F&O में 88% ट्रेडर्स को भारी नुकसान: क्या अब सुरक्षित निवेश का समय आ गया है?
SEBI के 20 अगस्त 2026 के आंकड़ों ने F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) ट्रेडिंग करने वाले रिटेल निवेशकों की एक कड़वी सच्चाई उजागर की है। भले ही कुल नुकसान में 18% की गिरावट आई हो, लेकिन वित्त वर्ष 2026 (FY26) में करीब 88% रिटेल ट्रेडर्स को घाटा उठाना पड़ा है। इतना ही नहीं, प्रति व्यक्ति औसतन नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख तक पहुंच गया। ट्रेडिंग में लगातार बढ़ते खर्च और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच अब ज्यादातर भारतीय यह सोच रहे हैं कि आखिर अपने पैसों को सही जगह कहां लगाएं?
आंकड़ों के मुताबिक, रिटेल ट्रेडर्स के कुल नुकसान का 92% हिस्सा अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग से हुआ है। हालांकि बाजार में एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या घटी है, लेकिन घाटा झेलने वालों में नुकसान की रकम बढ़ गई है। दूसरी तरफ, 1 अप्रैल 2026 से डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है, जिससे ट्रेडर्स के लिए लागत निकालना और मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, 23 जुलाई 2024 से कैपिटल गेन्स टैक्स के नियमों में भी बदलाव हुआ है। कुल मिलाकर समझें तो, एक्सपायरी वाले दिन सट्टेबाजी करने से कहीं बेहतर है कि समझदारी के साथ लंबी अवधि का सुरक्षित निवेश चुना जाए।

Index SIP vs Direct Stocks vs F&O vs FDs: रिस्क और रिटर्न का गणित
इसे एक सीढ़ी की तरह समझें। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और लिक्विड या अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स कम जोखिम के साथ कम समय के निवेश के लिए सुरक्षित विकल्प हैं। 1 से 5 साल के नजरिए के लिए टारगेट मैच्योरिटी फंड्स ब्याज दरों के फेरबदल को आसान बनाते हैं। बिना शेयर चुनने का जोखिम लिए शेयर बाजार में एंट्री करनी हो, तो एसआईपी (SIP) के जरिए ब्रॉड इंडेक्स फंड सबसे बेहतर जरिया हैं। सीधे शेयरों (Direct Stocks) में निवेश के लिए गहरी रिसर्च और धैर्य की जरूरत होती है। वहीं, F&O रिस्क की सीढ़ी पर सबसे ऊपर आता है, जहां छोटी सी चूक भी पलभर में बड़ा नुकसान करा सकती है।
| प्रोडक्ट | हालिया 1 साल का रिटर्न / ब्याज दर |
|---|---|
| बैंक FD (1 साल) | ~6.5%–7.5% |
| लिक्विड फंड्स (कैटेगरी) | ~6.1%–6.3% |
| अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स (कैटेगरी) | ~6.2%–6.3% |
ये आंकड़े बैंकों के हालिया रेट्स और म्यूचुअल फंड्स की कैटेगरी पर आधारित हैं, जो ब्याज दरों में बदलाव के साथ घट-बढ़ सकते हैं। निवेश करने से पहले मौजूदा दरें जरूर जांच लें। मिसाल के तौर पर, अगस्त 2026 में अपडेट की गई बैंक FD दरों के साथ-साथ लिक्विड फंड्स का 1 साल का रिटर्न लगभग 6.1%–6.3% और अल्ट्रा-शॉर्ट कैटेगरी का रिटर्न करीब 6.3% रहा है।
Index SIP vs Direct Stocks vs F&O vs FDs: टैक्स और लागत का हिसाब-किताब
इंडेक्स फंड्स में टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) काफी कम होता है, जबकि डायरेक्ट शेयरों में ब्रोकरेज और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) का एक्स्ट्रा बोझ जुड़ जाता है। 1 अप्रैल 2026 से डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ा दिया गया है—अब ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.15% और फ्यूचर्स पर 0.05% टैक्स लागू है। इक्विटी से होने वाली कमाई की बात करें तो, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर 20% और ₹1.25 लाख से अधिक के लॉन्ग-टर्म गेन्स पर 12.5% टैक्स लगता है। इसके अलावा, “स्पेसिफाइड म्यूचुअल फंड्स” की श्रेणी में आने वाले डेट फंड्स पर शॉर्ट-टर्म टैक्स रेट के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है।
Index SIP vs Direct Stocks vs F&O vs FDs: कितने समय के लिए कहां करें निवेश?
अगर आपका नजरिया 3 से 6 महीने का है, तो बैंक FD, लिक्विड या अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स आपके लिए बेहतर हैं। 1 से 3 साल के लिए टारगेट-मैच्योरिटी या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड्स पर विचार किया जा सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य 5 साल या उससे अधिक का है, तो इंडेक्स SIP या डायवर्सिफाइड एसेट-एलोकेशन फंड्स सबसे मुफीद बैठते हैं। समझदारी भरा फैसला लेने के लिए SIP बनाम लम्पसम और FD कैलकुलेटर का सहारा लें, रिस्क कम करने के लिए ट्रेडिंग साइज सीमित रखें, एक्सपायरी डे की सट्टेबाजी से दूर रहें और अपने पोर्टफोलियो को डेट व इक्विटी में सही तरीके से बांटें।