
हस्तिनापुर में द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों के अस्त्र-शस्त्र कौशल के प्रदर्शन के लिए भव्य रंगभूमि का आयोजन किया. कौरव और पांडव राजकुमारों ने दर्शकों के सामने प्रवेश किया. महारथियों, राजपरिवार और आम जनता की मौजूदगी में सभी की निगाहें युवराजों के प्रदर्शन पर टिकी थीं.

सबसे पहले युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव ने अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया. उन्होंने धनुर्विद्या, तलवारबाजी और विभिन्न युद्ध कलाओं में अपनी दक्षता दिखाई. उनके संतुलित प्रदर्शन ने दर्शकों को प्रभावित किया और द्रोणाचार्य के प्रशिक्षण की श्रेष्ठता को साबित किया.
Published at : 05 Jun 2026 06:00 AM (IST)