NEET UG Topper Aryan Dubey Success Story: बेटे की परवरिश के लिए मां ने साइंटिस्ट की नौकरी छोड़ दी। आज वही बेटा नीट स्टेट टाॅपर बना है। आर्यन दुबे की सफलता की कहानी में सिर्फ नीट ही बल्कि जेईई एग्जाम को क्रैक करना भी शामिल है। आइए जानते हैं कैसे उन्होंने मेडिकल और इंजीनियरिंग एग्जाम की तैयारी की और दोनों एग्जाम क्रैक किए।

NEET UG में यूपी स्टेट टॉपर और ऑल इंडिया रैंक-7 हासिल करने वाले आर्यन ने अपनी मेहनत और लगन से नया मुकाम हासिल किया है। आइए जानते हैं कैसे इंजीनियरिंग और मेडिकल एग्जाम क्रैक करने वाले आर्यन की कहानी मेहनत, सही रणनीति और लक्ष्य पर फोकस की है।
9वीं क्लास से शुरू हुआ था आर्यन का सफर
एक वीडियो में आर्यन दुबे बताते हैं कि वह DPS वाराणसी के छात्र हैं। उनका सफर 9वीं क्लास में ही शुरू हो गया था, जब उन्होंने डॉक्टर बनने का फैसला किया था। आर्यन ने 10वीं में 97.6 प्रतिशत अंक और 12वीं में 98.2 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। हमेशा से पढ़ाई में मेधावी रहने के बाद उनका मानना है कि जब आप किसी चीज के लिए अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग करते हैं और उसका नतीजा इतना शानदार होता है, तो वह सारी मेहनत सार्थक हो जाती है।
पिता IIT-BHU में प्रोफेसर, मां ने साइंटिस्ट की नौकरी छोड़कर की परवरिश
आर्यन दुबे के पिता वाराणसी के IIT-BHU में बायोकेमिकल विभाग में प्रोफसर हैं। उनकी मां मोनू पांडे भी साइंटिस्ट रह चुकी हैं। हालांकि, आर्यन और उनकी बहन की पढ़ाई के लिए मां ने अपना काम छोड़कर घर पर रहना चुना, जिससे बच्चों पर ध्यान दिया जा सके। नीट एग्जाम पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद आर्यन को परेशानी हुई थी लेकिन उन्होंने खुद मोटिवेट रखा और इस दौरान परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया।
पहले निकाला JEE मेंस, अब AIR-7 लाकर बने नीट स्टेट टाॅपर
आर्यन ने पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग एग्जाम, दोनों पर फोकस किया था। पहले उन्होंने जेईई मेंस परीक्षा में शानदार 99.699 परसेंटाइल हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने RE-NEET परीक्षा में 720 में से 710 अंक हासिल किए। वह न सिर्फ उत्तर प्रदेश में स्टेट टाॅपर बने, बल्कि ऑल इंडिया रैंक (AIR) 7 भी हासिल की।
आर्यन ने कहा कि उसने इस साल की शुरुआत में हुई NEET परीक्षा में 720 में से 715 अंक हासिल किए थे। हालांकि, पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद वह बहुत निराश हुआ और कुछ समय के लिए उसका मोटिवेशन खत्म हो गया। उसके माता-पिता और शिक्षकों ने उसका हौसला बढ़ाया और उसे याद दिलाया कि उसकी एकमात्र जिम्मेदारी अपनी तैयारी और कड़ी मेहनत पर ध्यान देना है। निराशा के कारण वह लगभग 10 दिनों तक ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाया लेकिन बाद में उसने अपना ध्यान वापस पाया और वापसी की।
NEET की तैयारी के लिए रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे आर्यन
अपनी तैयारी की रणनीति के बारे में आर्यन ने बताया कि वह रोजाना पूरी लगन के साथ 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे। कोचिंग क्लास जाने से पहले वह कम से कम डेढ़ घंटे सेल्फ-स्टडी जरूर करते थे। वह स्कूल जाने से पहले भी डेढ़ घंटे पढ़ाई करते थे और कोचिंग से लौटने के बाद लगभग 5 घंटे तक पढ़ाई जारी रखते थे। कभी-कभी वह नीट के टाॅपिक्स पढ़ते तो कभी वह जेईई परीक्षा के सवालों को देखते थे।
आर्यन ने कहा कि एक बार टाइम-टेबल बनाने के बाद, उसे सही से फाॅलो करना जरूरी है। चाहे मोटिवेशन महसूस हो या न हो, वह हर दिन अपनी तय पढ़ाई के घंटे पूरे पूरे करके ही सफलता तक पहुंचा जा सकता है।
