Delimitation Bill News,शरद पवार के दांव के सामने उद्धव ठाकरे भी नतमस्तक, परिसीमन बिल पर बदले संजय राउत के सुर – lok sabha delimitation bill uddhav thackeray led shiv sena ubt mp sanjay raut hints to support after sharad pawar supriya sule ncp soft on nda – Politics News


Lok Sabha delimitation bill: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा परिसीमन का बिल संसद में पेश किया था लेकिन वह विपक्षी एकता के चलते गिर गया था। ऐसे में जब मॉनसून सत्र शुरू होने में गिनती के दिन बचे हैं तब शरद पवार की पार्टी ने समर्थन के संकेत देकर विपक्ष में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी भी नरम पड़ती दिख रही है।

हाइलाइट्स

  • परिसीमन बिल पर शरद पवार के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी भी नरम
  • यूबीटी सांसद संजय राउत बोले-बिल आएगा तो बैठकर हम चर्चा करेंगे
  • एक दिन पहले ही सुप्रिया सुले ने शर्त के साथ दिए थे समर्थन के संकेत
sajnay raut on lok sabha delimitation bill
उद्धव ठाकरे की यूबीटी परिसीमन बिल पर नरम पड़ी।(फोटोनवभारतटाइम्स.कॉम)
मुंबई: संसद के मॉनसून सत्र में लोकसभा परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन विधेयक) को समर्थन देने के संकेत देकर शरद पवार ने विपक्ष में हलचल मचा दी है। सुप्रिया सुले ने शर्त जोड़ी है कि बिल देखेंगे और फैसला लेंगे। इस सब के बीच महाराष्ट्र में राजनीति में गरमा गई है। संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस के 13 सांसदों के अलावा बाकी सभी का 35 सांसदों का सपोर्ट मोदी सरकार को मिल सकता है। महाराष्ट्र से कुल 48 लोकसभा सांसद हैं क्योंकि शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के इस मुद्दे पर नरम होने के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी नतमस्तक होती दिख रही है। पार्टी के फायरब्रांड लीडर और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि यह बिल संसद में आएगा या नहीं। जब बिल आएगा, तो हम सब बैठकर इस पर फैसला करेंगे।

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संसद में बिल दोबारा लाने की तैयारी

दरअसल, लोकसभा परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026) को लेकर सत्तापक्ष (NDA) और विपक्ष (INDIA गठबंधन) के बीच गंभीर राजनीतिक गतिरोध और खींचतान बनी हुई है। इस साल अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत की कमी के चलते यह विधेयक लोकसभा में खारिज हो गया था, लेकिन सरकार इसे आगामी मानसून सत्र में दोबारा लाने की तैयारी कर रही है। अगर संसद में यह बिल पास होता है तो लोकसभा सीटों की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 हो जाएगी। सत्तापक्ष का तर्क है कि 2029 के चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए सीटों का विस्तार और परिसीमन करना बेहद जरूरी है। राजनीतिक हलकों में टीएमसी और फिर उद्धव ठाकरे के छह सांसदों में शिंदे के साथ जाने को इसी बिल को पास लोकसभा के परिसीमन को बिल के लिए बीजेपी द्वारा जहां संख्याबल मजबूत किया जा रहा है। शरद पवार के नरम स्टैंड ने इंडिया अलायंस में खलबली मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर नंबर नहीं होंगे तो कांग्रेस को अपना स्टैंड बदलना पड़ सकता है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने रखी व्यक्तिगत राय

शिवसेना यूबीटी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर अपनी व्यक्तिगत राय रखी है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि मेरी निजी राय हमेशा से परिसीमन और ऐसी संसद के पक्ष में रही है जो सच में लोगों की ताकत को दिखाए। प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ संसद और विधानसभाओं में काम के दिनों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। संसद में जो संविधान संशोधन पास नहीं हो पाया, उसमें सभी राज्यों के लिए 50 फीसदी आनुपातिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव था ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो। यह एक सही और निष्पक्ष कदम था। चतुर्वेदी ने लिखा है कि एक बात याद दिला दूं कि 2023 का नारी शक्ति अधिनियम, जो सर्वसम्मति से पास हुआ था, उसमें आरक्षण से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया शामिल थी। मैंने पहले भी कहा था और फिर दोहरा रही हूं कि पार्टियां अपने रुख पर दोबारा सोचेंगी और यह पक्का करेंगी कि जिस प्रक्रिया में पहले ही बहुत देर हो चुकी है, उसे कानून बनने के लिए जरूरी समर्थन मिले।

सुप्रिया सुले की क्या है शर्त

एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले के बयानों के मुताबिक विपक्षी दल चाहते हैं कि बिल में यह स्पष्ट रूप से लिखा हो कि सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 फीसदी की वृद्धि होगी। एक कैप (सीमा) तय की जाएगी ताकि किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो। चर्चा है कि विपक्ष पूरी तरह इस बिल के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनकी अपनी मांगें हैं। डेक्कन हेराडल्ड के अनुसार की रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा है कि यदि सरकार उनके संशोधनों को शामिल करती है, तो विपक्ष इस पर विचार कर सकता है। उद्धव ठाकरे के पास अभी तीन सांसद हैं, राज्यसभा अकेले संजय राउत सदस्य हैं।

कांग्रेस ने नहीं बदला है अपना स्टैंड

परिसीमन बिल पर कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को केवल एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि उनका असली मकसद चुनावी सीमाओं में अपने फायदे के लिए बदलाव (जेरीमैंडरिंग) करना है। सुप्रिया सुले ने कहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने जानकारी दी है कि वह 19 जुलाई को नई दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक और 20 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगी। इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी भी मौजूद रहेगी। अब देखना है कि पार्टी क्या निर्णय लेती है। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। तीन अगस्त की तारीख काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस अभी तक बिल के विरोध करने के स्टैंड पर कायम है।

अचलेंद्र कटियार

लेखक के बारे मेंअचलेंद्र कटियारअचलेंद्र कुमार कटियार नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में गुजरात में रहकर पश्चिमी राज्यों की हलचल को कवर करते हैं। प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ अध्यापन को मिलाकर उन्हें 17 से अधिक वर्षों का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में रिपोर्टर और एडिटर की भूमिका में काम किया है। अचलेंद्र कुमार कटियार ने सितंबर 2022 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था।

पिछले तीन वर्षों में उन्होंने तीन बड़े चुनावों को कवर किया है। इनमें 2022 गुजरात विधानसभा चुनाव, 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव शामिल हैं। गुजरात विधानसभा चुनावों में उन्होंने ‘गुजरात बोले’ के तहत कई ग्राउंड रिपोर्ट्स की थीं।

गुजरात की राजनीतिक हलचल हो या फिर कोई बड़ा घटनाक्रम, उसके तमाम पहलुओं को अचलेंद्र रिपोर्ट करते हैं। गुजरात में अहमदाबाद विमान हादसे को उन्होंने सभी एंगल से कवर किया था। राजनीतिक घटनाक्रमों को वे स्टोरी और वीडियो के जरिए पाठकों तक पहुंचाते हैं।

विशेषज्ञता:
गुजरात समेत पश्चिमी राज्यों की राजनीति पर अच्छी पकड़, अपराध और ब्यूरोक्रेसी की हलचल, शहरों के विकास से जुड़े अपडेट और बड़े आयोजनों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना।

पत्रकारिता अनुभव:
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया को मिलाकर 17 से अधिक वर्षों से कार्यरत अचलेंद्र कुमार कटियार ने अप्रैल 2008 में मेरठ से प्रकाशित होने वाले डीएलए न्यूज़पेपर से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान (कानपुर लोकेशन) में सब-एडिटर के तौर पर काम किया। फिर कानपुर में ही दैनिक जागरण समूह के आई-नेक्ट न्यूज़पेपर में बतौर सब-एडिटर कार्य किया।

मार्च 2011 में उन्होंने दिल्ली का रुख किया और इंडिया न्यूज़ समूह के अख़बार आज समाज को जॉइन किया। यहां विभिन्न डेस्क के साथ-साथ खेल रिपोर्टिंग भी की। अप्रैल 2012 में हिंदुस्तान टाइम्स समूह के अख़बार हिंदुस्तान की युवा टीम का हिस्सा बने। यहां रहते हुए उन्होंने टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया से जुड़ी तमाम हलचलों को कवर किया।

2014 में वे हिंदुस्तान के दिल्ली ब्यूरो की रिपोर्टिंग टीम में शामिल हुए। इसके बाद दिल्ली मेट्रो, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और सीपीडब्ल्यूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) से जुड़ी खबरों के साथ-साथ दिल्ली की समस्याओं को कवर किया।

2017 में दिल्ली-एनसीआर के अंतर्गत आने वाले गुरुग्राम के ब्यूरो चीफ बने। बतौर चीफ रिपोर्टर उन्होंने हरियाणा की टीम को लीड किया। इस दौरान हरियाणा के 2019 विधानसभा और लोकसभा चुनावों को कवर किया। कई बड़ी रैलियों की रिपोर्टिंग की और कोरोना महामारी के दौरान ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज किया।

विश्वविद्यालय में अध्यापन:
2020 में न्यूज़रूम से क्लासरूम की ओर रुख करते हुए उन्होंने गुजरात के वडोदरा स्थित पारूल यूनिवर्सिटी को जॉइन किया। यहां उन्होंने फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया। इस दौरान पत्रकारिता के छात्रों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ फील्ड के अनुभवों से भी अवगत कराया।

अगस्त 2021 में उन्होंने मीडिया स्टार्टअप नेशन प्लान न्यूज़ को जॉइन किया। यहां ‘रिमांड’ नाम के टॉक शो के जरिए कई हस्तियों के इंटरव्यू किए।

शिक्षा / पुरस्कार:
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले अचलेंद्र कटियार ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJM University), कानपुर के डीएवी कॉलेज से पीजी किया है। इसके बाद दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया से मीडिया की पढ़ाई की।

अच्छे काम के लिए अचलेंद्र कटियार को कई इन-हाउस और बाहरी संस्थाओं से पुरस्कार मिल चुके हैं। हरियाणा में काम के दौरान उन्हें ‘गुरुग्राम अचीवर्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था।… और पढ़ें