E20 Petrol, Ethanol Blended Petrol: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का सबसे बड़ा तर्क तो यही दिया जा रहा है कि उससे विदेशों से कच्चा तेल कम मंगवाना पड़ेगा. लेकिन अगर एथेनॉल की माइलेज ही कम है तो उतने ही किलोमीटर चलने के लिए ईंधन तो ज़्यादा लगेगा. और अगर ईंधन ही ज़्यादा लगेगा, तो भले ही उसमें 20% एथेनॉल मिलाया हो, पेट्रोल तो फिर भी उसमें 80% है, तो वो पेट्रोल भी तो ज़्यादा चाहिए होगा. तो सौ बात की एक बात ये कि टोटल पेट्रोल ज़्यादा लगेगा या कम लगेगा? अगर ज़्यादा लगेगा तो डॉलर कैसे बचेंगे, क्योंकि वो तो विदेश से ही मंगाना पड़ेगा. और अगर कम लगेगा तो क्या इतना कम लगेगा कि बाक़ी जो नुक़सान होने की आशंका है उसकी भरपाई की जा सके? ये सब समझने की ज़रूरत है क्योंकि अगर घूम-फिर के पेट्रोल ही कम नहीं इस्तेमाल हो रहा तो फिर उसमें एथेनॉल मिला ही क्यों रहे हैं?
गाड़ी वाले लोग हाय-तौबा क्यों मचा रहे
कंपनियां कह रही हैं कि इतनी ही कमी आएगी. लेकिन अगर इतनी-सी ही कमी आ रही होती, अगर 15 से घटकर माइलेज 14.25 ही हो रही होती तो लोग इतनी हाय-तौबा क्यों मचाते? 15 से 14.25 होने में तो आम लोगों को पता भी नहीं चलता. लोग कह रहे हैं कि माइलेज ज़्यादा कम हो रही है. कंपनियां कह रही हैं कि ये उनका भ्रम है. लेकिन एक बात तो कंपनियां भी मान रही हैं कि 2023 से पहले बनी हुई गाड़ियां जो हैं उनमें ज़्यादा नुक़सान होता है. तो चलो अगर उस बात को ही ले लें, तो मोटे तौर पर अगर 2023 से पहले की गाड़ियों पर माइलेज ज़्यादा कम हो रही है ये मान ले तो फ़र्ज़ करो बीच का एक नंबर ले लें.
कंपनियों के दावे में ही झोल
कंपनियां कह रही हैं 5%, लोग कह रहे हैं 15-20%, तो मान लो पुरानी गाड़ियों पर 10% माइलेज कम हो रही है. तो 10% माइलेज कम होने का क्या मतलब हुआ? कि उगर गाड़ी की माइलेज 15 की थी तो वो हो गई 13.5 की. यानी जो गाड़ी 1 लीटर 100% पेट्रोल पर 15 km चलती है वो E20 पर चलेगी 13.5 km. तो अब सवाल ये कि 15 km चलने के लिए उसको कितना ईंधन चाहिए होगा? 1.11 लीटर. अब उसी 15 km तक जाने कि लिए 1 लीटर के बजाय 1.11 लीटर ईंधन चाहिए होगा. और 1.11 लीटर में 80% होगा पेट्रोल और 20% एथेनॉल. यानी 890 ml पेट्रोल लगेगा और 220 ml एथेनॉल.
आखिर एथेनॉल से कितना बच रहा पेट्रोल?
तो जब 100% पेट्रोल पर गाड़ी चल रही थी, तो 15 km चलने के लिए 1 लीटर लग रहा था पेट्रोल. लेकिन अब भी 890 ml तो पेट्रोल लग ही रहा है एथेनॉल के साथ. तो बचा कितना? 110 ml, जो हुआ 1 लीटर का 11%, मतलब ये कि 20% एथेऩॉल मिलाने पर भी पेट्रोल 20% कम नहीं लग रहा है, पेट्रोल तो 11% ही कम लग रहा है. क्योंकि माइलेज ही कम हो रही है तो टोटल ईंधन तो ज़्यादा लगाना पड़ रहा है. तो चलो 11% पेट्रोल की बचत भी अगर हो रही है देश को तो वो भी अच्छा क्योंकि उतना कच्चा तेल कम मंगाना पड़ेगा. लेकिन उसमें भी पेच है. क्योंकि सारे कच्चे तेल का पेट्रोल तो नहीं बनाया जाता. डीज़ल भी बनता है और हवाई जहाज़ का ईंधन भी बनता है. टोटल जितना कच्चा तेल आता है उसका सिर्फ़ 15-20% ही पेट्रोल बनाया जाता है. डीज़ल और बाक़ी चीज़ों में तो एथेनॉल मिला ही नहीं रहे. सिर्फ़ पेट्रोल में मिला रहे हैं.
महज 2 फीसदी कम तेल इंपोर्ट से कितना फायदा होगा?
यानी कच्चे तेल के 15-20% हिस्से में एथेनॉल मिल रहा है. और उसमें भी 11% की ही बचत हो रही है एथेनॉल मिलाने से. तो कुल कच्चा तेल जो बचेगा वो तो 2% के आसपास बचेगा. तो 2% कच्चा तेल कम इंपोर्ट करने से कितना फ़ायदा हो जाएगा? कितने डॉलर बच जाएंगे? तो अगर ये हिसाब बैठ रहा है तब तो एथेनॉल इस्तेमाल करने पर ही बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है. इसलिए गाड़ी को बाक़ी क्या नुक़सान हो रहा है या एथेऩॉल के और कौन-कौन से फ़ायदे हैं इस बहस में पड़ने से पहले ज़रूरी है कि कंपनियां ये साफ़-साफ़ टेस्टिंग कर के बताएं कि 2023 से पहले की गाड़ियों में E20 ईंधन डालने से माइलेज कितनी कम हो रही है. और उसकी वजह से कितना पेट्रोल कम इस्तेमाल हो रहा है, और उसकी वजह से कच्चा तेल कितना कम इंपोर्ट करना पड़ेगा.
E20 के लिए इतना ताम-झाम क्यो?
क्योंकि अगर कच्चा तेल सिर्फ़ 2% ही कम मंगाना पड़ेगा विदेश से, या 2 क्या 4% भी कम मंगाना पड़ेगा विदेश से तो उसके लिए इतने सारे बाक़ी तामझाम करने की ज़रूरत ही क्या है? E85 या E100 जिसमें 85% या 100% एथेनॉल होता है उसकी बात अलग है क्योंकि उसके लिए तो गाड़ी में इंजन ही दूसरे लगाने पड़ेंगे, फ़्लेक्स फ़ुएल वाले लगाने पड़ेंगे. तो उसमें कच्चे तेल की और डॉलरों की बचत समझ में आती है, E20 की बचत तो ऊंट के मुंह में जीरे जितनी दिख रही है अगर ये हिसाब सही है तो. और जीरे के चक्कर में ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो तब पता चले ना जब वो पहाड़ के नीचे आए. सौ बात की एक बात.