IMEC: होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल को तोड़ देगा ये कॉरिडोर, सऊदी-भारत के प्रोजेक्ट को क्यों गेमचेंजर बता रहा इजरायल? – imec mumbai linked corridor will bypass hormuz strait break iran monopoly israel calls gamechanger


Israel on IMEC Corridor: इजरायली मीडिया में बार बार ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ की चर्चा की जा रही है और इसे ईरान के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया जाता है। अगर ये प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है तो होर्मुज कार्ड फेल हो जाएगा।

हाइलाइट्स

  • IMEC दो हिस्सों में बंटा है एक पूर्वी कॉरिडोर दूसरा उत्तरी कॉरिडोर
  • पूर्वी कॉरिडोर भारत को अरब की खाड़ी से समुद्री मार्ग से जोड़ेगा
  • उत्तरी कॉरिडोर खाड़ी देशों को रेलवे और सड़क नेटवर्क के जरिए यूरोप से जोड़ेगा

IMEC Corridor
भारत के मुंबई वाले ट्रेड कॉरिडोर को ‘गेमचेंजर’ मान रहा है इजरायल
तेल अवीव: इजरायली मीडिया में ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) प्रोजेक्ट की बार बार चर्चा होती रहती है। ये वो प्रोजेक्ट है जो अगर जमीन पर उतरता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की ‘ब्लैकमेलिंग’ हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। अमेरिका-इजरायल के खिलाफ युद्ध में ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट ट्रंप कार्ड साबित हुआ है और इसे बंद कर इसने उन देशों को परेशान किया है जिनका युद्ध से कोई लेना देना ही नहीं है।

लेकिन अगर IMEC प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है तो इसके एक ऐसा व्यापार मार्ग बनेगा जो होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बाइपास कर देगा। यानि अगर ईरान होर्मुज को बंद भी करता है तो वैश्विक व्यापार पर इसका कोई असर नहीं होगा। इजरायली मीडिया का दावा है कि IMEC प्रोजेक्ट को लेकर ईरानी शासन में भी बेचैनी है। सितंबर 2023 की शुरूआत में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर भारत, सऊदी और अमेरिका समेत देशों के बीच इसको लेकर सहमति बनी थी लेकिन जबसे ईरान ने होर्मुज को बंद किया है उसके बाद से इसे जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की जा रही है।

ईरान के रणनीतिक खतरा साबित हो सकता है IMEC

इसमें कोई शक नहीं है कि अगर IMEC बनता है ईरान अगर होर्मुज को बंद भी करता है तो उसका न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। फिर वो होर्मुज ब्लॉक ग्लोबल ट्रेड को घुटने पर नहीं ला सकता है। इसीलिए ये कॉरिडोर ईरान के लिए रणनीतिक खतरा माना जा सकता है। आईएमईसी होर्मुज स्ट्रेट का एक वैकल्पिक ट्रेड रूट है और इस रूट से भी उन सामानों का कारोबार संभव है जो होर्मुज से हो सकते हैं। इससे भारत और अरब खाड़ी देश ईरान के प्रभाव वाले होर्मुज को बायपस करते हुए जमीन और समुद्र के रास्ते सीधे यूरोप तक सामान भेज सकेंगे।
इजरायल का कहना है कि इसके अलावा यह नया रास्ता रिन्यूएबल एनर्जी के बड़े पैमाने पर महाद्वीपों के बीच निर्यात की नींव रख रहा है। इसमें इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के बीच बिजली और ग्रीन एनर्जी नेटवर्क को जोड़ना भी शामिल है। उम्मीद है कि इस कदम से तेल और गैस पर दुनिया की लंबे समय से चली आ रही निर्भरता कम होगी जो तेहरान की आर्थिक जीवनरेखा है।

IMEC ट्रेड रूट कैसा दिखेगा?

  • IMEC कॉरिडोर दो मुख्य हिस्सों में बंटा हुआ है।
  • पूर्वी कॉरिडोर- यह भारत को अरब की खाड़ी से समुद्री मार्ग के जरिए जोड़ेगा
  • उत्तरी कॉरिडोर- यह खाड़ी देशों को रेलवे और सड़क नेटवर्क के जरिए यूरोप से जोड़ेगा
  • कैसा दिखेगा ट्रेड रूट- भारत के मुम्बई पोर्ट से UAE पोर्ट, फिर सऊदी पोर्ट (रेलवे नेटवर्क), फिर जॉर्डन, फिर इजरायल का हाइफा पोर्ट और वहां से यूरोप ग्रीस का पिरायस पोर्ट और दूसरे बाकी देश

IMEC को लेकर ईरान की चिंताएं क्या हो सकती हैं?

ईरान की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज का ‘बेकार’ हो जाना है। आईएमईसी से होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक असर ही कमजोर हो जाएगा। ईरान की दूसरी बड़ी चिंता ये हो सकती है कि इस बड़े प्रोजेक्ट में इजरायल के शामिल होने से वह सुरक्षा और आर्थिक मामलों में काफी मजबूत होगा। इससे इजरायल को मध्य पूर्व में ईरान के प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सऊदी अरब के साथ मिलकर एक सैन्य गुट बनाने का मौका मिल जाएगा।
जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि अगर इजरायल सही कदम उठाता है कूटनीतिक लचीलापन दिखाता है और इस रूट को खुद से दूर जाने से रोकने में कामयाब हो जाता है तो यह ईरानियों के लिए एक जबरदस्त रणनीतिक झटका होगा और उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। दूसरी तरफ अगर इजरायल ढिलाई बरतता है देरी में फंस जाता है और इस कॉरिडोर को तुर्की की ओर जाने देता है तो इससे तेहरान को एक बड़ी जीत मिल सकती है। इससे क्षेत्र में इजरायल और अलग-थलग पड़ सकता है और उसका आर्थिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

अभिजात शेखर आजाद

लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।

विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।

पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।

पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।

अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें