ISRO-DRDO में कैसे मिलती है रिसर्च वाली नौकरी? जानें 12वीं के बाद क्या करें, काम आएंगी एक्सपर्ट की ये 5 बातें – how do you land a research job at isro or drdo after 12th career tips for research field with expert tips


After 12th Career Tips in Hindi: साइंटिस्ट बनना है, पर कहां से शुरू करें, कौन-से ? रिसर्च फील्ड में बेहतर करियर पाने का ड्रीम बहुत से स्टूडेंट्स देखते हैं। लेकिन इस फील्ड में घुसने के लिए क्या करना चाहिए, कौन-सी डिग्री लें, कौन-सा एग्जाम दें आदि के बारे में आसानी से जानकारी नहीं मिल पाती। यहां स्टेप बाय स्टेप समझाया गया है कि रिसर्च क्षेत्र में करियर कैसे बनाया जा सकता है।

After 12th Career Tips in Hindi
रिसर्च फील्ड में करियर, चुनौतियां और समाधाना। (फोटो सोर्स- Pexels)
After 12th Career Tips for Research Field: 12वीं क्लास के बाद रिसर्च (अनुसंधान) के क्षेत्र में जाना बहुत शानदार फैसला हो सकता है। क्योंकि इस फील्ड के जरिए ISRO, DRDO, BARC , CSIR लैब्स जैसे देश के प्रतिष्ठित रिसर्च इंस्टीट्यूट्स में जाने का मौका मिलता है। चाहे आप साइंस, आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज या कॉमर्स हों, हर फील्ड में रिसर्च के रास्ते खुल जाते हैं। आइए समझते हैं 12वीं के बाद रिसर्च फील्ड में करियर कैसे बनाएं?

रिसर्च में करियर कैसे बनाएं?

सबसे पहले प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स वालों के लिए अलग प्रवेश प्रक्रिया आयोजित की जाती है, जिन्हें क्वालीफाई करने वाले छात्रों को ग्रेजुएशन या इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन मिलता है।

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) एप्टीट्यूड टेस्ट (IAT), जो 5 साल के बीएस-एमस डुअल डिग्री कोर्स या चार साल के बीएस डिग्री में एडमिशन देते हैं।
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (IISc), बैंग्लोर, बैचलर ऑफ साइंस कोर्स के लिए आईआईटीज और RGIPT/IIPE के लिए रिसर्च प्रोग्राम्स के लिए होता है। जेईई एडवांस्ड क्लियर करने वाले छात्रों को 4 साल के बीएस या इंटीग्रेटेड एमएससी कोर्स में एडमिशन दिया जाता है।
  • इसी तरह, NISER भुवनेश्वर जैसे संस्थानों के लिए नेशनल एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट (NEST) और कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG) आयोजित किए जाते हैं।

ISRO, DRDO में नौकरी कैसे लगती है?

साइंटिस्ट, रिसर्चर्स या प्रोफेसर की नौकरी पाने के लिए सिर्फ ग्रेजुएशन काफी नहीं है। बैचलर डिग्री के बाद मास्टर्स डिग्री या पीएचडी में एडमिशन ले सकते हैं। इसके लिए नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम जैसे- CSIR NET, GATE और JAM क्लिर करना जरूरी होता है।
एलिजिबिलिटी एग्जाम क्लियर करने या पीएचडी पूरी के बाद आप ISRO, DRDO, BARC, CSIR लैब्स में नौकरी का फॉर्म भरने के लिए पात्रता हासिल कर लेते हैं। इसके बाद ही साइंटिस्ट, रिसर्चर्स या प्रोफेसर के तौर पर बेहतर करियर शुरू कर सकते हैं।

ISRO में नौकरी के लिए सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (ICRB) की लिखित परीक्षा और DRDO में रिक्रूटमेंट एंड असेसमेंट सेंटर (RAC) के माध्यम से भर्ती करता है, जिसमें गेट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर चयन होता है।

रिसर्च फील्ड में कितनी सैलरी मिलती है?

पीएचडी या रिसर्च डिग्री पूरी करने के बाद सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में अच्छी नौकरी के रास्ते खुल जाते हैं। जहां अच्छी सैलरी मिलता है।

फील्ड जॉब रोल्स संभावित सैलरी पैकेज
सरकारी रिसर्च ISRO, DRDO, BARC, CSIR लैब्स में साइंटिस्ट 8 लाख से 1.20 लाख रुपये महीना तक
एकेडमिक IITs-NITs, सेंट्रल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर 90000 रुपये से 1.30 लाख रुपये महीना तक
प्राइवेट कॉर्पोरेट फार्मा, बायोटेक, AI/डेटा साइंस और लैब्स 8 से 18 लाख लाख रुपये सालाना तक

रिसर्च में चुनौतियां और समाधान

DreamXec के फाउंडर आशीष त्रिवेदी का कहना है कि ज्यादातर छात्र सोचते हैं कि रिसर्च की शुरुआत किसी शानदार आइडिया से होती है। असल में, इसकी शुरुआत अक्सर किसी ऐसी चीज से होती है जो आपको परेशान करती है जैसे- कोई ऐसी बात जिस पर आप बार-बार ध्यान देते हैं, लेकिन जिसे किसी ने ठीक नहीं किया है। उस परेशानी और पूरे हो चुके काम के बीच का जो फासला होता है, जहां ज्यादातर छात्र अटक जाते हैं। असल में उन्हें इस स्थिति से बाहर निकलने के तरीकों पर विचार करना चाहिए। रिसर्च फील्ड की चुनौतियों और उनके समाधान पर करिय एक्सपर्ट अशीष त्रिवेदी की पांच मुख्य बातें काम आ सकती हैं।

1. मुझे नहीं पता कि शुरुआत कहां से करूं?

किसी टॉपिक से शुरुआत न करें। एक ऐसे सवाल से शुरुआत करें जिसे आप एक लाइन में लिख सकें। अगर आप इसे एक लाइन में नहीं बता सकते, तो यह अभी रिसर्च का सवाल नहीं है। यह सिर्फ एक सब्जेक्ट है। कोई ऐसी समस्या चुनें जिसे आप अपने कैंपस के दस किलोमीटर के दायरे में असल में देख सकें। स्थानीय समस्याओं से आपको पहुंच, डेटा और दिलचस्पी लेने की वजह मिलती है।

2. गाइडेंस कैसे मिलेगी?

फैकल्टी मदद करने से मना नहीं करती। उन पर काम का बोझ बहुत ज्यादा होता है। इसलिए पूछने का तरीका बदलें। ‘सर, प्लीज मुझे गाइड करें’ कहने के बजाय, एक पेज का नोट भेजें। जिसमें आपके सवाल जैसे- यह क्यों जरूरी है, अगले चार हफ्तों में आप क्या करेंगे, और आपको ठीक-ठीक क्या चाहिए आदि। हर दो हफ्ते में तीस मिनट का समय, लैब का इस्तेमाल, या किसी से एक परिचय। साफ और समय-सीमा वाली मांगों को स्वीकार किया जाता है। अपने डिपार्टमेंट से बाहर भी देखें, और उन पेपर्स के राइटर्स को ईमेल करें जिन्हें आपने सच में पढ़ा है। आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा रिसर्चर छात्रों को जवाब देते हैं।

3. पैसे और लैब की सुविधा कैसे मिलेगी?

काम का दायरा इतना छोटा कर लें कि लागत लगभग न के बराबर हो जाए। खुद से पूछें कि सबसे सस्ता तरीका कौन सा है जिससे मेरी सबसे जरूरी धारणा (assumption) की जांच हो सके? ₹3,000 का काम करने वाला प्रोटोटाइप, ₹3,00,000 के उस प्लान से कहीं बेहतर है जो सिर्फ कागज पर मौजूद है। ग्रांट, इनोवेशन स्कीम, प्रतियोगिताएं और इनक्यूबेटर लगभग हमेशा ऐसी चीजों को सपोर्ट करते हैं जो पहले से मौजूद हो, भले ही वह शुरुआती या कच्ची अवस्था में ही क्यों न हो।

4. बहुत ज्यादा स्टडी मटेरियर से बचें

तीस एब्स्ट्रैक्ट (सारांश) पढ़ने के बजाय तीन पेपर्स को अच्छी तरह से पढ़ें। एक तरीका जो काम करता है: पहले सारांश (abstract) पढ़ें, फिर सीधे नतीजे (conclusion) पर जाएं, और उसके बाद काम करने के तरीके (methodology) को समझें। फिर पता करें कि इस स्टडी के लिए पैसे किसने दिए, सैंपल कितना बड़ा था, और क्या इसे दूसरे जानकारों ने परखा (peer-reviewed) था। किसी सोर्स को परखना भी रिसर्च की एक स्किल है और यह बहुत कम ही सिखाई जाती है।

5. अगर फेल हो गए तो क्या?’

ज्यादातर एक्सपेरिमेंट फेल ही होते हैं। यही तो असल काम है, कोई अपवाद नहीं। आप जो भी कोशिश करें, उसकी तारीख के साथ रिकॉर्ड रखें, जिसमें वे चीजें भी शामिल हों जो काम नहीं आईं। छह महीने बाद, वही रिकॉर्ड आपका सबूत और काम करने का तरीका (methodology) बन जाता है, और अक्सर यही वह सबसे प्रभावशाली चीज होती है जिसे आप किसी एम्प्लॉयर या फंड देने वाले के सामने पेश कर सकते हैं।

आशीष का कहना है कि रिसर्च सिर्फ टॉपर्स के लिए नहीं होती, और न ही यह आपके कॉलेज के नाम से तय होती है। काबिलियत तो पूरे देश में फैली हुई है, जो चीज समान रूप से नहीं मिलती, वह है सही गाइडेंस, पैसा और शुरुआत करने का कॉन्फिडेंस।

अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं

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