Iran Oil Tanker Attack: क्या तेल के दाम कम न हो इसलिए किए गए होर्मुज में जहाजों पर हमले? जानें इसके पीछे का असली खेल


ईरान द्वारा हाल ही में तीन तेल और गैस टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद इस हमले के पीछे की मंशा को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल सैन्य या रणनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी प्रभावित करना हो सकता है.

ईरान ने जिन तीन टैंकरों पर हमला किया, उनमें कतर का एलएनजी टैंकर Al Rekayyat, सऊदी फ्लैग्ड क्रूड ऑयल टैंकर Wedyan और एक लाइबेरियन फ्लैग्ड टैंकर शामिल था. ईरान का दावा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर उसकी संप्रभुता और नियंत्रण है. उसका कहना है कि केवल ईरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्ग ही सुरक्षित है और मौजूदा युद्ध के बाद यही नई वास्तविकता होगी.

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कांस्पिरेसी थ्योरी

इस हमले के पीछे एक दूसरी कहानी भी सामने आ रही है, जिसे कई विशेषज्ञ और विश्लेषक कांस्पिरेसी थ्योरी के तौर पर देख रहे हैं. इस थ्योरी के मुताबिक, ईरान की कोशिश वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखने की हो सकती है.

तेल कीमतों का गणित

माना जा रहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे ईरान को आर्थिक लाभ मिल सकता है. इसी वजह से कुछ लोगों का दावा है कि ईरान ने जानबूझकर ऐसा हमला किया ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट न आए और उसकी तेल बिक्री को फायदा मिले.

सऊदी फैसले से जोड़

इस दावे को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि यह हमला उस फैसले के तुरंत बाद हुआ, जिसमें करीब 26 वर्षों बाद सऊदी अरब ने अपने कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी कटौती की थी. ऐसे में कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी टैंकर को निशाना बनाना उसी फैसले का जवाब हो सकता है.

सीजफायर पर सवाल

एक अन्य पक्ष का मानना है कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के कट्टरपंथी धड़े युद्धविराम (सीजफायर) को टूटते देखना चाहते हैं. उनका उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना हो सकता है. हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल विश्लेषकों की संभावित व्याख्याओं के रूप में ही देखा जा रहा है.

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