NEET Will be cancel or not? बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए नीट यूजी परीक्षा रद्द करने की तैयारी तेज हो गई है। तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में नीट सिस्टम खत्म करने का प्रस्ताव पास करा लिया है। राज्य सरकार लंबे समय से नीट के बजाय 12वीं के मार्क्स के आधार पर मेडिकल में एडमिशन की मांग कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के.जी. अरुणराज एक अलग प्रस्ताव पेश किया जिसमें केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए एक समान NEET सिस्टम को खत्म करने के लिए संबंधित केंद्रीय कानूनों में बदलाव करने की मांग की गई।
नीट रद्द करने पर राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं थी
प्रस्ताव में बताया गया है कि तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘तमिलनाडु एडमिशन टू अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्सेज बिल, 2021’ पास किया था, जिसमें NEET से छूट की मांग की गई थी, लेकिन इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है।
विधानसभा केंद्र से नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एक्ट, 2020, नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी एक्ट, 2020 और अन्य संबंधित कानूनों में बदलाव करके राष्ट्रीय स्तर पर NEET को बंद करने का आग्रह करेगी।
इसके अलावा, स्कूल शिक्षा, तमिल विकास, सूचना और प्रचार मंत्री फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 के मौजूदा स्वरूप का विरोध करने वाला प्रस्ताव पेश करेंगे।
क्यों खत्म होना चाहिए नीट? गिनवाईं कमियां
नीट यूजी खत्म करने को लेकर परीक्षा में कई कमियां गिनवाई गई हैं। परीक्षा प्रणाली में बार-बार प्रश्न पत्र लीक होने और गड़बड़ियों का भी जिक्र किया गया है, जिसमें NEET-UG 2026 का रद्द होना और उसके बाद दोबारा परीक्षा होना शामिल है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इन घटनाओं से लाखों छात्रों को भारी मानसिक परेशानी हुई है और परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा कम हुआ है। प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि-
- बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
- नीट परीक्षा रद्द और री-एग्जाम के चलते छात्र मानसिक तनाव महसूस करते हैं।
- NEET सामाजिक न्याय और समानता को कमजोर करता है।
- ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े बैकग्राउंड वाले छात्रों, खासकर तमिल भाषा में पढ़ाई करने वाले छात्रों पर बुरा असर डालता है।
- महंगे कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता की भी आलोचना की गई है
- नीट यूजी परीक्षा ने छात्रों का ध्यान स्कूल के सिलेबस से हटा दिया है।
प्रस्ताव में उन प्रावधानों पर चिंता जताई गई है जो सरकार को FCRA रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा खत्म होने, रिन्यू न होने, इनकार, रद्द होने या सरेंडर होने के बाद चैरिटेबल संगठनों की संपत्ति को अपने कब्जे में लेने, मैनेज करने, निपटाने या बेचने की इजाजत दे सकते हैं।
नीट सिस्टम खत्म करने पर एक्सपर्ट की राय
लाडली फाउंडेशन के संस्थापक देवेंद्र कुमार का नीट खत्म करने पर कहना है कि पूरी तरह से वापस स्टेट लेवल मार्क्स बेस्ड एडमिशन सिस्टम पर लौट जाना इसका सॉल्यूशन नहीं है। क्योंकि पहले स्थानीय प्रभाव, राजनीतिक दबाव, ताकतवर लॉबी और सिस्टमैटिक गड़बड़ियां देखी जा चुकी हैं। कई बार, योग्य और मेहनती स्टूडेंट्स को नुकसान उठाना पड़ा, जबकि एडमिशन प्रोसेस में असली प्रतिभा और क्षमता के बजाय प्रभावशाली लोगों के पक्ष में हेरफेर किया गया।
भारत सरकार ने पूरे देश में ट्रांसपेरेंसी, एक समान मानक और असेसमेंट के समान मौके देने के लिए एक नेशनल लेवल एग्जाम सिस्टम बनाकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत जैसे बड़े और विविधताओं वाले देश को ऐसे मजबूत और विश्वसनीय सिस्टम की जरूरत है, जो यह सुनिश्चित कर सकें कि मेडिकल जैसे महत्वपूर्ण प्रोफेशन में एडमिशन एलिजिबिलिटी, एप्टीट्यूड और मेरिट के आधार पर ही हो।
देवेंद्र कुमार
नीट नहीं तो फिर कैसे बनेंगे डॉक्टर?
राज्य सरकार नीट यूजी खत्म करके 12वीं क्लास के मार्क्स के आधार पर मेडिकल कोर्स में एडमिशन कराना चाहती है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने नीट पेपर लीक विवाद के दौरान पिछले दिनों इस पर एक डिटेल्ड बयान जारी किया था। बयान में कहा गया था कि केंद्र सरकार को नीट खत्म करके राज्यों को MBBS , BDS और AYUSH कोर्स में ‘राज्य कोटे’ के तहत सभी सीटें 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति देनी चाहिए।
बयान वाले नोटिस में लिखा था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई 2026 को 5,432 केंद्रों पर नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG 2026) आयोजित किया गया था। अकेले तमिलनाडु में ही, यह परीक्षा 31 शहरों में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में 22,05,035 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें तमिलनाडु के लगभग 1.4 लाख उम्मीदवार शामिल थे। एग्जाम कैंसिल ने पूरे देश में लाखों मेडिकल उम्मीदवारों की उम्मीदों को तोड़ दिया है।
