Israel on IMEC Corridor: इजरायली मीडिया में बार बार ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ की चर्चा की जा रही है और इसे ईरान के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया जाता है। अगर ये प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है तो होर्मुज कार्ड फेल हो जाएगा।
हाइलाइट्स
- IMEC दो हिस्सों में बंटा है एक पूर्वी कॉरिडोर दूसरा उत्तरी कॉरिडोर
- पूर्वी कॉरिडोर भारत को अरब की खाड़ी से समुद्री मार्ग से जोड़ेगा
- उत्तरी कॉरिडोर खाड़ी देशों को रेलवे और सड़क नेटवर्क के जरिए यूरोप से जोड़ेगा

लेकिन अगर IMEC प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है तो इसके एक ऐसा व्यापार मार्ग बनेगा जो होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बाइपास कर देगा। यानि अगर ईरान होर्मुज को बंद भी करता है तो वैश्विक व्यापार पर इसका कोई असर नहीं होगा। इजरायली मीडिया का दावा है कि IMEC प्रोजेक्ट को लेकर ईरानी शासन में भी बेचैनी है। सितंबर 2023 की शुरूआत में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर भारत, सऊदी और अमेरिका समेत देशों के बीच इसको लेकर सहमति बनी थी लेकिन जबसे ईरान ने होर्मुज को बंद किया है उसके बाद से इसे जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की जा रही है।
ईरान के रणनीतिक खतरा साबित हो सकता है IMEC
इसमें कोई शक नहीं है कि अगर IMEC बनता है ईरान अगर होर्मुज को बंद भी करता है तो उसका न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। फिर वो होर्मुज ब्लॉक ग्लोबल ट्रेड को घुटने पर नहीं ला सकता है। इसीलिए ये कॉरिडोर ईरान के लिए रणनीतिक खतरा माना जा सकता है। आईएमईसी होर्मुज स्ट्रेट का एक वैकल्पिक ट्रेड रूट है और इस रूट से भी उन सामानों का कारोबार संभव है जो होर्मुज से हो सकते हैं। इससे भारत और अरब खाड़ी देश ईरान के प्रभाव वाले होर्मुज को बायपस करते हुए जमीन और समुद्र के रास्ते सीधे यूरोप तक सामान भेज सकेंगे।
इजरायल का कहना है कि इसके अलावा यह नया रास्ता रिन्यूएबल एनर्जी के बड़े पैमाने पर महाद्वीपों के बीच निर्यात की नींव रख रहा है। इसमें इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के बीच बिजली और ग्रीन एनर्जी नेटवर्क को जोड़ना भी शामिल है। उम्मीद है कि इस कदम से तेल और गैस पर दुनिया की लंबे समय से चली आ रही निर्भरता कम होगी जो तेहरान की आर्थिक जीवनरेखा है।
IMEC ट्रेड रूट कैसा दिखेगा?
- IMEC कॉरिडोर दो मुख्य हिस्सों में बंटा हुआ है।
- पूर्वी कॉरिडोर- यह भारत को अरब की खाड़ी से समुद्री मार्ग के जरिए जोड़ेगा
- उत्तरी कॉरिडोर- यह खाड़ी देशों को रेलवे और सड़क नेटवर्क के जरिए यूरोप से जोड़ेगा
- कैसा दिखेगा ट्रेड रूट- भारत के मुम्बई पोर्ट से UAE पोर्ट, फिर सऊदी पोर्ट (रेलवे नेटवर्क), फिर जॉर्डन, फिर इजरायल का हाइफा पोर्ट और वहां से यूरोप ग्रीस का पिरायस पोर्ट और दूसरे बाकी देश
IMEC को लेकर ईरान की चिंताएं क्या हो सकती हैं?
ईरान की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज का ‘बेकार’ हो जाना है। आईएमईसी से होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक असर ही कमजोर हो जाएगा। ईरान की दूसरी बड़ी चिंता ये हो सकती है कि इस बड़े प्रोजेक्ट में इजरायल के शामिल होने से वह सुरक्षा और आर्थिक मामलों में काफी मजबूत होगा। इससे इजरायल को मध्य पूर्व में ईरान के प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सऊदी अरब के साथ मिलकर एक सैन्य गुट बनाने का मौका मिल जाएगा।
जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि अगर इजरायल सही कदम उठाता है कूटनीतिक लचीलापन दिखाता है और इस रूट को खुद से दूर जाने से रोकने में कामयाब हो जाता है तो यह ईरानियों के लिए एक जबरदस्त रणनीतिक झटका होगा और उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। दूसरी तरफ अगर इजरायल ढिलाई बरतता है देरी में फंस जाता है और इस कॉरिडोर को तुर्की की ओर जाने देता है तो इससे तेहरान को एक बड़ी जीत मिल सकती है। इससे क्षेत्र में इजरायल और अलग-थलग पड़ सकता है और उसका आर्थिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
