ITR और टैक्स ऑडिट की डेडलाइन बढ़ी: क्या आप भी हैं इस राहत के दायरे में? | CBDT Extends ITR And Tax Audit Deadlines 2026: Check New Dates And Eligibility


ITR और टैक्स ऑडिट की डेडलाइन बढ़ी: क्या आप भी हैं इस राहत के दायरे में?

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए दो अहम डेडलाइन आगे बढ़ा दी हैं। अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 21 अक्टूबर 2026 हो गई है। वहीं, ऑडिट के दायरे में आने वाले मामलों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की लास्ट डेट 21 नवंबर 2026 तय की गई है। यह राहत केवल धारा 139(1) के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स पर लागू होगी। नॉन-ऑडिट मामलों के लिए डेडलाइन पहले जैसी ही रहेगी।

आखिर इस छूट का फायदा किसे मिलेगा? टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाली कंपनियों, फर्मों, एलएलपी (LLP) और उन प्रोफेशनल्स को इसका लाभ मिलेगा जिनके बुक्स का ऑडिट जरूरी है। हालांकि, ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में यह राहत नहीं मिलेगी। उनके लिए फॉर्म 3CEB भरने की लास्ट डेट 31 अक्टूबर ही है और उनका ITR 30 नवंबर तक दाखिल करना होगा। जीएसटी, टीडीएस और अन्य कॉरपोरेट फाइलिंग्स अपने पुराने शेड्यूल के हिसाब से ही चलेंगी।

CBDT Extends ITR and Tax Audit Deadlines 2026: Check New Dates and Eligibility

ITR डेडलाइन और टैक्स ऑडिट में छूट: कौन-कौन है इसके दायरे में

इसे ऐसे समझें। क्या आप बिना ट्रांसफर प्राइसिंग के टैक्स ऑडिट के दायरे में आते हैं? तो 21 अक्टूबर तक ऑडिट रिपोर्ट और 21 नवंबर तक ITR फाइल कर दें। अगर आपके इंटरनेशनल या खास घरेलू ट्रांजैक्शन हैं, तो 31 अक्टूबर तक फॉर्म 3CEB और 30 नवंबर तक ITR दाखिल करना होगा। वहीं, जो टैक्सपेयर्स ऑडिट के दायरे में नहीं हैं, उनके लिए पुरानी डेडलाइन ही लागू रहेगी।

234A/234F ब्याज और पेनाल्टी: 21 नवंबर के बाद क्या बदलेगा

अगर आप 21 नवंबर की डेडलाइन मिस करते हैं, तो आपको दो तरह की चपत लग सकती है। धारा 234A के तहत 22 नवंबर से फाइलिंग की तारीख तक बकाया सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पर हर महीने 1 फीसदी की दर से ब्याज लगेगा। वहीं, धारा 234F के तहत 5 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई पर 5,000 रुपये और इससे कम इनकम पर 1,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। 21 नवंबर तक पूरा टैक्स भरकर आप 234A के ब्याज से बच सकते हैं।

इसे एक आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए टैक्स ऑडिट वाली किसी कंसल्टिंग फर्म पर एडवांस टैक्स और टीडीएस कटने के बाद 60,000 रुपये का टैक्स बनता है। फर्म 25 नवंबर को फाइलिंग और पेमेंट करती है। इस स्थिति में 234A के तहत एक महीने का 600 रुपये ब्याज लगेगा। चूंकि कुल आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, इसलिए 234F के तहत 5,000 रुपये की लेट फीस भी जुड़ेगी। अगर फर्म 20 नवंबर को ही 60,000 रुपये जमा कर देती, तो 234A का ब्याज जीरो होता।

ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रिजीम: एक नज़र में तुलना

सुविधा / नियम न्यू टैक्स रिजीम (डिफ़ॉल्ट) ओल्ड टैक्स रिजीम
स्टैंडर्ड डिडक्शन सैलरीड/पेंशनर्स के लिए 75,000 रुपये सैलरीड/पेंशनर्स के लिए 50,000 रुपये
रिबेट की सीमा नियमों के तहत 12 लाख रुपये तक की प्रभावी राहत 5 लाख रुपये तक राहत
डिडक्शन/कटौती सीमित छूट, आसान फाइलिंग 80C, 80D, HRA जैसी कई टैक्स छूट
कब फायदेमंद कम छूट, स्थिर आय और कम दावों के मामलों में ज्यादा डिडक्शन, HRA या होम लोन का फायदा लेना हो

इस मिली मोहलत का पूरा फायदा उठाएं। अभी से क्लाइंट-वाइज ट्रैकर बनाएं, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) का बुक्स से मिलान करके आंकड़े फाइनल करें। एडवांस टैक्स, टीडीएस क्रेडिट और फॉर्म 26AS को क्रॉस-चेक कर लें। जहां लागू हो, वहां फॉर्म 3CEB तैयार रखें। आखिरी हफ्ते के सर्वर रश से बचने के लिए पोर्टल के ऑफ-पीक आवर्स में ही अपलोडिंग और वेरिफिकेशन का काम निपटाएं।



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