Foil On Wallet: बटुए पर एल्युमिनियम फॉयल क्यों लपेट रहे हैं लोग? वजह कोई वहम नहीं, जानें आप क्या करें – why people are wrapping wallets in aluminum foil rfid skimming wireless theft blocking protection tips


क्या आप जानते हैं, लोग दुनियाभर में अपने बटुए को फॉयल में लपेट रहे हैं? दरअसल ऐसा अपने एडवांस चिप से लैस डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स और आईडी आदि को स्कैमर्स से सुरक्षित रखने के लिए किया जा रहा है। आप खुद को सुरक्षित रखने के लिए RFID फ्रूफ बटुए या स्लीव का इस्तेमाल कर सकते हैं या ऐपल वॉलेट या सैमसंंग पे जैसे ऐप में अपने कार्ड कैरी कर सकते हैं।

why people are putting their wallet in foil
फॉयल में क्यों बटुए को लपेट रहे हैं लोग?
आपको खाने के सामान को एल्युमिनियम फॉयल में लपेटने के बारे में पता होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोग अपने बटुए यानी कि वॉलेट को भी फॉइल में लपेट रहे हैं। इसके पीछे की वजह कोई वहम या अंधविश्वास नहीं, बल्कि पूरी तरह से टेक्निकल है। दरअसल आजकल के क्रेडिट कार्ड, मेट्रो पास, ऑफिस के आईडी कार्ड और एन्हांस्ड ड्राइविंग लाइसेंस आदि में RFID या NFC चिप लगी होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ चिप्स को 162 फीट की दूरी से भी ट्रैक किया जा सकता है।

ऐसे में खुद को वायरलेस ट्रैकिंग से बचाकर रखने के लिए दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग अपने पर्स को एल्युमिनियम फॉयल से लपेट रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों को वायरलेस चोरी का खतरा भी सता रहा है। इस ट्रेंड को इंटरनेट और खासकर कि टिकटॉक पर देखा जा रहा है।

क्यों बटुए को फॉइल में लपेट रहे हैं लोग?

क्यों बटुए को फॉइल में लपेट रहे हैं लोग?
  • दरअसल आजकल कार्ड्स और आईडी में काम को आसान बनाने के लिए कॉन्टैक्टलेस चिप्स दी जाती हैं। जिन्हें आप मशीन पर टैप करके झटपट पेमेंट्स कर सकते हैं।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी साधारण पोर्टेबल स्कैनर की मदद से दूर से ही आपके कार्ड का यूनिक आईडी नंबर स्कैन कर सकता है।
  • इसके अलावा कार्ड की कॉपी फोन में बनाने वाले ऐप्स भी धड़ल्ले से मार्केट में उपलब्ध हैं।
  • इसके लिए धोखाधड़ी करने वालों को अपनी मशीन या फोन को सिर्फ आपके बटुए के थोड़ा नजदीक ले जाने की जरूरत होती है।
  • एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे सीधे आपके बैंक से पैसे नहीं निकलते लेकिन यह चिप एक ही फिक्स नंबर बार-बार ब्रॉडकास्ट करती है।
  • इससे कोई भी आपको ट्रैक कर सकता है और आपके आने-जाने के पैटर्न पर नजर रख सकता है।

फॉयल लगाने से क्या होता है?

फॉयल लगाने से क्या होता है?
  • फिजिक्स के अनुसार फॉयल एक बेहतरीन कंडक्टर है। जब इसमें फोन या कार्ड जैसी किसी चीज को लपेटा जाता है, तो यह एक फैराडे केज की तरह काम करता है।
  • इससे बाहर से अंदर और अंदर से बाहर जाने वाली रेडियो तरंगे ब्लॉक हो जाती हैं।
    हालांकि यह पुख्ता उपाय नहीं है क्योंकि अगर फॉयल में छोटा सा भी छेद हो तो सिग्नल लीक हो सकता है।\
  • ऐसे में एक परत लगाने से बेहतर कई परतों का इस्तेमाल करना होता है।
  • बाजार में ऐसे वॉलेट या बटुए मौजूद हैं, जो इसी सिद्धांत पर काम करते हैं और कार्ड्स आदि को आपके पर्स में सुरक्षित रखते हैं।

आप क्या कर सकते हैं?

आप क्या कर सकते हैं?
  • दरअसल बटुए पर फॉयल लपेटना कोई प्रैक्टिकल उपाय नहीं है। यहां जरूरत एडवांस हो रही तकनीक के साथ सावधानी बरतने की है।
  • इसके लिए आप मार्केट में आने वाले RFID प्रूफ वॉलेट खरीद सकते हैं। यह तब तक कार्ड के सिग्नल को बाहर नहीं जाने देते, जब तक कि आप वॉलेट से कार्ड को बाहर नहीं निकालते हैं।
  • इसके अलावा ऐसे कार्ड मैनेजर भी आते हैं, जो कि RFID प्रूफ होते हैं। अगर आप वॉलेट नहीं इस्तेमाल करते हैं, तो अपने कार्ड्स को इस तरह से कैरी भी कर सकते हैं।
  • इससे बचने का एक तरीका यह भी है कि आप फोन में मौजूद वॉलेट का इस्तेमाल करें। दरअसल सैमसंग और ऐपल के फोन्स में कार्ड स्टोर करने का फीचर मिलता है। हालांकि ऐपल वॉलेट का फीचर भारत में अभी उपलब्ध नहीं है लेकिन सैमसंग यूजर्स Samsung Pay ऐप में अपने कार्ड्स को सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
भव्य भारद्वाज

लेखक के बारे मेंभव्य भारद्वाजभव्य भारद्वाज, टेक और गैजेट्स की दुनिया के एक अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में जुड़े हुए हैं। पिछले 11 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भव्य ने टेक्नोलॉजी, गैजेट्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बदलते परिदृश्य को बहुत करीब से देखा और कवर किया है। इन्होंने जी न्यूज (DNA), इंडिया न्यूज, यूसी न्यूज, ओपो इंडिया और बाइटडांस (टिकटॉक) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहते हुए टेक्‍नोलॉजी को हिंदी भाषा में आम यूजर्स तक पहुंचाया है। इन्‍होंने Google और WhatsApp (Meta) जैसी ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए काम करते हुए तकनीकी बारीकियों और यूजर्स को लेकर अपनी समझ को बेहतर क‍िया है।
एक टेक जर्नलिस्ट के तौर पर भव्य की विशेषज्ञता नए गैजेट्स के रिव्यूज, लॉन्च इवेंट्स और एआई (AI) की दुनिया में हो रहे बदलावों पर है। भव्य AI के बारे में पढ़ने-समझने के साथ उसका इस्तेमाल करके लोगों तक उनके काम की चीजों को पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। साथ ही उनकी पैनी नजर न सिर्फ लेटेस्ट स्मार्टफोन्स पर रहती है, बल्कि वह ऑडियो डिवाइसेस और वियरेबल्स को भी गहराई से परखते हैं। भव्य का हुनर जटिल तकनीकी जानकारियों को आसान और बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम पाठक भी नई तकनीक को आसानी से समझ सकें। भव्य अलग-अलग टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करते हुए लोगों तक आसान भाषा में काम में आने वाले टिप्स और ट्रिक्स पहुंचाने में भी महारत रखते हैं।

भव्य भारद्वाज ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास मीडिया और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक किया है। उन्‍होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें तकनीकी खबरों को तथ्यात्मक और रचनात्मक तरीके से पेश करने की मजबूती देती है।
वह टेक्नोलॉजी को सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स के आधार पर नहीं आंकते, बल्कि इस नजरिए से देखते हैं कि एक यूजर को उसके साथ कैसा अनुभव मिलेगा। वह मानते हैं कि टेक्नोलॉजी का असली मकसद जीवन को सरल बनाना है और यही सोच उनकी टेक्नोलॉजी को बयान करने के तरीके में भी झलकती है।… और पढ़ें