Jamui News: झाझा के इकलौते खेल ग्राउंड चांदवारी मैदान पर लगा है उपेक्षा का ग्रहण, Jamui Hindi News


Jamui News: झाझा के इकलौते खेल ग्राउंड चांदवारी मैदान पर लगा है उपेक्षा का ग्रहण झाझा के इकलौते खेल ग्राउंड चांदवारी मैदान पर लगा है उपेक्षा का ग्रहण

Jamui News: झाझा । निज संवाददाता एक तो इकलौता,और वो भी कोई करम का नहीं। सूरत व सीरत दोनों ही बिगड़ी है। यह हाल है झाझा शहर की छाती पर पसरे रेलवे चांदवारी मैदान का। खेल ग्राउंड के बिगड़े हाल की वजह से युवाओं के तबके से लेकर झाझा में पदस्थापित रेलकर्मियों के बच्चों तक के लिए भी अपनी खेल गतिविधियों को अंजाम देने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। तो,सुबह मॉर्निंग वॉक को इस इकलौते ग्राउंड का रूख करने वाले बुजुर्गों को भी मैदान के हाल के मद्देनजर निराशाजनक स्थिति से दो-चार होना पड़ता है। कई बुजुर्गों का कहना था कि इस स्थिति में वे टहलने को कहीं और का रूख करना बेहतर समझते हैं। उधर, डीसीए,जमुई के अधिकारी डॉ.राकेश कुमार सिंह एवं क्रिकेटर जावेद अंसारी व राहुल सिंह आदि समेत कई खेलप्रेमियों की पीड़ा थी कि ग्राउंड के बिगड़े हाल एवं खेल प्रैक्टिस की सुविधा-संसाधन के अभाव में इलाके की सैकड़ों युवाओं की खेल प्रतिभा निखरने के पहले ही मानों दफन हो जा रही है। लोगों की यह बहुत पुरानी शिकायत व नाराजगी रही है कि अपनी मिल्कियत वाले उक्त ग्राउंड के मेंटेनेंस की ओर रेल महकमे का रवैया उदासीन व उपेक्षात्मक रहा है,किसी ने कभी भी कोई ध्यान नहीं दिया है। बिगड़ी सूरत जरूर सुधरेगी ,इस उम्मीद व इंतजार में सालों क्या दशक गुजर गए हैं। पर,हाल-हालात सुधरने-संवरने की बजाय इसकी बदहाली मानों नए डेग भर रही है। बता दें कि झाझा के खेलप्रेमियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए खेल के मैदान के नाम पर शहर का यह इकलौता स्पोर्ट्स ग्राउंड है। बड़े-बुजुर्गों के मार्निंग वॉक, साइकलिंग,जॉगिंग अथवा अन्य तरह की कसरतों के लिए भी रेलवे का यह ग्राउंड ही एकमात्र जरिया है।

कभी ‘चांद’ की ही तरह इसकी सूरत व सीरत भी काफी सलोनी हुआ करती थी, होते थे कई बड़े व नामचीन टूर्नामेंट:

पूर्व फुटबॉलर सत्यनारायण टंडसी समेत शहर के कई बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि रेलवे की मिल्कयत वाले इस ग्राउंड का नाम चांद की तरह जितना सलोना है,कभी इसकी सूरत भी उतनी ही सलोनी हुआ करती थी। और….यहां खेल के,खासकर फुटबॉल के कभी काफी बड़े टूर्नामेंट हुआ करते थे और उन टूर्नामेंट में फुटबॉल के उस दौर के नामी-गिरामी खिलाड़ी शिरकत किया करते थे। इतना ही नहीं,विगत में बीसीए के तत्वाधान में इसी मैदान पर विभिन्न फॉर्मेटों में बिहार महिला क्रिकेट टूर्नामेंट भी हुए हैं। पर,इन सबके बावजूद अफसोसजनक यह कि,चांद जैसे सलोने इस ग्राउंड की सूरत गुजरे करीब दो दशकों से अब अमावस्या की कालिमा सरीखी (बद) सूरती की झलक देती दिखी है, ऐसा कई झाझा वासियों का कहना है। सड़ांध मारती गंदगी व चहुंओर पसरा कचरा, यहां आने वाले खिलाड़ियों व बुजुर्गों के मूड का सुबह-सवेरे ही जायका बिगाड़ डालता है। उधर,बरसात के मौसम में हाल यह होता है कि मामूली बारिश में भी पूरा ग्राउंड मानों तालाब में तब्दील हो जाता है।

बीसीए के तहत क्रिकेट टूर्नामेंट व महिला क्रिकेट का आयोजन भी हुए:

विगत में तो बीसीए के तत्वाधान में कई क्रिकेट टूर्नामेंट भी इस ग्राउंड की शोभा बढ़ाते दिखे हैं। बताने की जरूरत नहीं कि शहीद लुकमान फुटबॉल एवं बीसीए के तहत होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंटों में बिहार के विभिन्न जिलों,शहरों के अलावा फुटबॉल मैचों में तो पड़ोस के कई अन्य प्रदेशों की भी नामी-गिरामी टीमें शिरकत करती रही हैं। बीसीए के तहत जहां अंडर-16 क्रिकेट टूर्नामेंट संपन्न हुआ है, तो फिर महिला क्रिकेट के आयोजन की भी रूपरेखा बनी थी। इन सबके बावजूद,यहां स्टेडियम की दशकों पुरानी मांग के पूरा होने की बात छोड़,ग्राउंड का हाल भी ग्राउंड जैसा नहीं है।

बिगड़ती सूरत पर नहीं है जिम्मेदारों का कोई ध्यान:

उदासीनता की हद यह कि ग्राउंड की चहारदीवारी कई हिस्सों में या तो पूरी तरह टूट चूकी हैं या फिर टूट रही है। टूटती चहारदीवारी की ईंटें भी लगभग नदारद दिख रही हैं। यह सिलसिला अर्से से जारी है पर, रेल के संबंधित कारिंदे इन बातों को ले पूरी तरह इत्मीनान की चादर ओढ़े नजर आते रहे हैं,किसी को भी कभी इसकी सुध लेते नहीं देखा ,ऐसी शिकायत शहर के कई संवेदनशील लोगों को है। लोगों का कहना है कि,इसके बदहाल हाल-हालात कुछ ऐसा ही महसूस कराते प्रतीत होते हैं मानों रेलवे के लोग शायद यह भूल चूके हों कि उक्त ग्राउंड उनकी ही मिल्कियत है और उनकी ही जिम्मेदारी। समुचित रख-रखाव के अभाव में मैदान के बाहरी हिस्से की दीवारें जहां ढ़हने लगी है,तो अंदरूनी हिस्सा गंदगी व झाड़-झंखाड़ से पटा भरा है। पर,इन हालातों का ध्यान-संज्ञान किसी को नहीं। विगत में झाझा के दौरे पर आए पूमरे के तत्कालीन जीएम अनिल कु.खंडेलवाल का ध्यान जब इस संवाददाता ने उक्त ग्राउंड की बदहाली व उपेक्षा की ओर दिलाया तो उन्होंने इस संबंध में स्थानीय एसएम से वस्तुस्थिति की जानकारी कर कार्रवाई का भरोसा दिया था। उसके पूर्व के एक अन्य जीएम एल.सी.त्रिवेदी के ध्यान में भी यह मसला मीडियाकर्मियों के अलावा मेमू शेड के पूर्व सीनि.डीईई संजीव कुमार द्वारा लाए जाने पर उन्होंने भी इस क्रम में सकारात्मक कार्रवाई के संकेत दिए थे।

जीएम कार्यालय ने केंद्रीय मंत्री कार्यालय को ग्राउंड के सौंदर्यीकरण व मरम्मति का कार्य प्रस्तावित होने की दी थी सूचना:

बता दें कि बीते फरवरी, 26 में जीएम (इंजीनियरिंग) कार्यालय ने पत्रांक डब्लू-1/433/09/पीजी/वीआईपी/स्टेट रेफ.,दि.20.02.26 के जरिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के कार्यालय को लिखित सूचना दी थी कि चांदवारी मैदान की मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण का कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित है, स्वीकृति उपरांत अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। उक्त जानकारी झाझा के एक व्यवसायी संगठन के प्रफुलचंद्र त्रिवेदी के ज्ञापन के संदर्भ में दी गई थी।

पूछे जाने वाले प्रश्न

झाझा के चांदवारी मैदान की हालत क्यों बिगड़ी है?

झाझा के चांदवारी मैदान की हालत बिगड़ने का मुख्य कारण रेलवे महकमे का उदासीन रवैया और मेंटेनेंस की कमी है।

क्या मैदान पर कोई टूर्नामेंट आयोजित होते हैं?+



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