नई दिल्ली. भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) आज से लागू हो गया है. इससे एक तरफ देश के घरेलू निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, दूसरी तरफ भारतीय सामानों को यूके का बाजार मिलेगा. टैरिफ कम होने से भारत में स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे कई ब्रिटिश उत्पाद सस्ते हो जाएंगे. भारत-ब्रिटेन फ्री डील इंडिया को ब्रिटेन के बाजार में चीन को चुनौती देने में बहुत सहायक होगी.
अब भारतीय निर्यातकों को लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा. भारत-यूके FTA के बाद पहली बार भारतीय कंपनियों को इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल और सीफूड जैसे सेक्टरों में जीरो या बेहद कम टैरिफ का फायदा मिलेगा. इससे चीन की ब्रिटेन के बाजार में लंबे समय से बनी बढ़त को चुनौती मिल सकती है. अब यूके के खरीदार “China+1” रणनीति के तहत भारत को वैकल्पिक सप्लायर के रूप में ज्यादा प्राथमिकता दे सकते हैं.
अभी कौन कितने पानी में
ब्रिटेन के मार्केट में चीन अभी भारत से बहुत आगे है. ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर चीन है, जबकि भारत 10वें नंबर पर है. साल 2025 में चीन ने ब्रिटेन को करीब 108.4 बिलियन डॉलर का सामान भेजा. वहीं, भारत का निर्यात सिर्फ 15.4 बिलियन डॉलर रहा. चीन ब्रिटेन का सबसे बड़ा वस्तु आयात स्रोत (Largest Goods Import Source) है.
टेक्सटाइल : चीन के साथ बांग्लादेश को भी टक्कर
ब्रिटेन हर साल लगभग 27 अरब डॉलर के कपड़े बाहर से मंगाता है. भारत का वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात 36.71 अरब डॉलर है. इसके बावजूद भारत केवल 1.79 अरब डॉलर के उत्पाद ही ब्रिटेन को निर्यात करता है. वहीं, चीन $10–11 बिलियन मूल्य के प्रोडक्ट निर्यात करता है. ब्रिटेन के टेक्सटाइल बाजार में भारत की हिस्सेदारी 6.1 फीसदी है. भारत अभी वहां चौथा सबसे बड़ा कपड़ा सप्लायर है. पहले भारतीय कपड़ों पर 12% तक टैक्स लगता था, जिससे बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों को फायदा होता था. अब भारत के लिए यह टैक्स 0% हो गया है. इससे भारतीय कपड़ों की कीमतें गिरेंगी और भारत को ज्यादा ऑर्डर मिलेंगे.
लेदर और फुटवियर: 16% टैक्स खत्म, बढ़ेगी रफ्तार
ब्रिटेन का लेदर और फुटवियर बाजार 8.5 अरब डॉलर का है. भारत 0.5 बिलियन डॉलर के लेदर प्रोडक्ट ब्रिटेन को निर्यात करता है. वहीं, चीन 3.3 बिलियन डॉलर का सामान ब्रिटेन भेजता है. पहले भारतीय जूतों और चमड़े के सामानों पर 16% तक का भारी टैक्स लगता था. अब यह टैक्स पूरी तरह खत्म हो चुका है. अगले दो साल में भारत इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी 5% तक बढ़ा सकता है.
ऐसा होने पर चीन को तो तगड़ा झटका लगेगा ही वियतनाम और कंबोडिया की भी ब्रिटेन के मार्के में हिस्सेदारी घटेगी. फिलहाल ब्रिटेन को भारत का निर्यात लेदर और फुटवियर निर्यात लगभग 440 मिलियन डॉलर का है. अनुमान है कि ब्रिटेन को भारत का लेदर एवं फुटवियर निर्यात बढ़कर 900 मिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है.
इंजीनियरिंग और केमिकल: दोगुना होगा भारत का निर्यात
इंजीनियरिंग के मामले में ब्रिटेन हर साल 193 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान आयात करता है. भारत का हिस्सा अभी सिर्फ 4.28 अरब डॉलर है. चीन $30–35 बिलियन डॉलर मूल्य का निर्यात करता है. लेकिन 18% तक का टैक्स हटने से अगले 5 साल में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात दोगुना होकर लगभग 7.5 अरब डॉलर होने की उम्मीद है.
केमिकल सेक्टर में भी चीन के चुनौती
शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिटेन का 28.35 अरब डॉलर का केमिकल बाजार खुल जाएगा. ब्रिटेन के बाजार में केमिकल सेक्टर में अमेरिका और चीन का दबदबा था. अब टैक्स फ्री एंट्री मिलने से भारत एक भरोसेमंद पार्टनर बनकर उभरेगा. माना जा रहा है कि अगले एक साल में भारत का केमिकल निर्यात 40% तक बढ़ जाएगा.
अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemicals), कार्बनिक रसायन (Organic Chemicals), कृषि रसायन (Agrochemicals) सहित विभिन्न केमिकल उत्पादों पर तत्काल और पूर्ण शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी, जिससे निर्यात में तेजी आएगी.
अनुमान है कि भारत-यूके CETA के प्रभाव से 2025-26 में ब्रिटेन को भारत का केमिकल निर्यात 30% से 40% तक बढ़ सकता है. इससे निर्यात में 650 से 750 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि होने की संभावना है.
भारतीय सीफूड का बढ़ेगा दबदबा
ब्रिटेन में भारतीय सीफूड, खासकर झींगा और व्हाइट फिश की बहुत मांग है. ब्रिटेन का समुद्री प्रोडक्ट का बाजार 5.4 अरब डॉलर का है. इसमें भारत की चीन के मुकाबले बढ़त है. लेकिन ब्रिटेन के सीफूड मार्केट में भारत की हिस्सेदारी अभी सिर्फ 2.25% है. अब टैक्स हटने से भारतीय सीफूड सस्ता होगा और यूके को इसका निर्यात बढ़ेगा.