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Gaya Teacher Story: गया जिले के आमस प्रखंड के शिक्षक धर्मेंद्र कुमार पिछले 25 वर्षों से गरीब छात्रों को निशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में अब तक 84 छात्र-छात्राओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है. खास बात यह है कि वह फीस नहीं लेते, बल्कि सफल छात्रों से तीन जरूरतमंद बच्चों की मदद करने का संकल्प दिलाते हैं. उनकी यह पहल आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है.
गया: बिहार के गया जिले के एक शिक्षक अपनी अनोखी सोच और सेवा भावना के कारण चर्चा में हैं. आमस प्रखंड के बहेरा गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार ने खुद सरकारी नौकरी मिलने से पहले 40 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाई. आज तक उनके मार्गदर्शन में 84 छात्र-छात्राएं विभिन्न सरकारी सेवाओं में चयनित हो चुके हैं. वर्तमान में वह मध्य विद्यालय रेंगनिया में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. धर्मेंद्र कुमार साल 2000 से अपने गांव और आसपास के गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं. उनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सही मार्गदर्शन देकर सरकारी नौकरी तक पहुंचाना है. आज भी वह बिना किसी शुल्क के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं.
कहानी साल 1999 से शुरू हुई
धर्मेंद्र कुमार की प्रेरणादायक कहानी साल 1999 से शुरू होती है. उस समय शिक्षक बहाली की प्रक्रिया चल रही थी. इंटरनेट और सूचना तंत्र मजबूत नहीं होने के कारण उन्हें भर्ती की जानकारी नहीं मिल सकी. उनके कई परिचितों का चयन शिक्षक के पद पर हो गया, लेकिन जानकारी के अभाव में वह आवेदन नहीं कर सके. इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. उन्होंने संकल्प लिया कि भविष्य में किसी भी ग्रामीण छात्र को केवल जानकारी के अभाव में नौकरी से वंचित नहीं होना पड़ेगा. इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2000 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का काम शुरू किया.
कई छात्र सरकारी नौकरी में पहुंचे
उनकी मेहनत रंग लाई. वर्ष 2010 तक उनके मार्गदर्शन में 40 से अधिक छात्र सरकारी नौकरी हासिल कर चुके थे. केवल वर्ष 2010 में ही करीब 30 छात्र-छात्राओं का विभिन्न सरकारी विभागों में चयन हुआ. किसी ने शिक्षक की नौकरी पाई तो किसी का चयन दूसरे विभागों में हुआ. उस समय तक धर्मेंद्र कुमार स्वयं बेरोजगार थे. वह खेती करके अपना जीवन चला रहे थे. उनके पढ़ाए हुए कई छात्र सरकारी नौकरी में पहुंच चुके थे. वर्ष 2011 में उन्हीं सफल छात्रों ने उन्हें शिक्षक भर्ती का फॉर्म भरने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद उनका चयन सरकारी शिक्षक के रूप में हो गया.
पहली ही कोशिश में सफलता हासिल
बता दें कि, साल 2011-12 से धर्मेंद्र कुमार सरकारी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल वह मध्य विद्यालय रेंगनिया में बच्चों को पढ़ाते हैं. स्कूल की छुट्टी के बाद वह रोज शाम करीब सात बजे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को निशुल्क मार्गदर्शन देते हैं. वर्तमान में प्रतिदिन 25 से 30 छात्र उनसे पढ़ने आते हैं. उनके पढ़ाने का तरीका ऐसा है कि कई छात्र पहली ही कोशिश में सफलता हासिल कर लेते हैं.
फीस या गुरुदक्षिणा नहीं लेते
धर्मेंद्र कुमार के यहां पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक खास शर्त भी है. वह किसी से फीस या गुरुदक्षिणा नहीं लेते. उनकी केवल एक शर्त होती है कि यदि कोई छात्र उनके मार्गदर्शन में सरकारी नौकरी हासिल करता है, तो वह आगे चलकर कम से कम तीन गरीब छात्रों की निशुल्क मदद करेगा. उन्हें पढ़ाएगा, सही जानकारी देगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग करेगा.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी निशुल्क
धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि अपने संघर्ष के दिनों में उन्होंने संकल्प लिया था कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों की हर संभव मदद करेंगे. इसलिए उन्होंने तय किया कि वह कभी पैसे या उपहार के रूप में गुरुदक्षिणा नहीं लेंगे. उनके लिए सबसे बड़ी गुरुदक्षिणा यही होगी कि उनके छात्र आगे बढ़कर दूसरे जरूरतमंद छात्रों का हाथ थामें. आज उनके कई पूर्व छात्र भी इसी सोच के साथ काम कर रहे हैं. वे गरीब बच्चों को नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी निशुल्क करा रहे हैं. इससे कई बच्चों का भविष्य संवर रहा है.
जीवन का बड़ा सबक दिया
धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि वर्ष 1999 की घटना ने उन्हें जीवन का बड़ा सबक दिया. उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि जब भी नौकरी करेंगे, शिक्षक ही बनेंगे. वर्ष 2000 से उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए छात्रों को पढ़ाना शुरू किया. आज उनके मार्गदर्शन में 84 छात्र-छात्राएं सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्मेंद्र कुमार केवल शिक्षक नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा हैं. उनका समर्पण, सेवा भावना और अनोखा संकल्प आज सैकड़ों युवाओं के जीवन को नई दिशा दे रहा है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
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