GSTR-3B फाइलिंग की डेडलाइन कल: देरी की तो लगेगा भारी जुर्माना और ब्याज
अगर आपकी कंपनी या बिजनेस का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से अधिक है और आप मंथली फाइलर हैं, तो कल यानी गुरुवार, 20 अगस्त 2026 आपके लिए बेहद अहम दिन है। कल GSTR‑3B दाखिल करने की आखिरी तारीख (Due Date) है। अगर आप इसमें चूक गए, तो आपको रोज के हिसाब से लेट फीस देनी होगी, साथ ही बकाया कैश देनदारी पर 18 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी लगेगा। आखिरी वक्त के सर्वर डाउन होने की समस्या या बैंकिंग अड़चनों से बचने के लिए आज ही टैक्स का भुगतान कर रिटर्न दाखिल कर लें।
कल किसे रिटर्न दाखिल करना है? उन सभी रेगुलर मंथली टैक्सपेयर्स को कल तक फाइलिंग करनी होगी जो क्वार्टरली (तिमाही) स्कीम में शामिल नहीं हैं। रिटर्न भरने से पहले अपने कैश लेजर में पर्याप्त बैलेंस जरूर जांच लें, क्योंकि जब तक कैश पेमेंट जमा नहीं होता, ब्याज की सुई चलती रहती है। अगर आप बैंक ट्रांसफर के जरिए पेमेंट कर रहे हैं, तो सेटलमेंट और CPIN के एवज में चालान आइडेंटिफिकेशन नंबर (CIN) जेनरेट होने के लिए थोड़ा समय हाथ में लेकर चलें।

GSTR‑3B डेडलाइन: समझें लेट फीस और ब्याज का पूरा गणित
GSTR‑3B दाखिल न करने पर रोजाना 50 रुपये (निल रिटर्न के मामले में 20 रुपये रोजाना) की लेट फीस लगती है, जो जून 2021 से लागू तय सीमा के दायरे में आती है। अगर पिछले साल का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से ऊपर रहा है, तो हर रिटर्न पर लेट फीस की अधिकतम सीमा 10,000 रुपये है। इसके अलावा, डेडलाइन खत्म होने के अगले ही दिन से नेट कैश देनदारी पर 18 फीसदी सालाना ब्याज लगना शुरू हो जाता है। इसे ऐसे समझें: अगर 10,00,000 रुपये के पेमेंट में सिर्फ 3 दिन की देरी हुई, तो आपको लगभग 1,479 रुपये का ब्याज भरना पड़ सकता है।
पेमेंट कट‑ऑफ और सेम‑डे क्रेडिट के लिए काम के टिप्स
GST पोर्टल पर NEFT (जो 24×7 हर आधे घंटे के बैच में काम करता है), रियल-टाइम RTGS, UPI और कार्ड्स से भुगतान की सुविधा मौजूद है। टैक्स का भुगतान दिन में जल्दी ही कर दें, ताकि पैसा सरकारी खाते में जमा हो सके और आपके PMT‑06 के बदले उसी दिन CIN जेनरेट हो जाए। अगर राज्य में किसी स्थानीय छुट्टी के कारण बैंक काउंटर बंद हैं, तो ओवर-द-काउंटर के बजाय ई-पेमेंट का ही इस्तेमाल करें।
रिटर्न दाखिल करने से पहले, अपनी परचेज बुक्स का मिलान GSTR‑2B से जरूर कर लें। ध्यान रखें कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) सिर्फ उन्हीं इनवॉइस पर लें जो 2B में दिख रहे हों। अगर आपने पहले गलती से ज्यादा ITC क्लेम कर लिया था, तो DRC‑03 के जरिए ब्याज सहित खुद से भुगतान कर दें। ई-इनवॉइस का डेटा सीधे GSTR‑1 में ऑटो-पॉपुलेट हो जाता है, इसलिए ‘शिप-टू GSTIN’ डिटेल्स को अच्छे से जांच लें। GSTR‑3B फाइल करने से पहले जरूरत पड़ने पर GSTR‑1 में सुधार कर लें, ताकि दोनों के डेटा में कोई अंतर न रहे।