INDIAN DIPLOMACY: चीन की उलझ गई सबसे बड़ी चाल, भारत ने बुन दी ऐसी गजब जाल – india strategy with australia indonesia japan to counter china for open indo pacific and rare earths critical minerals supply chain


India Geopolitical Strategy: भारत हाल के बरसों में इंडो-पैसिफिक के लिए एक अलग ही रणनीति अपना रहा है। यह रणनीति इस समुद्री क्षेत्र के देशों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूत करना और प्रतिद्वंद्वी चीन की चुनौतियों से पार पाना भी है।

India Vs China and Indo Pacific
भारत बनाम चीन और हिंद प्रशांत
नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत में चीन की चाल नाकाम होती दिख रही है। भारत ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ रिश्ते बढ़ाने और मजबूत रक्षा समझौते करके चीन को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर जरूर कर दिया होगा। हाल ही में नई दिल्ली में अपने जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ हाई लेवल की बातचीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा किया। यह यात्रा बताती है कि पीएम मोदी की इस यात्रा ने नई दिल्ली की इंडो-पैसिफिक रणनीति पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि बदलते भू-राजनीतिक तनाव के बीच क्षेत्रीय शक्तियां समुद्री सहयोग को मजबूत करना चाहती हैं।

आजाद और खुला हिंद-प्रशांत चाहता है भारत

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 6 जुलाई को रवाना होने से पहले सोशल मीडिया एक्स पर अपने एक लेख को शेयर करते हुण् कहा था कि यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, ‘महासागर विजन’ और ‘आजाद और खुले इंडो-पैसिफिक’ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।
  • पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने लेख को शेयर करते हुए कहा था-आने वाले कुछ दिनों में मैं इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कई कार्यक्रमों में शामिल होऊँगा। इन मुलाकातों का मकसद विकास के इन अहम साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह पक्का करना होगा कि हमारे देश के युवाओं को आने वाले समय में और ज्यादा मौके मिलें।

चीन ने किया है परमाणु क्षमता वाली मिसाइल टेस्ट

पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब इस क्षेत्र में रणनीतिक प्राथमिकताएं बदल रही हैं। ऐसा वॉशिंगटन द्वारा अपनी चीन नीति में बदलाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण हो रहा है। हाल ही में एक सैन्य अभ्यास के दौरान चीन द्वारा प्रशांत क्षेत्र में परमाणु क्षमता वाली, पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

चीन की घेराव के जवाब में भारत ने भी चला बड़ा दांव: एनालिस्ट

  • नवभारत टाइम्स से बातचीत में रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) जेएस सोढ़ी बताते हैं कि चीन का मकसद भारत को चारों तरफ से घेरना है। वह एक तरफ पाकिस्तान, दूसरी तरफ बांग्लादेश और तीसरी तरफ नेपाल के जरिये भारत को जमीनी स्तर पर घेरना चाहता है। वह भारत को समंदर में भी घेरने में लगा हुआ है।
  • उन्होंने कहा-दक्षिण चीन सागर में अपना दबदबा बढ़ाने के बाद चीन हिंंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इन्हीं खतरों को भांपते हुए भारत ने भी बड़ा दांव चला है। वह एक तरफ जहां हिंद प्रशांत में अमेरिका के साथ मजबूत गठजोड़ बनाने में लगा हुआ है तो वहीं, वह समंदर की छोटी, मगर प्रभावशाली ताकतों के साथ मजबूती से हाथ मिला रहा है और समुद्री, आर्थिक और रक्षा समझौते कर रहा है।

चीन हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। उस पर कभी भी खुलकर भरोसा नहीं किया जा सकता है। वह दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह समंदर की क्षेत्रीय शक्तियों के साथ मिलकर ऐसा जाल बनाए, ताकि चीन के दबदबे को रोका जा सके।

लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी, डिफेंस एनालिस्ट

इंडो-पैसिफिक भारत के लिए अहम रणनीतिक अवधारणा

‘द हिंदुस्तान टाइम्स’ में इंडोनेशिया में भारत के पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह ने कहा, ‘शायद इस उभरती हुई साझेदारी का सबसे अहम पहलू यह है कि बड़ी ताकतों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बावजूद भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं।’ वहीं, ‘द प्रिंट’ में लिखते हुए भारत के पूर्व राजनयिक अजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत के लिए इंडो-पैसिफिक एक अहम रणनीतिक अवधारणा बनी हुई है।

शायद इस उभरती हुई साझेदारी का सबसे अहम पहलू यह है कि बड़ी ताकतों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बावजूद भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं।

इंडोनेशिया में भारत के पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया

भारत की रणनीतिक सोच का दायरा बढ़ा

  • भारत के पूर्व राजनयिक अजय मल्होत्रा ने द प्रिंट में लिखा-‘भारत की रणनीतिक सोच में इंडो-पैसिफिक अब मुख्य रूप से अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर पश्चिमी प्रशांत तक फैले एक निरंतर समुद्री क्षेत्र को दर्शाता है।’
  • उन्होंने आगे कहा, ‘भले ही दूसरी जगहों पर शब्दावली बदलती रहे, लेकिन भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के लिए यह एक स्थायी रणनीतिक भूगोल बना हुआ है।’ मल्होत्रा के अनुसार, मोदी के दौरे का हर पड़ाव एक खास रणनीतिक मकसद पूरा करता है।

भले ही दूसरी जगहों पर शब्दावली बदलती रहे, लेकिन भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के लिए यह एक स्थायी रणनीतिक भूगोल बना हुआ है।

भारत के पूर्व राजनयिक अजय मल्होत्रा ने द प्रिंट में लिखा

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलया, न्यूजीलैंड से भारत की पहुंच मजबूत

पूर्व राजनयिक अजय मल्होत्रा ने लिखा-‘इंडोनेशिया दोनों महासागरों के बीच समुद्री प्रवेश द्वार का काम करता है। ऑस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में भारत की सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारियों में से एक को मजबूत करता है। न्यूजीलैंड प्रशांत क्षेत्र में भारत की भागीदारी को बढ़ाता है। ये सभी मिलकर व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पहुंच को मजबूत करते हैं।’

भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया से मिलेगा चीन को जवाब

  • एक समुद्री आर्क (घेरा) जो पूर्वोत्तर एशिया से दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत तक फैला है। टोक्यो, जकार्ता, कैनबरा, वेलिंगटन और नई दिल्ली में नीति-निर्माता काफी हद तक एक जैसे सवालों से जूझ रहे हैं। जब अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को अलग करना मुश्किल होता जा रहा है, तो वे टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और औद्योगिक इनपुट तक पहुंच कैसे सुरक्षित करें?
  • ये सवाल धीरे-धीरे एक जैसी सोच की ओर ले जा रहे हैं। अब मौका सिर्फ भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को मजबूत करने का नहीं है, बल्कि खास तौर पर भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया को एक साथ जोड़ने का है, क्योंकि ये तीनों देश उस क्षेत्र के बारे में एक जैसे नतीजों पर पहुंच रहे हैं जो उनके लिए साझा है। इससे चीन की चुनौतियों से पार पाने में आसानी होगी।

‘G माइनस टू’ स्ट्रेटेजी अपना रहा भारत

  • भारत इंडो-पैसिफिक के लिए ‘G माइनस टू’ रणनीति अपना रहा है, जिन्हें 2026 में हाल ही में स्पीड मिली। जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की दिल्ली यात्रा और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के रणनीतिक शिखर सम्मेलन के दौरान हिंद-प्रशांत को लेकर चर्चा की गई। स्ट्रेटेजिस्ट सी राजा मोहन ने इस बारे में एक लेख भी लिखा है।
  • G माइनस टू रणनीति के तहत अमेरिका को एशियाई स्थिरता से और अधिक मजबूती से जोड़ने पर आधारित है, क्योंकि यह माना जाता है कि क्षेत्रीय देश अकेले चीन की विशाल सैन्य ताकत का मुकाबला नहीं कर सकते।
  • यह भी माना गया है कि चीन के साथ पूरी तरह से व्यापारिक संबंध तोड़ना असंभव है, क्योंकि क्षेत्र का कुल व्यापार एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का है।

‘G माइनस टू’ रणनीति से चीन की चाल पर फिरेगा पानी

  • चीन ने क्रिटिकल मिनरल हो या रेयर अर्थ इसकी सप्लाई पर रोक लगा दी है। ‘G माइनस टू’ रणनीति से सप्लाई चेन की कमजोरियों को कम किया जा सकेगा। जैसे ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से भारत को जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स मिल सकेगा। वहीं, जापान की हालिया ‘इकोनॉमिक सिक्योरिटी इनिशिएटिव’ और भारत के साथ दक्षिण कोरिया के चिप समझौते हाई-टेक्नोलॉजी ट्रेड नेटवर्क को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
  • अहम समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने में आसानी होगी। भारत ऑस्ट्रेलिया, जापान, इंडोनेशिया के साथ समुद्री सहयोग बढ़ा रहा है, जिससे व्यापारिक रास्ते अचानक नाकेबंदी से सुरक्षित रहते हैं।
  • इंडोनेशिया के साथ साझेदारी करने से मलक्का स्ट्रेट और दो महासागरों के मिलन स्थल से गुज़रने वाले अहम व्यापारिक रास्ते सुरक्षित होते हैं।
  • जैसे ऑस्ट्रेलिया अहम खनिजों के लिए एक जरूरी आधार के तौर पर काम करता है, जबकि न्यूजीलैंड एडवांस्ड एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी और उच्च शिक्षा के लिए रास्ते खोलता है।
  • जैसे ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल और अस्त्र बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज मिसाइल की सप्लाई के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच हालिया समझौता सब-रीजनल डेटरेंस (उप-क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिरोध क्षमता) को काफी बढ़ाता है।
  • भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्रा में लेन-देन और जुड़े हुए पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने से दोनों देशों के बीच का व्यापार वैश्विक मुद्रा के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है।

दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें