Lindsey Graham Dies: ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन, भारत पर 500% टैरिफ वाला ला रहे थे बिल – us republican senator lindsey graham dies by heart attack family confirms
Lindsey Graham Dies: अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया है। वो 71 साल के थे और इन दिनों उस बिल पर काम कर रहे थे जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों, खासकर भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाना था।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन
वॉशिंगटन: साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। यह जानकारी ग्राहम के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर जारी एक बयान में दी गई। एक्स पर जारी एक बयान में कहा गया है कि ‘सीनेटर ग्राहम का परिवार इस समय प्रार्थनाओं के लिए आभारी है और इस बेहद मुश्किल दौर में निजता बनाए रखने का अनुरोध करता है।’
आपको बता दें कि सीनेटर लिंडसे ग्राहम डोनाल्ड ट्रंप के काफी करीबी थे और इस वक्त उस बिल को पारित करवाने की तैयारी कर रहे थे जिसमें भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान था। ये बिल रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने को लेकर था जिसको लेकर ट्रंप प्रशासन से समझौता हो गया था। लेकिन अब उनका निधन हो गया है।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन
एनबीसी न्यूज ने बताया है कि लिंडसे ग्राहम को शनिवार की रात उनके कैपिटल हिल निवास पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ आया था जिसके बाद डॉक्टरों से संपर्क किया गया था। ग्राहम 9 जुलाई को ही 71 साल के हुए थे और उन्होंने इसी शुक्रवार को ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की थी और रविवार को उन्हें ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में शामिल होना था। इसके अलावा सीनेट बजट कमिटी के चेयरमैन के तौर पर उन्होंने हाल ही में नवंबर 2026 के चुनाव में पांचवें कार्यकाल के लिए अपनी पार्टी का नॉमिनेशन हासिल किया था।
लिंडसे ग्राहम कौन थे?
लिंडसे ग्राहम अमेरिका के एक प्रमुख और वरिष्ठ राजनीतिज्ञ थे जो रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े थे। वह 2003 से लेकर जुलाई 2026 में अपने निधन तक अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन (सीनेट) में साउथ कैरोलिना राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
वह 2003 से लगातार अमेरिकी सीनेट के सदस्य रहे और बजट समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।
सीनेटर बनने से पहले वह 1995 से 2003 तक अमेरिकी संसद के निचले सदन यानि हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स के सदस्य भी रहे।
राजनीति में आने से पहले उन्होंने अमेरिकी वायु सेना में एक वकील के रूप में सेवाएं दी थीं और कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
उन्हें वाशिंगटन में एक ‘हॉक’ नेता माना जाता था जो एक मजबूत अमेरिकी सेना और विदेशों में अमेरिकी हस्तक्षेप जैसे इराक और अफगानिस्तान युद्ध के कड़े समर्थक थे। वे इजरायल और यूक्रेन के भी बड़े मददगार माने जाते थे।
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने भारत को लेकर काफी सख्त रूख अख्तियार कर रखा था। वो बार बार यूक्रेन युद्ध के लिए भारत पर निशाना साध रहे थे और उन्होंने पिछले साल रूसी तेल खरीदने के लिए भारत और चीन के खिलाफ 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले बिल को लाने की घोषणा की थी। इसी हफ्ते ट्रंप प्रशासन के साथ लिंडसे ग्राहम का समझौता हुआ था और इस बिल में कुछ संशोधन किए गये थे। जल्द ही इस बिल को अमेरिकी सीनेट में पेश किया जाना है जिसे 80 से ज्यादा सीनेटर्स का समर्थन मिल गया है। लेकिन अब लिंडसे ग्राहम के निधन से इस बिल के भविष्य पर सवाल उठ गये हैं।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।
अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।
विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।
पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।
पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।
अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें