NSE IPO: ₹5 लाख करोड़ का वैल्युएशन, जानिए कब खुलेगा और कैसे करें अप्लाई
18 अगस्त 2026 तक के बाजार के अनुमानों के मुताबिक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आगामी IPO का वैल्युएशन करीब ₹5 से ₹5.3 लाख करोड़ के आसपास रहने की चर्चा है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी इसके जरिए एनएसई कोई नया फंड नहीं जुटाएगा। नियमों के मुताबिक एनएसई खुद को अपने ही एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं कर सकता, इसलिए इसकी लिस्टिंग BSE पर होने की संभावना है। इस पर एनएसई के सीईओ आशीष चौहान का कहना है, “यह भारत का नियम है और हमें इसका पालन करना होगा।”
NSE ने 17 जून 2026 को ड्राफ्ट पेपर (DRHP) दाखिल किए थे। इसके तहत 148.9 मिलियन (लगभग 14.89 करोड़) तक शेयर OFS के जरिए बेचे जाएंगे, जो कंपनी की कुल इक्विटी का करीब 6 फीसदी हिस्सा है। बाजार के अनुमानों के अनुसार आईपीओ का साइज लगभग ₹30,000 करोड़ हो सकता है, हालांकि असली आंकड़ा फाइनल प्राइस तय होने के बाद ही साफ होगा। अब देश में T+3 लिस्टिंग नियम लागू है, जिससे आईपीओ बंद होने से लिस्टिंग के बीच का समय काफी कम हो गया है।

NSE IPO का वैल्युएशन, OFS स्ट्रक्चर और कहां जाएगा आपका पैसा?
आईपीओ के फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) में निवेशकों का पैसा सीधे कंपनी के पास जाता है, जबकि ओएफएस (OFS) में यह रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलती है। चूंकि एनएसई का यह आईपीओ पूरी तरह ओएफएस है, इसलिए पूरा पैसा बिकवाली करने वाले शेयरधारकों को मिलेगा। ड्राफ्ट के मुताबिक इसमें कर्मचारियों के लिए रिजर्वेशन भी शामिल हो सकता है। मेनबोर्ड आईपीओ में आमतौर पर 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 35 फीसदी रिटेल निवेशकों और 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए आरक्षित होता है। रिटेल कैटेगरी में ज्यादा आवेदन आने पर लॉटरी के जरिए अलॉटमेंट तय होता है, जहां एक लॉट की वैल्यू अमूमन ₹10,000 से ₹15,000 के बीच रखी जाती है।
UPI प्रोसेस, कट-ऑफ टाइम और अलॉटमेंट या रिफंड की टाइमलाइन
आईपीओ में अप्लाई करने के लिए अपने ब्रोकर या बैंक ऐप का इस्तेमाल करें, वहां अपनी UPI ID दर्ज करें, डिटेल्स चेक करें और फिर UPI मैंडेट अप्रूव करें। मैंडेट अप्रूव करने की आखिरी समय सीमा आईपीओ बंद होने के दिन शाम 5:00 बजे तक होती है। एक ही यूपीआई आईडी या किसी थर्ड-पार्टी आईडी से एक से ज्यादा आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। T+3 फ्रेमवर्क की वजह से अलॉटमेंट का आधार तेजी से फाइनल होता है और अलॉट न होने पर ब्लॉक हुआ फंड अमूमन T+2 या T+3 दिन के भीतर अनब्लॉक हो जाता है।
| एफडी बेंचमार्क (7% सालाना कंपाउंडिंग की दर से) | ₹1,00,000 पर मैच्योरिटी रकम |
|---|---|
| 5 साल | ₹1,40,255 |
| 10 साल | ₹1,96,715 |
| 15 साल | ₹2,75,903 |
ग्रे-मार्केट के जोखिम और लिस्टिंग के बाद इंडेक्स में एंट्री का गणित
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पूरी तरह से अनऑफिशियल और गैर-नियंत्रित होता है, इसलिए इसे कोई ठोस गाइडेंस मानने के बजाय सिर्फ बाजार की हलचल समझें। अगर एनएसई की लिस्टिंग बीएसई (BSE) पर होती है, तो इसे निफ्टी (Nifty) इंडेक्स में शामिल नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि निफ्टी में सिर्फ एनएसई पर लिस्टेड शेयर ही आते हैं। वहीं, फ्री-फ्लोट और नियमों के आधार पर बीएसई अपने इंडेक्स में इस शेयर को तेजी से जोड़ सकता है। लिस्टिंग के बाद बीएसई के साथ एनएसई के वैल्युएशन की तुलना और तेज होना तय है।