Maharashtra:प्याज किसानों ने केंद्र से मांगा 10,000 करोड़ का राहत पैकेज, सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल – Maharashtra Onion Farmers Have Demanded A Relief Package Of Rs 10000 Crore From The Centre


महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने केंद्र सरकार से 10,000 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। किसानों का कहना है कि निर्यात पर बार-बार रोक, प्राकृतिक आपदाओं और कीमतों में भारी गिरावट ने उन्हें गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने यह मुद्दा उठाया है।

क्या बोले प्याज उत्पादक किसान संगठन अध्यक्ष?

दिघोले के अनुसार, गलत निर्यात नीतियों, नकली बीजों और भंडारण में होने वाले नुकसान से किसानों को पिछले कुछ वर्षों में बहुत घाटा हुआ है। केंद्र सरकार ने 2019, 2020 और 2023-24 में प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी। इसके अलावा 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क और अलग-अलग समय पर न्यूनतम निर्यात मूल्य तय करने जैसे फैसलों ने भी किसानों को नुकसान पहुंचाया। सरकार ने जब नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी एजेंसियों के जरिए कम कीमतों पर प्याज बाजार में उतारा, तो इससे भी किसानों को मिलने वाले दाम गिर गए।

प्याज की खेती को भारी बारिश, ओलावृष्टि, बेमौसम बरसात, बाढ़ और सूखे से भी काफी नुकसान पहुंचा है। नकली बीजों और फसलों की बीमारियों ने समस्या को और गंभीर बना दिया। संगठन का दावा है कि जिन किसानों ने 2025 में प्याज जमा किया और 2026 में बेचा, उन्हें बहुत ही कम दाम मिले। संगठन चाहता है कि आर्थिक मदद सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाए। महाराष्ट्र के लगभग 30 जिलों में प्याज की खेती होती है और करीब 10 से 15 लाख किसान परिवार इससे जुड़े हैं।

संगठन ने सरकार से कई मांग की

संगठन ने कई और मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं। इनमें प्रमाणित प्याज बीजों पर सब्सिडी और भंडारण के लिए गोदाम बनाने पर 100 प्रतिशत सब्सिडी शामिल है। किसानों ने मांग की है कि किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और सहकारी समितियों के जरिए सीधे ग्राहकों को प्याज बेचने के लिए एक विशेष फंड बनाया जाए। नासिक, पुणे, सोलापुर, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में प्याज प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए आर्थिक मदद दी जाए।

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किसानों ने प्याज पाउडर, पेस्ट और अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के लिए भी समर्थन मांगा है। उन्होंने एक स्थिर राष्ट्रीय निर्यात नीति और ‘राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण कोष’ बनाने की मांग की है ताकि कीमतें गिरने पर किसानों को सुरक्षा मिल सके। इसके अलावा, किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय प्याज उत्पादक निगम’ बनाने और कम ब्याज पर कर्ज देने की भी अपील की गई है। दिघोले ने कहा कि अगर प्याज किसान बचेगा, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश मजबूत होगा।


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