पाकिस्तान और कुवैत रक्षा समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते में कई शर्तें सऊदी अरब-पाकिस्तान डिफेंस डील के जैसी होंगी। इसे लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। पाकिस्तान कुवैत को सैन्य सुरक्षा देने के बदले तेल और पैसों की मांग कर रहा है। कुवैत वर्तमान में ईरान के हमलों से परेशान है।

पाकिस्तान की बढ़ेंगी मुश्किलें
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस बात को लेकर चिंतित है कि सऊदी अरब के साथ पिछले साल किया गया आपसी रक्षा समझौता उसे अमेरिका-ईरान युद्ध में घसीट सकता है।सोमवार को ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमले किए जाने के बाद, पाकिस्तान ने ईरान से कहा कि वह रियाद पर हमलों को खुद पर हमले के तौर पर देखेगा। हालांकि, ईरान ने इन हमलों से खुद को दूर कर लिया है। उधर, हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी के किनारे स्थित बाब अल मंदेब को बंद करने की धमकी दी है।
ईरान के हमलों से कुवैत परेशान
कुवैत पर फरवरी के बाद से ईरान ने कई बड़े हमले किए हैं। हाल में जब अमेरिकी सेना ईरान पर हमले कर रही है, जब भी तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर कुवैत को निशाना बनाया है। इनमें से अधिकतर हमले कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हैं। कुछ हमलों में कुवैत के रणनीतिक तेल भंडारों और सप्लाई लाइन को भी निशाना बनाया गया है। इस कारण कुवैत अपने पारंपरिक सैन्य सहयोगी अमेरिका के अलावा दूसरे देश की ओर देख रहा है।
कुवैत की कितनी मदद करेगा पाकिस्तान?
कुवैत का 2023 से पाकिस्तान के साथ प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास के लिए सीमित रक्षा समझौता रहा है। एक पाकिस्तानी सरकारी अधिकारी ने कहा कि अब वह इस्लामाबाद से ऐसी सैन्य उपस्थिति चाहता है जो सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के समझौते जैसी हो, जिसमें “जमीन पर हजारों पाकिस्तानी सैनिक, लड़ाकू विमान, ड्रोन, वायु रक्षा प्रणाली और अन्य रक्षा-संबंधी सुविधाएं” शामिल हों। यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान इतनी दूर तक जाने को तैयार है या नहीं, क्योंकि सऊदी अरब के साथ उसका समझौता रियाद के साथ दशकों पुराने करीबी गठबंधन का नतीजा था।
