महाराष्ट्र सरकार द्वारा MPSC भर्ती परीक्षा में बदलाव करते हुए अब 60-40 के नए अनुपात का GR (सरकारी आदेश) जारी कर नया राजनीतिक बखेड़ा कर दिया है. इस आदेश के मुताबिक अब उपजिलाधिकारी और तहसीलदार के पदों पर 60 फीसदी प्रमोशन से और केवल 40 फीसदी सीधी भर्ती से होगी. जबकि नायव तहसीलदार के पदों पर सीधी भर्ती मात्र 20 फीसदी ही रह गयी है. इसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी एनडीए सरकार पर निशाना साधा है.
कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने इस आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की है. लोंढे के मुताबिक यह आदेश युवाओं के सपने तोड़ने जैसा है. अगर सरकार आदेश वापस नहीं लेती तो सड़कों पर आंदोलन होगा.
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पहले 66 फीसदी पद सीधी भर्ती से भरे जाते थे
तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए अतुल लोंढे ने कहा कि अधिकारियों के 100 पदों में से 66 पद MPSC के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा भरे जाते थे, जबकि 33 प्रतिशत पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाते थे. लेकिन भाजपा सरकार ने नया GR जारी कर इस अनुपात में बदलाव कर दिया है. नए GR के अनुसार, उपजिलाधिकारी और तहसीलदार जैसे पदों के 60 प्रतिशत पद पदोन्नति से तथा 40 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे.
इसी प्रकार, नायब तहसीलदार के 80 प्रतिशत पद पदोन्नति से, जबकि केवल 20 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे. यह GR अधिकारी बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं और उनके परिवारों के साथ अन्याय करने वाला है.
युवाओं की कार्यक्षमता पर सवाल
अतुल लोंढे ने आगे कहा कि हाल ही में राजस्व विभाग में 160 पद पदोन्नति के माध्यम से भरे गए हैं. मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने दावा किया है कि इससे राजस्व विभाग अधिक कार्यक्षम होगा. ऐसे में क्या बावनकुळे यह कहना चाहते हैं कि सीधी भर्ती के माध्यम से अधिकारी बनने वाले युवा कार्यक्षम नहीं होते?
पुणे में 32 लाख युवा करते हैं तैयारी
अतुल लोंढे ने कहा कि पुणे में करीब 32 लाख युवा MPSC की तैयारी करते हैं. इस नए GR के कारण इन युवाओं के सपने टूट गए हैं. यह किसानों, मेहनतकशों, मजदूरों और सामान्य वर्ग के अभिभावकों एवं युवाओं को बर्बाद करने वाला कदम है. सीधी भर्ती के माध्यम से अधिकारी बनने का सपना अब केवल दिवास्वप्न बनकर रह जाएगा.
उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं है. सरकार को इस GR पर पुनर्विचार कर इसे रद्द करना चाहिए, अन्यथा युवाओं को सड़कों पर उतरकर सरकार से जवाब मांगना पड़ेगा.
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