Iran Israel War: इजरायल के जासूस थे ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद, हंगरी में मोसाद चीफ से मुलाकात, विस्फोटक खुलासा – mahmoud ahmadinejad iran former president was israeli agent met mossad chief in hungary


Mahmoud Ahmadinejad: अहमदीनेजाद को ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भाग लेते देखा गया था। वो मास्क और भारी कोट पहने थे और कई गार्डों के बीच घिरे थे। मोसाद उन्हें फिर से ईरान का राष्ट्रपति बनाने के प्लान पर काम कर रहा था।

हाइलाइट्स

  • न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद पर खुलासा किया
  • मोसाद अहमदीनेजाद को ईरान का नया राष्ट्रपति बनाना चाहता था
  • अहमदीनेजाद की हंगरी में मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया से मिले थे
Mahmoud Ahmadinejad
मोसाद के संपर्क में थे ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद
वॉशिंगटन/तेहरान: क्या ईरान के पूर्व कट्टरपंथी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम करते थे? सोमवार को अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने धमाकेदार खुलासा किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने कई वर्षों तक उन्हें अपने ‘एसेट के तौर पर तैयार करने की कोशिश की थी।’ ये एक ऐसा खुलासा है जिसने ईरान की राजनीति को हिला कर रख दिया है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी IRGC ने महमूद अहमदीनेजाद को नजरबंद कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक अहमदीनेजाद को फिर से ईरान का राष्ट्रपति बनाने की कोशिशें की जा रही थीं जो नाकाम हो गईं। उन्होंने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में भी अपनी उम्मीदवारी पेश की थी लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई। ये खुलासा ऐसे समय में किया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को जब इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था उस वक्त अहमदीनेजाद को उनके बॉडीगार्ड्स ने सुरक्षित उनके घर से बाहर निकाल लिया था।

अमेरिका ने अहमदीनेजाद पर जानकारी क्यों लीक की?

अब सवाल ये है कि आखिर अहमदीनेजाद को लेकर अमेरिकी अधिकारियों ने इतनी बड़ी जानकारी क्यों लीक कर दी है? इस खुलासे से ईरान के लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। वहीं कई लोगों ने लिखा है कि अगर अहमदीनेजाद मोसाद के लिए काम कर सकते हैं तो फिर किसी पर भी विश्वास नहीं किया जा सकता है और शायद कोई भी मोसाद के लिए काम कर सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया है कि 2024 की शुरुआत में बुडापेस्ट की एक यूनिवर्सिटी के रेक्टर को हंगरी सरकार के एक बड़े अधिकारी से एक चौंकाने वाली गुज़ारिश मिली।
अधिकारी ने रेक्टर प्रोफेसर गेरगेली डेली को बताया कि लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक सर्विस को जलवायु परिवर्तन पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित करनी चाहिए और एक ऐसे मेहमान को बुलाना चाहिए जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। वो नाम था ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जिन्हें बहुत से लोग नापसंद करते हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात इसके पीछे की वजह थी। अधिकारी ने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस असल में एक बहाना थी ताकि अहमदीनेजाद बुडापेस्ट में इजरायल के खुफिया एजेंटों के साथ गुप्त बातचीत कर सकें जबकि इजरायल ईरान का घोषित दुश्मन है।

अहमदीनेजाद को दोबारा ईरान का राष्ट्रपति बनाना चाहता था मोसाद

अहमदीनेजाद को ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भाग लेते देखा गया था। वो मास्क और भारी कोट पहने थे और कई गार्डों के बीच घिरे थे। NYT ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मोसाद की यह साजिश 2022 से चल रही थी और ऐसा माना जाता है कि उन्होंने इसमें साथ दिया क्योंकि वे विदेशी दखल को देश में दोबारा सत्ता हासिल करने का एक जरिया मान रहे थे। उन्हें नजरबंद इसलिए किया गया था क्योंकि ईरानी सरकार को इजरायली सरकार के साथ उनके संपर्कों पर शक था।
अहमदीनेजाद को यूरोप में इजरायली एजेंटों से मिलने जाने के दौरान यात्रा और रहने-सहने के खर्च के लिए इजरायल से आर्थिक मदद मिली थी जिसे इजरायल ने इतनी अहमियत दी कि तत्कालीन मोसाद निदेशक डेविड बार्निया ने 2024 में हंगरी की राजधानी में व्यक्तिगत रूप से अहमदीनेजाद से मुलाकात की थी। NYT का कहना है कि बाद में CIA को भी इस जोखिम भरे प्लान के बारे में जानकारी दी गई थी। हालांकि जब 28 फरवरी को इजरायल- अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया तो अहमदीनेजाद इस प्लान से हट गये। उन्हें इजरायल के इरादे पर शक होने लगा और उन्हें ये प्लान अवास्तविक लगने लगा।

अभिजात शेखर आजाद

लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।

विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।

पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।

पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।

अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें