ITR-U: टैक्स रिटर्न में हुई गलती को कैसे सुधारें? जानें 48 महीने का पूरा गणित | ITR-U Filing Guide 2026: How To Correct Income Tax Return Mistakes And Avoid Penalties


ITR-U: टैक्स रिटर्न में हुई गलती को कैसे सुधारें? जानें 48 महीने का पूरा गणित

7 सितंबर 2026 को सीबीडीटी (CBDT) की सदस्य पल्लवी अग्रवाल ने बताया कि देश में अब तक 1.32 करोड़ अपडेटेड रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इससे बीते चार सालों में सरकार को ₹16,083 करोड़ का अतिरिक्त टैक्स मिला है। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का नियम काफी कारगर साबित हो रहा है। हालांकि, रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख बीतने के बाद एआईएस (AIS) में विसंगतियां यानी मिस्मैच के मामले फिर बढ़ रहे हैं। ऐसे में कई टैक्सपेयर्स समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या आज उनके मामले में ITR-U काम आ सकता है? आइए, इस आसान और तथ्यात्मक गाइड से सब कुछ समझते हैं।

ITR-U के जरिए आप संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने के 48 महीनों के भीतर अपनी आय की गड़बड़ियों को ठीक कर सकते हैं। इसके लिए आपको बकाया टैक्स, ब्याज और फीस के साथ अतिरिक्त टैक्स भी देना होता है। यह एक्स्ट्रा चार्ज समयसीमा के हिसाब से 25%, 50%, 60% या 70% तक हो सकता है। ध्यान रखें, ITR-U दाखिल करके आप न तो रिफंड का दावा कर सकते हैं और न ही टैक्स देनदारी घटा सकते हैं। इसके अलावा, सर्च (छापेमारी) वाले मामलों, लंबित असेसमेंट या 36 महीने बाद जारी हुए 148A नोटिस वाले मामलों में इसका फायदा नहीं मिलता।

ITR-U Filing Guide 2026: How to Correct Income Tax Return Mistakes and Avoid Penalties

ITR-U की बेसिक बातें: कौन है पात्र, 48 महीने की विंडो और एक्स्ट्रा टैक्स का गणित

कब काम आएगा ITR-U? इसे ऐसे समझें: क्या आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) या फॉर्म 26AS में कोई ऐसी आय दिख रही है, जो आपसे छूट गई थी? अगर हां, और इसे दिखाने पर आपकी टैक्स देनदारी बढ़ती है, तो ITR-U आपके लिए सही विकल्प है। अगर ऐसा नहीं है, तो नियमों के तहत रेक्टिफिकेशन या रिवाइज्ड रिटर्न का रास्ता अपनाएं। फाइल करने का तरीका: e-File → Income Tax Returns → File Income Tax Return → अपना ITR चुनें → Updated Return। इसके बाद धारा 140B के तहत बकाया टैक्स जमा करें और आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), ईवीसी (EVC) या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से ई-वेरिफाई करें।

सैलरी का उदाहरण और न्यू बनाम ओल्ड टैक्स रिजीम की तुलना

मान लीजिए, वित्त वर्ष 2025-26 में आपकी कुल सैलरी ₹12.6 लाख है। ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम ₹11.85 लाख बचती है। न्यू टैक्स रिजीम में मिलने वाली छूट के तहत ₹12 लाख तक की आय पर जीरो टैक्स बनता है। लेकिन अगर बैंक ब्याज की छूट गई ₹40,000 की रकम इसमें जुड़ जाए, तो कुल आय ₹12.25 लाख हो जाएगी। इस तरह सीमा से ऊपर निकली ₹25,000 की रकम पर 15% की दर से ₹3,750 टैक्स और 4% सेस लगेगा। यदि आप 12 से 24 महीनों के भीतर ITR-U दाखिल करते हैं, तो आपको 50% अतिरिक्त टैक्स (₹1,950) और पोर्टल द्वारा कैलकुलेट किया गया ब्याज भी देना होगा।

फीचर न्यू रिजीम (AY 2026-27) ओल्ड रिजीम
डिफ़ॉल्ट स्टेटस डिफ़ॉल्ट; जरूरत पड़ने पर बाहर चुन सकते हैं वैकल्पिक; न्यू रिजीम से ऑप्ट-आउट करना होगा
स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 ₹50,000
87A रिबेट ₹60,000 तक; कुल आय ≤ ₹12 लाख ₹12,500 तक; कुल आय ≤ ₹5 लाख
डिडक्शन (कटौती) का दायरा सीमित, केवल निर्धारित कटौतियां विस्तृत और कई प्रकार की कटौतियां उपलब्ध

टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी बातें: सबसे पहले अपने AIS और 26AS का मिलान करें, सभी दस्तावेज जुटाएं और इनकम टैक्स पोर्टल पर सही कैलकुलेशन करें। पेमेंट करने के तुरंत बाद ई-वेरिफाई करना न भूलें। ध्यान रखें, ITR-U से रिफंड नहीं पाया जा सकता और न ही टैक्स कम करने के लिए इसे भरा जा सकता है। सर्च कार्रवाई, जारी असेसमेंट या 36 महीने से पुराने 148A नोटिस के मामलों में यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। अतिरिक्त टैक्स के बोझ को सीमित रखने के लिए 48 महीने की समयसीमा के भीतर ही कदम उठाएं।



Leave a Comment