Parliament Monsoon Session 2026,ये ‘आया राम गया राम’ की सियायत संसद में शुरू हो गई, मनीष तिवारी बोले-नए दल-बदल कानून जरूरत – congress mp manish tewari raised need of new anti defection law needed amid mp switchover said parliament should discuss know all – Chandigarh News


Manish Tewari News: कांग्रेस के नेता और सांसद मनीष तिवारी ने सांसदों के पाला बदलने को बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा है कि संसद में इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि क्या देश को एक नए दल-बदल विरोधी कानून की जरूरत है। मनीष तिवारी ने हरियाणा के निकल ‘आया राम गया राम’ घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा है कि यह सियासत अब संसद में शुरू हो गई है।

हाइलाइट्स

  • मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ मनीष तिवारी ने रखी बड़ी मांग
  • चर्चा हो क्या देश को नए दल बदल रोधी कानून की जरूरत है
  • मनीष तिवारी बोले सांसदों के दल-बदल से लोकतंत्र कमजोर हुआ
Manish Tiwari demand new anti defection law
मनीष तिवारी ने जताई नए दल-बदल विरोध कानून की जरूरत।(फोटोनवभारतटाइम्स.कॉम)
चंडीगढ़: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के साथ छोड़ने के साथ उद्धव ठाकरे के छह सांसदों के शिंदे की पार्टी में जाने को लेकर एक तरफ जहां राजनीति गर्म है तो वहीं मॉनसूत्र सत्र से ठीक पहले कांग्रेस के चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने इस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सब चीजें एक तरफ रखिए। पहले तो इस चर्चा होनी चाहिए क्या देश को एक नए दल-बदल विरोधी कानून की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘आया राम गया राम’ की सियायत संसद में शुरू हो गई है। इसने लोकतंत्र को कमजोर किया है। पिछले तीन महीने में 33 सांसदों ने पार्टियां बदली हैं। इनमें 26 लोकसभा के सांसद हैं, जबकि सात राज्यसभा के सांसद है। चार राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफे दिए हैं। इसमें तीन बीजेपी से फिर राज्यसभा पहुंचे हैं।

टीएमसी, यूबीटी और आप में टूट

टीएमसी की टूट और उद्धव ठाकरे के सांसदों के पाला बदलने से पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों बीजेपी का दामन थामा था। ममता बनर्जी के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफ देकर अब बीजेपी ने निर्वाचित हुए हैं। मनीष तिवारी पीएम मोदी के चंडीगढ़ के दौरे में मिले थे। उनकी पीएम मोदी के साथ गर्मजोशी वाली मुलाकात से तमाम तरह की चर्चाएं छिड़ गई थी। मनीष तिवारी ने पीएम मोदी के साथ वाली तस्वीरों साझा करके मामला और गरमा दिया था। उन्होंने लिखा था कि मैंने हमेशा विकास की ज़रूरतों को दलीय राजनीति से ऊपर रखने की कोशिश की है।

मुख्य मुद्दा यह है कि 2024 में लोगों ने जो जनादेश दिया था और लोकसभा का मौजूदा स्वरूप, अब बहुत अलग हैं। इसलिए, संसद को सबसे पहले बड़े पैमाने पर हो रही दलबदल की समस्या पर चर्चा करनी चाहिए। ये दलबदल किसी वैचारिक मतभेद, नीतिगत असहमति या बुनियादी मुद्दों की वजह से नहीं, बल्कि अवसरवाद और राजनीतिक फायदे के लिए हुए हैं।

मनीष तिवारी, कांग्रेस सांसद

मनीष तिवारी ने छेड़ी नई बहस

मॉनसून सत्र से पहले मनीष तिवारी ने दल-बदल कानून की जरूरत का जिक्र करके नई बहस छेड़ दी है। गौरतलब हो कि भारत में राजनीतिक अस्थिरता और पद के लालच में होने वाले दलबदल को रोकने के लिए वर्ष 1985 में संविधान का 52वां संशोधन किया गया। इसके तहत संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके बाद 2003 में 91वें संशोधन द्वारा इसमें और सख्त प्रावधान किए गए थे। थोक दलबदल’ (पार्टी के एक-तिहाई सदस्यों द्वारा अलग होने) के अपवाद को समाप्त कर दिया गया। अब विलय के लिए किसी दल के कम-से-कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन अनिवार्य कर दिया गया।

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‘आया राम गया राम’ से की तुलना

मनीष तिवारी ने हाल ही में सांसदों के पाला बदलने की तुलना ‘आया राम गया राम’ से की है। 1967 आया राम गया राम हरियाणा के विधायक गया लाल द्वारा एक ही दिन में तीन बार पार्टियां बदलने के बाद यह जुमला भारतीय राजनीति में प्रसिद्ध हुआ था, जिसने कानून की आवश्यकता को जन्म दिया। भारत में राजीव गांधी सरकार के दौरान 52वां संविधान संशोधन पारित किया गया। इसने संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के लिए दलबदल को एक दंडनीय अपराध बनाया, जिसके तहत वे अपनी सदस्यता खो सकते हैं।

अचलेंद्र कटियार

लेखक के बारे मेंअचलेंद्र कटियारअचलेंद्र कुमार कटियार नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में गुजरात में रहकर पश्चिमी राज्यों की हलचल को कवर करते हैं। प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ अध्यापन को मिलाकर उन्हें 17 से अधिक वर्षों का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में रिपोर्टर और एडिटर की भूमिका में काम किया है। अचलेंद्र कुमार कटियार ने सितंबर 2022 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था।

पिछले तीन वर्षों में उन्होंने तीन बड़े चुनावों को कवर किया है। इनमें 2022 गुजरात विधानसभा चुनाव, 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव शामिल हैं। गुजरात विधानसभा चुनावों में उन्होंने ‘गुजरात बोले’ के तहत कई ग्राउंड रिपोर्ट्स की थीं।

गुजरात की राजनीतिक हलचल हो या फिर कोई बड़ा घटनाक्रम, उसके तमाम पहलुओं को अचलेंद्र रिपोर्ट करते हैं। गुजरात में अहमदाबाद विमान हादसे को उन्होंने सभी एंगल से कवर किया था। राजनीतिक घटनाक्रमों को वे स्टोरी और वीडियो के जरिए पाठकों तक पहुंचाते हैं।

विशेषज्ञता:
गुजरात समेत पश्चिमी राज्यों की राजनीति पर अच्छी पकड़, अपराध और ब्यूरोक्रेसी की हलचल, शहरों के विकास से जुड़े अपडेट और बड़े आयोजनों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना।

पत्रकारिता अनुभव:
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया को मिलाकर 17 से अधिक वर्षों से कार्यरत अचलेंद्र कुमार कटियार ने अप्रैल 2008 में मेरठ से प्रकाशित होने वाले डीएलए न्यूज़पेपर से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान (कानपुर लोकेशन) में सब-एडिटर के तौर पर काम किया। फिर कानपुर में ही दैनिक जागरण समूह के आई-नेक्ट न्यूज़पेपर में बतौर सब-एडिटर कार्य किया।

मार्च 2011 में उन्होंने दिल्ली का रुख किया और इंडिया न्यूज़ समूह के अख़बार आज समाज को जॉइन किया। यहां विभिन्न डेस्क के साथ-साथ खेल रिपोर्टिंग भी की। अप्रैल 2012 में हिंदुस्तान टाइम्स समूह के अख़बार हिंदुस्तान की युवा टीम का हिस्सा बने। यहां रहते हुए उन्होंने टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया से जुड़ी तमाम हलचलों को कवर किया।

2014 में वे हिंदुस्तान के दिल्ली ब्यूरो की रिपोर्टिंग टीम में शामिल हुए। इसके बाद दिल्ली मेट्रो, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और सीपीडब्ल्यूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) से जुड़ी खबरों के साथ-साथ दिल्ली की समस्याओं को कवर किया।

2017 में दिल्ली-एनसीआर के अंतर्गत आने वाले गुरुग्राम के ब्यूरो चीफ बने। बतौर चीफ रिपोर्टर उन्होंने हरियाणा की टीम को लीड किया। इस दौरान हरियाणा के 2019 विधानसभा और लोकसभा चुनावों को कवर किया। कई बड़ी रैलियों की रिपोर्टिंग की और कोरोना महामारी के दौरान ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज किया।

विश्वविद्यालय में अध्यापन:
2020 में न्यूज़रूम से क्लासरूम की ओर रुख करते हुए उन्होंने गुजरात के वडोदरा स्थित पारूल यूनिवर्सिटी को जॉइन किया। यहां उन्होंने फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया। इस दौरान पत्रकारिता के छात्रों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ फील्ड के अनुभवों से भी अवगत कराया।

अगस्त 2021 में उन्होंने मीडिया स्टार्टअप नेशन प्लान न्यूज़ को जॉइन किया। यहां ‘रिमांड’ नाम के टॉक शो के जरिए कई हस्तियों के इंटरव्यू किए।

शिक्षा / पुरस्कार:
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले अचलेंद्र कटियार ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJM University), कानपुर के डीएवी कॉलेज से पीजी किया है। इसके बाद दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया से मीडिया की पढ़ाई की।

अच्छे काम के लिए अचलेंद्र कटियार को कई इन-हाउस और बाहरी संस्थाओं से पुरस्कार मिल चुके हैं। हरियाणा में काम के दौरान उन्हें ‘गुरुग्राम अचीवर्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था।

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