After 12th Career Tips in Hindi: साइंटिस्ट बनना है, पर कहां से शुरू करें, कौन-से ? रिसर्च फील्ड में बेहतर करियर पाने का ड्रीम बहुत से स्टूडेंट्स देखते हैं। लेकिन इस फील्ड में घुसने के लिए क्या करना चाहिए, कौन-सी डिग्री लें, कौन-सा एग्जाम दें आदि के बारे में आसानी से जानकारी नहीं मिल पाती। यहां स्टेप बाय स्टेप समझाया गया है कि रिसर्च क्षेत्र में करियर कैसे बनाया जा सकता है।

रिसर्च में करियर कैसे बनाएं?
सबसे पहले प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स वालों के लिए अलग प्रवेश प्रक्रिया आयोजित की जाती है, जिन्हें क्वालीफाई करने वाले छात्रों को ग्रेजुएशन या इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन मिलता है।
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) एप्टीट्यूड टेस्ट (IAT), जो 5 साल के बीएस-एमस डुअल डिग्री कोर्स या चार साल के बीएस डिग्री में एडमिशन देते हैं।
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (IISc), बैंग्लोर, बैचलर ऑफ साइंस कोर्स के लिए आईआईटीज और RGIPT/IIPE के लिए रिसर्च प्रोग्राम्स के लिए होता है। जेईई एडवांस्ड क्लियर करने वाले छात्रों को 4 साल के बीएस या इंटीग्रेटेड एमएससी कोर्स में एडमिशन दिया जाता है।
- इसी तरह, NISER भुवनेश्वर जैसे संस्थानों के लिए नेशनल एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट (NEST) और कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG) आयोजित किए जाते हैं।
ISRO, DRDO में नौकरी कैसे लगती है?
साइंटिस्ट, रिसर्चर्स या प्रोफेसर की नौकरी पाने के लिए सिर्फ ग्रेजुएशन काफी नहीं है। बैचलर डिग्री के बाद मास्टर्स डिग्री या पीएचडी में एडमिशन ले सकते हैं। इसके लिए नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम जैसे- CSIR NET, GATE और JAM क्लिर करना जरूरी होता है।
एलिजिबिलिटी एग्जाम क्लियर करने या पीएचडी पूरी के बाद आप ISRO, DRDO, BARC, CSIR लैब्स में नौकरी का फॉर्म भरने के लिए पात्रता हासिल कर लेते हैं। इसके बाद ही साइंटिस्ट, रिसर्चर्स या प्रोफेसर के तौर पर बेहतर करियर शुरू कर सकते हैं।
ISRO में नौकरी के लिए सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (ICRB) की लिखित परीक्षा और DRDO में रिक्रूटमेंट एंड असेसमेंट सेंटर (RAC) के माध्यम से भर्ती करता है, जिसमें गेट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर चयन होता है।
रिसर्च फील्ड में कितनी सैलरी मिलती है?
पीएचडी या रिसर्च डिग्री पूरी करने के बाद सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में अच्छी नौकरी के रास्ते खुल जाते हैं। जहां अच्छी सैलरी मिलता है।
| फील्ड | जॉब रोल्स | संभावित सैलरी पैकेज |
| सरकारी रिसर्च | ISRO, DRDO, BARC, CSIR लैब्स में साइंटिस्ट | 8 लाख से 1.20 लाख रुपये महीना तक |
| एकेडमिक | IITs-NITs, सेंट्रल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर | 90000 रुपये से 1.30 लाख रुपये महीना तक |
| प्राइवेट | कॉर्पोरेट फार्मा, बायोटेक, AI/डेटा साइंस और लैब्स | 8 से 18 लाख लाख रुपये सालाना तक |
रिसर्च में चुनौतियां और समाधान
DreamXec के फाउंडर आशीष त्रिवेदी का कहना है कि ज्यादातर छात्र सोचते हैं कि रिसर्च की शुरुआत किसी शानदार आइडिया से होती है। असल में, इसकी शुरुआत अक्सर किसी ऐसी चीज से होती है जो आपको परेशान करती है जैसे- कोई ऐसी बात जिस पर आप बार-बार ध्यान देते हैं, लेकिन जिसे किसी ने ठीक नहीं किया है। उस परेशानी और पूरे हो चुके काम के बीच का जो फासला होता है, जहां ज्यादातर छात्र अटक जाते हैं। असल में उन्हें इस स्थिति से बाहर निकलने के तरीकों पर विचार करना चाहिए। रिसर्च फील्ड की चुनौतियों और उनके समाधान पर करिय एक्सपर्ट अशीष त्रिवेदी की पांच मुख्य बातें काम आ सकती हैं।
1. मुझे नहीं पता कि शुरुआत कहां से करूं?
किसी टॉपिक से शुरुआत न करें। एक ऐसे सवाल से शुरुआत करें जिसे आप एक लाइन में लिख सकें। अगर आप इसे एक लाइन में नहीं बता सकते, तो यह अभी रिसर्च का सवाल नहीं है। यह सिर्फ एक सब्जेक्ट है। कोई ऐसी समस्या चुनें जिसे आप अपने कैंपस के दस किलोमीटर के दायरे में असल में देख सकें। स्थानीय समस्याओं से आपको पहुंच, डेटा और दिलचस्पी लेने की वजह मिलती है।
2. गाइडेंस कैसे मिलेगी?
फैकल्टी मदद करने से मना नहीं करती। उन पर काम का बोझ बहुत ज्यादा होता है। इसलिए पूछने का तरीका बदलें। ‘सर, प्लीज मुझे गाइड करें’ कहने के बजाय, एक पेज का नोट भेजें। जिसमें आपके सवाल जैसे- यह क्यों जरूरी है, अगले चार हफ्तों में आप क्या करेंगे, और आपको ठीक-ठीक क्या चाहिए आदि। हर दो हफ्ते में तीस मिनट का समय, लैब का इस्तेमाल, या किसी से एक परिचय। साफ और समय-सीमा वाली मांगों को स्वीकार किया जाता है। अपने डिपार्टमेंट से बाहर भी देखें, और उन पेपर्स के राइटर्स को ईमेल करें जिन्हें आपने सच में पढ़ा है। आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा रिसर्चर छात्रों को जवाब देते हैं।
3. पैसे और लैब की सुविधा कैसे मिलेगी?
काम का दायरा इतना छोटा कर लें कि लागत लगभग न के बराबर हो जाए। खुद से पूछें कि सबसे सस्ता तरीका कौन सा है जिससे मेरी सबसे जरूरी धारणा (assumption) की जांच हो सके? ₹3,000 का काम करने वाला प्रोटोटाइप, ₹3,00,000 के उस प्लान से कहीं बेहतर है जो सिर्फ कागज पर मौजूद है। ग्रांट, इनोवेशन स्कीम, प्रतियोगिताएं और इनक्यूबेटर लगभग हमेशा ऐसी चीजों को सपोर्ट करते हैं जो पहले से मौजूद हो, भले ही वह शुरुआती या कच्ची अवस्था में ही क्यों न हो।
4. बहुत ज्यादा स्टडी मटेरियर से बचें
तीस एब्स्ट्रैक्ट (सारांश) पढ़ने के बजाय तीन पेपर्स को अच्छी तरह से पढ़ें। एक तरीका जो काम करता है: पहले सारांश (abstract) पढ़ें, फिर सीधे नतीजे (conclusion) पर जाएं, और उसके बाद काम करने के तरीके (methodology) को समझें। फिर पता करें कि इस स्टडी के लिए पैसे किसने दिए, सैंपल कितना बड़ा था, और क्या इसे दूसरे जानकारों ने परखा (peer-reviewed) था। किसी सोर्स को परखना भी रिसर्च की एक स्किल है और यह बहुत कम ही सिखाई जाती है।
5. अगर फेल हो गए तो क्या?’
ज्यादातर एक्सपेरिमेंट फेल ही होते हैं। यही तो असल काम है, कोई अपवाद नहीं। आप जो भी कोशिश करें, उसकी तारीख के साथ रिकॉर्ड रखें, जिसमें वे चीजें भी शामिल हों जो काम नहीं आईं। छह महीने बाद, वही रिकॉर्ड आपका सबूत और काम करने का तरीका (methodology) बन जाता है, और अक्सर यही वह सबसे प्रभावशाली चीज होती है जिसे आप किसी एम्प्लॉयर या फंड देने वाले के सामने पेश कर सकते हैं।
आशीष का कहना है कि रिसर्च सिर्फ टॉपर्स के लिए नहीं होती, और न ही यह आपके कॉलेज के नाम से तय होती है। काबिलियत तो पूरे देश में फैली हुई है, जो चीज समान रूप से नहीं मिलती, वह है सही गाइडेंस, पैसा और शुरुआत करने का कॉन्फिडेंस।
