India Vs Pakistan: भारत को पाकिस्तान खुद सौंपेगा POK, ‘जन्नत’ कश्मीर होगा पूरा, एक्सपर्ट के दावे से मुनीर-शहबाज को लगेगी आग – pakistan pok crisis increased amid suspended indus waters treaty may merger with india as defence analyst


POK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में इन दिनों जमकर प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शन माने जा रहे हैं। लोग पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी फौज के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। एक्सपर्ट से समझते हैं कि पीओके का भविष्य क्या हो सकता है और यह भी समझेंगे कि क्या कभी इसका विलय हो सकता है।

POK
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा है। ऐसा गुस्सा पहले कभी नहीं देखा गया है। पीओके में जो गुस्सा उबल रहा है, वह बलूचिस्तान और कबायली इलाके के लोगों के प्रदर्शनों से बेहद जुदा है। सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं और इंसाफ की मांग कर रहे हैं। फील्ड मार्शल असीम मुनीर की फौज इसके बाद भी पीओके के लोगों पर जुल्म ढा रही है। नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, चारों तरफ जमीन से घिरे इस इलाके में खाने-पीने की चीजों और दवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों की सप्लाई रोक दी है। इसके चलते आंदोलन के नेताओं ने खुलेआम भारत से दखल देने की मांग की है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान के लिए POK नासूर बन चुका है? क्या पीओके के प्रदर्शनों और पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ती नफरत के चलते पाकिस्तानी आका इस इलाके को खुद भारत को सौंप देंगे। एक्सपर्ट से समझते हैं पूरी बात।

POK पाकिस्तान के लिए नासूर, 79 साल साल से विरोध

डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि. ) जेएस सोढ़ी के अनुसार, पाकिस्तान जिस तरह से लगातार पीओके में दमन और अत्याचार करता आया है, उससे उसके खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है। हाल के दिनों में भारत की ओर से सिंधु जल संधि (IWT) रोके जाने और पीओके में तेज हो चुके विरोध प्रदर्शन से पहले से परेशान पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में पाकिस्तान के खिलाफ पीओके में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। पाकिस्तान में बीते 79 साल से ये विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

Defence Analyst JS Sodhi
रक्षा विशेषज्ञ जेएस सोढ़ी

79 साल POK को संभालने में नाकाम रहा पाकिस्तान

जेएस सोढ़ी के मुताबिक, बीते 79 साल से पाकिस्तान पीओके को संभालने में नाकाम रहा है। उसे यह बात हर हाल में समझनी होगी कि पीओके भारत का ही हिस्सा था और भारत का ही होकर रहेगा। जिस दिन पाकिस्तान को यह समझ आ जाएगा, वो पीओके पर अपना दावा छोड़ सकता है। उसे मजबूर होना पड़ जाएगा, क्योंकि पीओके के लोग खुद ही भारत में शामिल हो जाएंगे। भारत समेत पूरी दुनिया में पीओके को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा और प्रदर्शन होते रहे हैं। भारत सरकार भी लगातार कहती आई है कि पीओके भारत का हमेशा से हिस्सा रहा है। ऐसे में बढ़ते दबाव और चौतरफा प्रदर्शनों के चलते पाकिस्तान पीओके को भारत को सौंपने पर मजबूर हो सकता है।

पाकिस्तान को यह बात हर हाल में समझनी होगी कि पीओके हमेशा से भारत का ही हिस्सा था और यह एक दिन भारत का ही होकर रहेगा। जिस दिन पाकिस्तान को यह समझ आ जाएगा, वो पीओके पर अपना दावा छोड़ सकता है।

लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी, डिफेंस एनालिस्ट

पीओके को जोर-जबरदस्ती से मिला नहीं सकता है पाकिस्तान: एक्सपर्ट

डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी ने कहा-‘पाकिस्तानी हुकूमत और फौज को यह बात समझनी होगी कि POK को जोर-जबरदस्ती से नहीं मिलाया जा सकता है। पीओके के लोग भारत में विलय चाहते हैं। यह बात वो कई बार कह चुके हैं। पीओके को जबरन मिलाने की कोशिश से पाकिस्तान के खिलाफ मौजूदा प्रदर्शनों से बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार पीओके के लोगों को दोयम दर्जे का समझती है। वहां पर न तो खाना है और न ही पीने का साफ पानी। अस्पताल, स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत भी बदतर है।

पूर्व सोवियत संघ की तर्ज पर पाकिस्तान से टूटेगा पीओके

डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, पाकिस्तान को पीओके उसी तर्ज पर छोड़ना पड़ेगा, जैसा 25 दिसंबर, 1991 को पूर्व सोवियत संघ से टूटकर कई देश अलग हो गए थे। उस दिन पूर्व सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने इस्तीफा दे दिया था। पूर्व सोवियत संघ टूटकर 15 देशों में बंट गया था। पीओके भी इसी तर्ज पर पाकिस्तान से टूटकर भारत में जा मिलेगा। यह वक्त की बात है। इतिहास इस तरह के विलय से भरा पड़ा है।

पाकिस्तान ने JAAC को गलत समझा है

  • एनडीटीवी पर छपे एक लेख के अनुसार, पीओके का संचालन इस्लामाबाद से जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के ऑफिस से होता है। समय-समय पर ‘अंतरिम संविधान’ में संवैधानिक संशोधन किए गए हैं, क्योंकि इसे कश्मीर के साथ ‘फिर से जुड़ना’ है।
  • हालांकि, यहां स्थानीय प्रशासन का कम ही चल पाता है। यह बात उन 38 मांगों की लिस्ट से साफ होती है जो इन विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह हैं। इनमें से कोई भी मांग नई नहीं है और ये सालों से चली आ रही हैं, लेकिन 2023 में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बनने के बाद इन्हें एक साथ लाया गया।

JAAC में कौन-कौन लोग हैं शामिल

JAAC कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और इसके सदस्य वे लोग हैं जो रोजमर्रा की समस्याओं से जूझते हैं। जैसे ट्रांसपोर्टर, दुकानदार वगैरह। इसका सबूत उन लोगों की लिस्ट है जिन्हें इनका समर्थन करने के लिए सजा दी गई है। इनमें निचले स्तर के सरकारी कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें शिक्षा विभाग के 42 लोग, स्वास्थ्य विभाग के 12, बिजली और लोक निर्माण विभागों से पांच-पांच, स्थानीय सरकार और ग्रामीण विकास विभाग से तीन और कृषि और वन विभागों से दो-दो लोग शामिल हैं।

पीओके में क्या जुल्म ढा रहा पाकिस्तान

पीओके में रिटायर हो चुके टीचरों की पेंशन भी रोक दी गई है। इसके नेता भी मध्यम-वर्गीय परिवारों से हैं। जैसे सरदार अमन खान, जिन पर भारत से दखल की मांग करने के बाद करीब एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा गया है। पंजाब यूनिवर्सिटी के वकील ख्वाजा मेहरान, जिनका आसानी से बचना मुश्किल है क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान सेना पर कश्मीरियों को बंदूकें देने का आरोप लगाया था और अब गिरफ़्तार हो चुके शौकत नवाज मीर, जो पहले ट्रेड यूनियन नेता थे।

पीओके के लोगों की मांगें क्या हैं

  • एक मांग है पिछले दो सालों में विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के लिए मुआवज़ा। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन पर आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों का विरोध करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई थी।
  • एक और मांग राजनीतिक रूप से संवेदनशील थी। स्वायत्त क्षेत्र की विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था को खत्म करना। ये वे लोग हैं जो भारत से आकर पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों खासकर पंजाब में बस गए थे। इनमें से ज्यादातर लोग कभी PoK गए ही नहीं।
  • यह बात इस्लामाबाद और मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के लिए फायदेमंद है, जो इस हिस्से को अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने लायक समझती हैं। चुनाव क्षेत्रों में भी भारी असंतुलन है; जम्मू शरणार्थी सीटों के लिए लगभग 4.3 लाख वोटर हैं, जबकि कश्मीर घाटी में शरणार्थी सीटों के लिए सिर्फ़ 30,000 वोटर हैं।

पीओके ‘आजाद’ हुआ तो पाकिस्तान का अंत

अन्य मांगों में मीरपुर में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेहतर अस्पताल सुविधाएं, प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर कम टैक्स और जर्जर बिजली नेटवर्क को ठीक करने के लिए 10 अरब रुपये का आवंटन शामिल है। भले ही PoK पाकिस्तान की बिजली का मुख्य स्रोत है और मुख्य इलाके को भरपूर पनबिजली क्षमता देता है, फिर भी वहां लगातार बिजली कटौती होती रहती है। अगर PoK ‘आजाद’ हो जाता है, तो यह सचमुच पाकिस्तान के अंत की शुरुआत हो सकती है।

भारत का पीओके को लेकर क्या कहना है

भारत हमेशा से पीओके को अपना मानता आया है। उसके नक्शे में पीओके शामिल है। हालांकि, पीओके में दखल को लेकर भारत दूरी बनाए हुए है। चूंकि दिल्ली PoK को अपना इलाका मानती है, इसलिए उसे कम से कम मानवीय आधार पर दखल देने का अधिकार है।
दूसरा, दूसरे देशों पर दबाव डालने का विकल्प भी है। PoK के समर्थन में पूरे UK और न्यूजीलैंड में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इससे इस्लामाबाद पर दबाव बनाने के लिए गुंजाइश बन सकती है कि वह JACC नेताओं को जेल में डालने के बजाय कम से कम उनसे बातचीत करे।

भारत से खुलकर मांगी जा रही है मदद

जैसे-जैसे JACC के बड़े नेता अब खुलकर भारत से मदद मांग रहे हैं, सुरक्षा का खतरा और बढ़ेगा। बहुत कम लोग यह समझते हैं या खुलकर मानते हैं कि कश्मीर असल में पाकिस्तान की ‘जीवनरेखा’ (jugular vein) है। यही वजह है कि इस इलाके में पाकिस्तान की आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति दशकों से चल रही है। ज़ाहिर है, पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि के तहत भारत का 80 फीसदी पानी देना भी काफी नहीं है। वह सारा पानी चाहता है।

दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें