानकारी दी है कि वह 19 जुलाई को नई दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक और 20 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगी। इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी भी मौजूद रहेगी। अब देखना है कि पार्टी क्या निर्णय लेती है। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। तीन अगस्त की तारीख काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस अभी तक बिल के विरोध करने के स्टैंड पर कायम है।
