पाकिस्तान को बलूचिस्तान में लगातार चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट नजम सेठी इसमें भारत से इजरायल तक कई देशों का हाथ मान रहे हैं।

नजम सेठी से हालिया वर्षों में भारत-पाकिस्तान के संबंधों में लगातार आ रही गिरावट पर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि बीते दिनों में पर्दे के पीछे चीजों को ठीक करने की कोशिशों पर कई तरह की बातें सामने आई हैं लेकिन ऐसा नहीं लगता कि इसे कोई खास फायदा होगा। सेठी ने कहा कि फिलहाल भारत-पाकिस्तान में रिश्ता सुधरने की संभावना नजर नहीं आती है।
2025 में सुधर सकती थी चीजें: सेठी
नजम सेठी ने इस दौरान कहा कि भारत की मौजूदा सरकार ने पाकिस्तान पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में नरेंद्र मोदी सरकार के लिए पाकिस्तान के साथ किसी भी बातचीत के लिए जाना आसान नहीं होगा। हालांकि भाजपा की पहली सरकार में अटल बिहार वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी खुलकर पाकिस्तान से बेहतर रिश्तों की वकालत करते थे।
नजम सेठी ने कार्यक्रम में दावा किया कि नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के शुरुआती सालों में भारत-पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद थी। इस वक्त पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ थे और उनके नरेंद्र मोदी से अच्छे रिश्ते थे। नवाज शरीफ ने नरेंद्र मोदी सरकार से बातचीत करने की कोशिश की थी लेकिन सेना ने उनके हाथ खींच दिए दिए और चीजें खराब हो गईं।
बलूचिस्तान में इजरायल की एंट्री
नजम सेठी ने यह भी कहा है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ तेज होते विद्रोह के पीछे एक ग्रेट गेम है। इस ग्रेट गेम में बलूचिस्तान के विद्रोही गुटों के साथ भारत और अफगानिस्तान के अलावा इजरायल भी शामिल है। ये एक ग्रेट गेम बन चुका है, ऐसे में बलूचिस्तान में चीजों का ठीक होना आसान नहीं है।
बलूचिस्तान में बीते कुछ वर्षों में पकिस्तानी सेना और सरकारी कर्मचारियों पर हमले बढ़े हैं। बलूचिस्तान में विद्रोही पाकिस्तानी सरकार और सेना से ज्यादा आजादी और संसाधनों पर अधिकारों की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर अपने सामने आए इस पूरे संकट का ठीकरा पाकिस्तान ने बार-बार भारत के सिर पर फोड़ा है।
