Hormuz Risk: सिर्फ कूटनीतिक विरोध से काम नहीं चलेगा, पूर्व विदेश सचिव बोले ईरान-अमेरिका ने भारत को कहां फंसाया – hormuz risk diplomatic protest alone not work iran us war put india tight spot kanwal sibal


होर्मुज में एक बार फिर से जो हालात पैदा हुए हैं, उसके पीछे की कहानी लंबी हो चुकी है। वहां जो कुछ हो रहा है, वह भारत के नियंत्रण में नहीं है। ऐसे में भारत के लिए क्या रास्ता हो सकता है, पूर्व विदेश सचिव ने बताया।

Hormuz Risk Diplomatic protest alone not work
होर्मुज में ईरान-अमेरिका ने भारत को फंसा दिया
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच दोबारा शुरु हुए युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से असुरक्षित कर दिया है। होर्मुज ठप होने से सिर्फ भारत में तेल और गैस का संकट बढ़ने का खतरा नहीं है, जहाजों पर हमले में भारतीय नाविकों की जानें भी गई हैं। पूर्व विदेश सचिव और कई देशों में राजनयिक के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके कंवल सिब्बल ने खाड़ी क्षेत्र के मौजूदा हालात और उससे भारत के सामने पैदा हुई स्थिति पर खुलकर बात की है।

पश्चिम एशिया में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भारत ने शिपिंग कंपनियों से दो टूक कह दिया है कि अगले आदेश तक होर्मुज से गुजरने के दौरान अपने जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करें। भारत ने तीन जहाजों पर हुए हमले में दो भारतीय नाविकों के मारे जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया है। इससे पहले विदेश मंत्रालय ईरानी राजनयिक को तलब करके भारतीय नागरिकों की मौत को लेकर अपनी नाराजगी जता चुका है। लेकिन, कंवल सिब्बल ने कहा है कि जिस तरह के हालात हैं, उसमें इतने भर से काम नहीं चलेगा।

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कंवल सिब्बल का पोस्ट

‘अमेरिकी नीति को लेकर सचेत रहना होगा’

कंवल सिब्बल ने एक्स पोस्ट के माध्यम से कहा है कि ‘अमेरिका के साथ भारत की साझेदारी कई अहम हितों को पूरा करती हैं, लेकिन ये घटनाएं बताती हैं कि अमेरिका का रणनीतिक कदम हमेशा भारत की स्थिरता और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति के हिसाब से ही होगा, यह जरूरी नहीं।’

‘सिर्फ कूटनीतिक विरोध से काम नहीं चलेगा’

उनके मुताबिक, ‘भारत की जो कमजोरियां हैं, उनकी वास्तविकता को ध्यान में रखना ही होगा, जैसे कि ऊर्जा मार्गों में जो अहम चेकप्वाइंट्स हैं, वह हमारे कंट्रोल में नहीं है और बाहरी ताकतों की वजह से प्रभावित हो सकते हैं।’

घटना के बाद कूटनीतिक विरोध जताने से ज्यादा इस तरह की कमजोरियों को कम करने की जरूरत है।

कंवल सिब्बल, पूर्व विदेश सचिव

‘अमेरिकी नीति का खामियाजा भुगतना पड़ता है’

  • कंवल सिब्बल ने बताया है कि ईरान में जो कुछ हो रहा है, वह अचानक नहीं हुआ है।
  • उनके अनुसार यह उसके खिलाफ लंबी अमेरिकी नीति का नतीजा है।
  • उनके अनुसार अमेरिका-ईरान के संबंधों के बीच में भारत के लिए करने को ज्यादा कुछ नहीं है।
  • लेकिन, इनकी वजह से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, जहाजों के इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ता है और सबसे बड़ी बात की होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर तेल की सप्लाई ठंडे बस्ते में पड़ जाती है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका ने बनाया अस्थिरता का पैटर्न

  • जेएनयू चांसलर कंवल सिब्बल के अनुसार पश्चिम एशिया में अमेरिकी नीति की वजह से भारत को पहली बार भुगतना नहीं पड़ रहा है।
  • अमेरिका का इस क्षेत्र में इस तरह का एक पैटर्न लगातार बना हुआ है।
  • इसमें फैसले सीधे वॉशिंगटन में लिए जाते हैं और उसका खामियाजा भारत को भुगतना पड़ता है।
  • ऐसे में भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य से अलग हटकर कुछ ज्यादा ही गंभीरता से सोचना होगा।
अंजन कुमार

लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने’कोख में कत्ल’ प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर ‘मुर्दा, मवेशी, माफिया’ प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।और पढ़ें