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Iran Soft Coup: ईरान में सत्ता संघर्ष की चर्चाएं तेज हो गई हैं. कट्टरपंथी गुट राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और घालीबाफ पर ‘सॉफ्ट तख्तापलट’ की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे रहस्य और गहरा गया है.
मसूद पेजेश्कियन और ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई. (Reuters)
तेहरान: बाहर से देखने पर ईरान इस वक्त अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध लड़ता दिखाई दे रहा है. लेकिन देश के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. ऐसा लग रहा है कि ट्रंप जिस तख्तापलट को चाहते थे, वही धीरे-धीरे होने लगा है. सत्ता के गलियारों में लड़ाई चल रही है. ईरान के कट्टरपंथियों का धड़ा खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बागेर कालीबाफ मिलकर देश में ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना सेना के सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. CNN ने इससे जुड़ी रिपोर्ट की है. रिपोर्ट में कहा गया कि इसी वजह से पिछले सप्ताह हुए अंतिम संस्कार में जब लोग पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचे तो राजनीतिक नेताओं के खिलाफ भी गुस्सा खुलकर सामने आया.
राष्ट्रपति के विरोध में सामने लगे नारे
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जब अंतिम यात्रा में शामिल थे तो भीड़ के एक हिस्से ने श्रद्धांजलि देने की बजाय उनकी तरफ मुड़कर ‘समझौता करने वाले की मौत हो’ जैसे नारे लगाए. इसी दौरान अमेरिका के साथ युद्धविराम और कुछ प्रतिबंधों में राहत की बातचीत करने वाले विदेश मंत्री अब्बास अरागची को भी प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक, अरागची पर भीड़ ने पत्थर फेंके और उन्हें ‘देश बेचने वाला गद्दार’ कहकर निशाना बनाया, जिसके बाद उन्हें वहां से हटना पड़ा.
‘सॉफ्ट तख्तापलट’ का आरोप आखिर क्यों?
दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने एक MoU पर समझौता हुआ था. इसी से कट्टरपंथी गुट चिढ़े हैं. इस समझौते पर राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ईरान की तरफ से साइन किया था. कट्टरपंथी गुटों का आरोप है कि अमेरिका के साथ समझौता कर ईरानी राजनीतिक नेतृत्व ने देश के क्रांतिकारी सिद्धांतों से समझौता किया है. उनका कहना है कि सरकार संसद की भूमिका कमजोर कर रही है, बातचीत में नए सुप्रीम लीडर के निर्देशों की अनदेखी कर रही है. साथ ही रात में होने वाली रैलियों को खत्म करना चाहती है, जो कट्टरपंथी खेमे की ताकत मानी जाती हैं.
कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईरान की जनता सावधान रहे. क्या देश में तख्तापलट होने जा रहा है?’ बाद में उन्होंने एक और पोस्ट में कहा, ‘हम अपने नेता के खून का बदला लेने का झंडा उठाए हुए हैं और तख्तापलट के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं.’
मोजतबा खामेनेई कहां हैं?
इस पूरे विवाद का सबसे रहस्यमयी पहलू नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, वह लंबे समय से सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं. उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर सत्ता संभालते दिखाई दिए हैं. इसी वजह से ईरान के भीतर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. कुछ लोगों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखा गया है, जबकि कुछ अन्य लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति ऐसी नहीं है कि वे सक्रिय भूमिका निभा सकें. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
राष्ट्रपति को मिली खुली धमकी
अमेरिका के साथ समझौते का विरोध केवल नारों तक सीमित नहीं रहा. CNN के मुताबिक, एक धार्मिक कार्यक्रम में ईरानी शासन समर्थक धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने राष्ट्रपति पेजेशकियन को चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो तलवार हमारी होगी और निशाना आपका गला होगा. हम आपके लिए जहन्नुम खड़ा कर देंगे.’ इस बयान की काफी आलोचना हुई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई सामने नहीं आई.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…और पढ़ें