पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टूट का सामना कर रही है। हाल ही में करीब 5 दशक तक उनके भरोसेमंद रहे विधायक मदन मित्रा ने भी बागी गुट का दामन थाम लिया है। उन्होंने खुलकर सांसद अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबियों में शामिल रहे विधायक मदन मित्रा भी बगावत कर चुक हैं। बागी गुट में शामिल होने के बाद उन्होंने सांसद अभिषेक बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। विधायक ने यह तक कह दिया कि उन्हें ED यानी प्रवर्तन निदेशालय से ज्यादा अभिषेक से डर लगता है। खास बात है कि पार्टी के कई बड़े नेता विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहे हैं।
टेलीग्राम के अनुसार, बुधवार को मित्रा ने कहा, ‘मैं तृणमूल में था और तृणमूल में ही हूं। मैं सिर्फ एक कमरे से दूसरे कमरे में गया हूं।’ इस दौरान उनके पास बागी गुट की अगुवाई कर रहे विधायक ऋताब्रता बनर्जी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि उस कमरे में ज्यादा आरामदायक बिस्तर है। जबकि, इसमें सिर्फ एक खटिया। ऐसे में मैंने खटिया को चुना है।’
अभिषेक बनर्जी पर बरसे
उन्होंने कहा, ‘जमीनी स्तर के कार्यकर्ता परेशान हो रहे थे। पार्टी अभिषेक की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की है। अगर वह हिटलर की तरह इसे लाएंगे, तो ऐसे काम नहीं चलेगा।’ उन्होंने कहा, ‘पार्टी डूब रही है। नाव डूब चुकी है। इसके बाद भी पार्टी ने तय किया या उससे मानना पड़ा कि भले ही सभी लोग मर जाएं, लेकिन अभिषेक को बचाना होगा। मुझे ईडी से ज्यादा अभिषेक का डर लगता है। ईडी पूछताछ करेगी, लेकिन वह कहीं फिकवा देंगे। यह बहुत दुखद है।’
सॉरी बोल छोड़ी पार्टी
मित्रा ने कहा, ‘मैंने उन्हें एक व्हाट्सऐप संदेश भेजा, जिसमें लिखा था ‘सॉरी’। वह वर्षों तक हमारे साथ खड़ी रहीं और हमने भी अपने तरीके से योगदान देने की कोशिश की। उन्होंने जो कुछ भी किया है, उसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। लेकिन उन्हें यह तय करना होगा कि वह जनहित की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती हैं या अपने भतीजे के इर्द-गिर्द केंद्रित वंशवादी राजनीति को।’
उन्होंने कहा, ‘अभिषेक ईडी से भी ज्यादा डरावने हैं। मेरे फैसले का मुख्य कारण अभिषेक हैं। मैं पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था। तृणमूल अपने कार्यकर्ताओं की पार्टी है, किसी एक व्यक्ति की नहीं। इसे हिटलर की तरह तानाशाही तरीके से नहीं चलाया जा सकता। नेताओं को जनता के बीच जाना चाहिए।’
शुरुआत में अभिषेक का नाम लिए बिना, मित्रा ने कहा कि इतिहास में यह दर्ज होगा कि ‘एक व्यक्ति’ ने उस पार्टी को नष्ट कर दिया था, जिसने कभी 213 विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी।
विधायकों के अलावा 20 सांसद भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ चुके हैं। वहीं, 13 में 3 राज्यसभा सांसद इस्तीफा देने के बाद दोबारा भाजपा के टिकट पर उच्च सदन जाने की तैयारी कर रहे हैं।