Gold Silver Price Crash: ट्रंप के बयान से हाहाकार! सोना-चांदी धड़ाम, ₹10000 तक टूटे दाम; US की ये मीटिंग लाएगी तबाही?


नई दिल्ली| अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बयान के बाद सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट (gold silver price crash) आई। रात 9 बजे तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 2800 रुपए (gold price crash) प्रति 10 ग्राम और चांदी 10000 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price crash) से ज्यादा टूट गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ सकता है। जिसके चलते गोल्ड-सिल्वर की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है।

अब सवाल यह है कि क्या सोना-चांदी खरीदना चाहिए या फिर अभी और इंतजार करना चाहिए? और सबसे अहम सवाल कि आखिर सोने-चांदी के दाम कहां तक गिर सकते हैं? इसे लेकर कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी हेड (करेंसी रिसर्च) अनिंद्या बनर्जी ने बताया कि गोल्ड सिल्वर में अभी कितनी बड़ी गिरावट आ सकती है। साथ ही, उन्होंने टारगेट प्राइस भी दिए।

MCX पर कहां पहुंचे गोल्ड-सिल्वर के ताजा रेट?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला गोल्ड 1.85 फीसदी तक टूट गया। कीमत 2800 रुपए टूटकर 1,42,767 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। कारोबारी सत्र के दौरान गोल्ड का हाई लेवल 1,45,356 रुपए और लो लेवल 1,42,457 रुपए रहा।

सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में 4.50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई और कीमत 10,367 रुपए गिरकर 2,20,490 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। ट्रेडिंग के दौरान इसका हाई लेवल 2,30,916 रुपए और लो लेवल 2,20,221 रुपए रहा। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान चांदी 2,30,857 रुपए प्रति किलोग्राम पर क्लोज हुई थी।

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अब अनिंद्या बनर्जी से समझते हैं कि आखिर गोल्ड-सिल्वर में गिरावट कहां तक आ सकती है और इस हफ्ते के टारगेट प्राइस क्या हो सकते हैं?

सवाल-1: ट्रंप के बयान के बाद सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई, तो क्या हम यहां से किसी बड़े करेक्शन की उम्मीद कर सकते हैं?

जवाब- पहली बात तो यह है कि बड़ा करेक्शन काफी हद तक पहले ही हो चुका है। सोना अपने जनवरी के $5,600 के पीक से लगभग एक-चौथाई नीचे आ गया है और चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग आधी हो गई है। यह 2013 के बाद सोने के लिए सबसे खराब तिमाही थी। अभी हम जो देख रहे हैं, वह करेक्शन का आखिरी दौर है, न कि शुरुआत। आज की गिरावट इस साइकल के मुख्य विरोधाभास को भी दिखाती है।

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कीमती धातुओं को फायदा होने के बजाय नुकसान हो रहा है। इसका असर तेल और फेडरल रिजर्व के जरिए होता है। यहां से पूरी चाल तेल पर निर्भर करती है। कच्चा तेल जितना महंगा होगा, फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ाने का खतरा उतना ही बढ़ेगा, जिससे US यील्ड और डॉलर ऊपर जाएंगे और धातुएं नीचे आएंगी।

बाजार पहले ही दिसंबर तक फेड द्वारा कम से कम एक बार रेट बढ़ाने की 80% से ज्यादा संभावना मानकर चल रहा है। इसीलिए लिए आज सोना $4,100 से नीचे आ गया। इस साइकल में सोना सेफ हेवन के तौर पर ट्रेड नहीं कर रहा है। यह रियल यील्ड के आधार पर ट्रेड कर रहा है।

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सवाल-2: सोना कहां तक गिर सकता है, टारगेट प्राइस क्या होंगे और इस हफ्ते के लिए क्या आउटलुक है?

जवाबः सोने के लिए $4,000 पहला अहम सपोर्ट है और इसके नीचे $3,880 से लेकर $3,900 का जोन अहम है। जब तक $3,900 का लेवल बना रहता है, गिरावट सीमित रहेगी। अगर $3,900 का लेवल टूटता है, तो $3,600 की ओर और बड़ी गिरावट आ सकती है। MCX पर ₹1,40,000 बहुत अहम सपोर्ट है। अगर यह लेवल टूटता है तो ₹1,35,000 की ओर रास्ता खुल जाएगा। ऊपर की ओर, इंटरनेशनल मार्केट में $4,200 और MCX पर ₹1,50,000 अहम रेजिस्टेंस लेवल हैं।

सवाल-3: चांदी के दाम कहां तक गिर सकते हैं, इसके टारगेट प्राइस और हफ्ते का आउटलुक क्या हो सकता है?

जवाबः चांदी के लिए $55-56 अहम सपोर्ट जोन है। अगर $55 का लेवल टूटता है, तो हम $48-50 की ओर गिरावट देख सकते हैं। रेजिस्टेंस $63 से $63.50 पर है। इस हफ्ते मुख्य इवेंट्स में आज रात आने वाले FOMC मिनट्स शामिल हैं। जून की मीटिंग में रेट बढ़ाने को लेकर राय बंटी हुई थी, इसलिए डिटेल मायने रखती है। इसके बाद अगले हफ्ते US CPI के आंकड़े आएंगे।

उम्मीद है कि हेडलाइन-ड्रिवन उतार-चढ़ाव ज्यादा रहेगा। जब तक तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी और रेट-हाइक की उम्मीदें मजबूत होती रहेंगी, मेटल्स पर दबाव बना रहेगा। एक मजबूत निचला स्तर (बॉटम) तभी बनेगा, जब एनर्जी की कीमतें कम होंगी या फेड का रुख नरम होगा।

ट्रंप के बयानों का क्या मतलब?

अनिंद्या बनर्जी का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बयानों का बहुत ज्यादा मतलब नहीं निकालना चाहिए। अतीत में उनके रुख तेजी से बदले हैं। उन्होंने समझौते को खत्म घोषित किया और उसी बातचीत में बातचीत करने वालों के लिए बातचीत जारी रखने का दरवाजा खुला भी रखा।

खास बात यह है कि ईरान ने अपनी तरफ से समझौते को खत्म घोषित नहीं किया है। बाजार ने किसी एक बयान के बजाय घटनाओं की दिशा के आधार पर कीमत तय करना सीख लिया है, और बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद का समय बातचीत की वापसी लाता है या स्थिति और बिगड़ती है।

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