NEET मामले में NTA ने मानी गलती, RTI को दी अधूरी जानकारी, सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे का दिया हवाला   – neet reforms implementation nta admits incomplete rti reply ngix 


(यह खबर इंडिया टुडे द्वारा प्राप्त एक आरटीआई के जवाब का फॉलो-अप है, जिसमें यह खुलासा हुआ कि एनटीए ने एनईटी विवाद के बाद लागू किए गए सुधारों का कोई समेकित रिकॉर्ड नहीं रखा था.)

इस समय देश की परीक्षा तंत्र में केवल दावों को जगह मिल रही है. ऐसा हम नहीं बल्कि रिकॉर्ड कह रहे हैं. NEET पेपर लीक के बाद से पूरे देश में हलचल मची हुई है लेकिन अब भी केवल दावों पर काम हो रहा है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के कुछ ही घंटों बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपना नया बयान जारी किया. बता दें कि इंडिया टुडे ने इसके पहले खबर में बताया था कि NTA के पास इस बात का कोई पक्का रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह मालूम चल सके कि उन्होंने परीक्षा सुधारने के लिए मिलीं सभी 101 सलाहों में से अब तक क्या-क्या काम किया है. जैसे ही ये खबर सामने आई उसके कुछ घंटों के बाद एनटीए ने तुरंत सामने आकर अपनी सफाई दी और नए दस्तावेज जारी किए कि उन्होंने क्या-क्या कदम उठाए हैं. 

4 जून को रात करीब 8.50 बजे भेजे गए ईमेल में एनटीए के बड़े अधिकारी ने खुद यह बात मानी कि जो जानकारी उन्होंने पहले RTI के तहत दी थी, वह अधूरी थी और उसमें पूरी सच्चाई नहीं बताई गई थी. अपनी इस गलती को सुधारने के लिए, एजेंसी ने दो नए सरकारी डॉक्यूमेंट दिखाए. इनमें सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया उनका वह बड़ा और डिटेल हलफनामा भी शामिल है, जिसमें उन्होंने सुधारों की पूरी जानकारी दी है. यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब सरकारी अधिकारियों और एनटीए प्रतिनिधियों द्वारा बार-बार यह दावा किया जा रहा था कि 70 से 75 प्रतिशत सुधारों को पहले ही लागू किया जा चुका है, जबकि आरटीआई के जवाब में कहा गया था कि कोई भी अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है. 

जानकारी थी अधूंरी 

अपने इस नए बयान में एनटीए ने माना जानकारी अधूरी थी. प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (FAA) ने कहा कि यह देखा गया है कि सीपीआईओ (CPIO) ने अनजाने में अधूरी जानकारी प्रदान की थी. एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन के नेतृत्व वाली विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय समिति (HLCE) ने अपनी रिपोर्ट ‘भारत में राष्ट्रीय साझा प्रवेश परीक्षा का सुधार’ के तहत 101 सिफारिशें सौंपी थीं. ऐसे में एजेंसी के अनुसार, इन सिफारिशों में कई व्यापक मुद्दे शामिल हैं जैसे- एजेंसी का पुनर्गठन, परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करना, उम्मीदवारों का प्रमाणीकरण सुधारना, नई तकनीकों को अपनाना, शिकायत निवारण प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य सहायता, कोचिंग सेंटरों का नियमन और स्नातक शिक्षा का सामंजस्य. 

एनटीए ने बताया कि इन सभी 101 सिफारिशों को 46 मुख्य सिफारिशों में ग्रुप किया गया है. 

कौन कर रहा है सुधारों की निगरानी?

एनटीए ने एक ऐसी निगरानी प्रणाली का भी जिक्र किया है जिसका जिक्र मूल आरटीआई जवाब में नहीं था. एजेंसी ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय ने सिफारिशों के काम की देखरेख के लिए 14 नवंबर 2024 को के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) का गठन किया था. एनटीए के अनुसार, इस समिति ने प्रगति की समीक्षा के लिए कई बार बैठकें की हैं और वह लगातार इस पर नजर रख रही है. इसकी सबसे हालिया बैठक 17, अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी. 

सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर हलफनामे में उन सुधारों के बारे में काफी विस्तृत जानकारी दी गई है जिन्हें या तो लागू कर दिया गया है या जो लागू होने की प्रक्रिया में हैं.  हलफनामे के अनुसार एनटीए ने कई कदम उठाए हैं-

आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और फेस ऑथेंटिकेशन. 

एआई (AI) आधारित सीसीटीवी निगरानी और मल्टी-लेयर फ्रिस्किंग . 

मोबाइल सिग्नल जैमर का उपयोग और प्रश्नपत्र सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल.

नीट यूजी 2026 के लिए देश भर में 621 जिला स्तरीय समन्वय समितियां (DLCC). 

5,432 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 1.85 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल किया गया. 

परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए पांच-स्तरीय निरीक्षण प्रणाली स्थापित की गई है. 

मुख्य सवाल अब भी बरकरार

अतिरिक्त जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद, आरटीआई के माध्यम से उठाया गया मुख्य मुद्दा अभी भी अनसुलझा है. मूल आरटीआई क्वेरी में सभी 101 सुधारों की सिफारिश-वार कार्यान्वयन स्थिति मांगी गई थी. भले ही एनटीए ने अब किए गए उपायों की रिपोर्ट सौंपी है और सुप्रीम कोर्ट का हलफनामा दिखाया है, लेकिन दोनों में से कोई भी दस्तावेज एक ऐसी पूर्ण ट्रैकर लिस्ट नहीं करता जिससे यह पता चल सके कि कौन सी सिफारिश पूरी तरह से लागू हुई है, कौन सी आंशिक रूप से लागू हुई है या कौन सी अभी भी लंबित है. नतीजतन, अभी भी कोई ऐसा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड मौजूद नहीं है जो स्वतंत्र रूप से नीट विवाद के बाद सुझाए गए प्रत्येक सुधार की सटीक स्थिति की पुष्टि कर सके. 

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