<p>देश की आर्थिक असमानता और महंगाई के गंभीर मुद्दे पर एक बेहद विस्फोटक बहस छिड़ गई है। शो का मुख्य एजेंडा देश की अर्थव्यवस्था की उस कड़वी हकीकत को उजागर करना है, जहाँ एक तरफ देश की चुनिंदा बड़ी कंपनियों और कॉर्पोरेट घरानों का मुनाफा लगातार करोड़ों-अरबों रुपये बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ देश की आम जनता और मध्यम वर्ग लगातार बढ़ती महंगाई और टैक्स के बोझ तले पिस रहा है। संदीप चौधरी ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि क्या देश का विकास केवल कागजी आंकड़ों और कुछ उद्योगपतियों की तिजोरियों तक ही सीमित होकर रह गया है?देश की आर्थिक असमानता और महंगाई के गंभीर मुद्दे पर एक बेहद विस्फोटक बहस छिड़ गई है। शो का मुख्य एजेंडा देश की अर्थव्यवस्था की उस कड़वी हकीकत को उजागर करना है, जहाँ एक तरफ देश की चुनिंदा बड़ी कंपनियों और कॉर्पोरेट घरानों का मुनाफा लगातार करोड़ों-अरबों रुपये बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ देश की आम जनता और मध्यम वर्ग लगातार बढ़ती महंगाई और टैक्स के बोझ तले पिस रहा है। संदीप चौधरी ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि क्या देश का विकास केवल कागजी आंकड़ों और कुछ उद्योगपतियों की तिजोरियों तक ही सीमित होकर रह गया है?</p>