Ed के आरोप:ममता सरकार के वक्त मंत्री ने फ्लैट के बदले दी सरकारी नौकरी, अपराध की कमाई से खड़ा किया साम्राज्य – Ed Allegations Minister Under Mamata Government Granted Government Jobs In Exchange For Flats Built An Empire


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने म्युनिसिपैलिटी भर्ती घोटाले के सिलसिले में सुजीत बोस (पूर्व मंत्री – फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज़ विभाग, पश्चिम बंगाल और पूर्व एमएलए), समुद्र बोस, ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय, आईएएस (तत्कालीन डायरेक्टर, डायरेक्टोरेट ऑफ लोकल बॉडीज) और अन्य लोगों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत कोलकाता की सिटी सेशंस कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) दायर की है। इसमें बंगाल में पूर्व ममता सरकार के मंत्री सुजीत बोस का कारनामा सामने आया है। उन्होंने अयोग्य लोगों को फ्लैट के बदले सरकारी नौकरी दी है। अपराध की कमाई से साम्राज्य खड़ा कर लिया। 

इससे पहले, ईडी ने सुजीत बोस को 11 मई को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 (1) के तहत गिरफ्तार किया था। कोलकाता की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने उन्हें 10 दिन की ईडी की कस्टडी में भेजा था। सुजीत बोस अभी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई द्वारा दर्ज केस के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। 

नगर पालिकाओं में विभिन्न पदों पर भर्ती में गड़बड़ियां …  

यह बताना जरूरी है कि ईडी ने सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के सामने WPA 9979 ऑफ़ 2022 (CAN 1 ऑफ़ 2023 के साथ) में CAN 2 ऑफ़ 2023 के तौर पर एक अर्ज़ी दायर की थी। इसमें पश्चिम बंगाल राज्य भर की नगर पालिकाओं में अलग-अलग पदों पर भर्ती में हुई गड़बड़ियों से जुड़ी अपनी जांच के नतीजों की एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी। ईडी की जांच में पता चला कि सुजीत बोस (साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी के पूर्व वाइस-चेयरमैन) ने साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी में 340 उम्मीदवारों की गैर-कानूनी नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी। 284 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो गई थी। बाद में साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी से मिली जानकारी से पता चला कि उसने 2014 से 2022 के दौरान 343 उम्मीदवारों की भर्ती की थी। जांच में यह भी सामने आया कि अयोग्य उम्मीदवारों से मिली ‘अपराध से हुई कमाई’ को शुरू में उनके प्रोप्राइटरशिप वाले बिज़नेस, ‘चाइनीज़ क्विज़ीन रेस्टोरेंट’ में डाला गया। 

लॉकडाउन के दौरान बैंक खातों में भारी मात्रा में कैश … 

इसे बिजनेस ऑपरेशन कम होने के बावजूद वैध कैश बिक्री के तौर पर दिखाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कोविड लॉकडाउन के दौरान भी बैंक खातों में भारी मात्रा में कैश जमा किया गया था। सुजीत बोस ने उक्त रेस्टोरेंट से जो फंड निकाला और ट्रांसफर किया। उसका इस्तेमाल बाद में हॉस्पिटैलिटी कंपनियों – जैसे श्री वेंकटेश बैंक्वेट्स प्राइवेट लिमिटेड और स्पेशलिटी ढाबा एलएलपी (बंगाल ढाबा और द बार एंड लाउंज) – को फंड देने और उनका विस्तार करने के लिए किया गया। यह काम कैपिटल कंट्रीब्यूशन और बिना गारंटी वाले लोन के ज़रिए किया गया। इसके अलावा, प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अतिरिक्त फंड का इंतज़ाम अलग-अलग शेल कंपनियों और व्यक्तियों से उधार लेकर किया गया। बाद में इस कर्ज को हॉस्पिटैलिटी कंपनियों के जरिए एडजस्ट किया गया। फ़र्ज़ी कैश बिक्री के ज़रिए ‘अपराध से हुई कमाई’ को घुमाकर, कर्ज चुकाया गया।

पारदर्शी भर्ती के अधिकार को भी छीन लिया …

जांच से पता चला है कि सुजीत बोस ने कुछ लोगों को नौकरी दिलाने के बदले में कई फ्लैट लिए, जो सीधे तौर पर अपराध से हुई कमाई का हिस्सा थे। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि उन्होंने अपराध से करोड़ों रुपये नकद कमाए, जिसे बाद में उन्होंने अपने कथित बिजनेस वेंचर्स में मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए ठिकाने लगाया। इससे साफ होता है कि सुजीत बोस ने न सिर्फ़ साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी की भर्ती प्रक्रिया को खराब किया, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती के अधिकार को भी छीन लिया और पैसे के फायदे के बदले गैर-कानूनी नियुक्तियां कीं।

आईएएस अधिकारी ने किया पद का गलत इस्तेमाल … 

जांच से यह साबित हुआ है कि पश्चिम बंगाल सरकार के लोकल बॉडीज़ डायरेक्टरेट के डायरेक्टर के तौर पर काम करते हुए, आईएएस अधिकारी ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय ने अपने पद और कानूनी अधिकार का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने तय भर्ती प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए अलग-अलग म्युनिसिपैलिटीज़, खासकर साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी में गैर-कानूनी नियुक्तियों को आसान बनाने, उन्हें सही ठहराने और रेगुलर करने का काम किया। खास तौर पर, ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय ने साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी में 29 और नियुक्तियों के प्रस्ताव को “खास मामले” के तौर पर मंज़ूरी दी, जबकि इसके लिए ज़रूरी सरकारी गाइडलाइंस के तहत अनिवार्य दस्तावेज़ मौजूद नहीं थे। ईडी ने इससे पहले 24.02.2025 को कोलकाता की स्पेशल कोर्ट में अयान सिल के खिलाफ़ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दायर की थी।



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