Giral Mines Strike Update What Next For Ravindra Bhati 45-day Long Barmer Protest – Barmer News


बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन को 27 दिन पूरे हो चुके हैं, जबकि श्रमिकों का कहना है कि वे पिछले 45 दिनों से अपने अधिकारों और रोजगार सुरक्षा को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस आंदोलन में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार श्रमिकों के साथ धरनास्थल पर मौजूद हैं। तपती गर्मी और प्रतिकूल मौसम के बीच विधायक भाटी धरनास्थल पर ही रात्रि विश्राम कर रहे हैं। साथ ही वे वहीं से जनसुनवाई कर क्षेत्र के लोगों की समस्याएं भी सुन रहे हैं।

मजदूरों की मांगें पूरी तरह जायज

रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि श्रमिक पिछले 45 दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। उन्होंने कहा कि श्रमिक रोजगार सुरक्षा, सम्मान और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जो पूरी तरह उचित हैं। भाटी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सबसे पहले मेहनतकश वर्ग की बात सुने, क्योंकि यही वर्ग प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

जनता ने लड़ाई लड़ने के लिए चुना है

विधायक भाटी ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया है और आगे भी हर मंच पर मजदूरों की आवाज बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने कहा- ‘जिन लोगों ने मुझे चुनकर विधानसभा में भेजा है, उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना मेरा पहला दायित्व है। मैं राजनीति करने नहीं, बल्कि जनता की लड़ाई लड़ने आया हूं। मजदूरों और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करूंगा।’

हजारों परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं

विधायक रविंद्र भाटी ने कहा कि गिरल, आकली, थुमली, सोनड़ी और आसपास के हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना पूरे क्षेत्र की भावनाओं की अनदेखी होगी।

धरनास्थल पर ही जनसुनवाई

आंदोलन के बीच भी विधायक भाटी अपने जनप्रतिनिधि होने की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। प्रतिदिन विभिन्न गांवों से लोग पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा, राजस्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी समस्याएं लेकर धरनास्थल पहुंच रहे हैं। भाटी मौके पर ही लोगों की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों से संवाद कर समाधान का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि आंदोलन में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि वे क्षेत्र की अन्य जिम्मेदारियों से पीछे हट जाएंगे।

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आंदोलन को और व्यापक करने के संकेत

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल गिरल माइंस तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमिक अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। वहीं रविन्द्र सिंह भाटी ने संकेत दिए हैं कि यदि समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है, लेकिन मजदूरों की आवाज लगातार अनसुनी रही तो आगे बड़े स्तर पर रणनीतिक निर्णय लिए जाएंगे।

 


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